वाराणसी। विश्व संस्कृति दिवस पर नमामि गंगे ने काशी की सांस्कृतिक धरोहर सहेजने की अपील की। कोरोना से बचाव के लिए घाटों पर जागरूकता कार्यक्रम के दौरान सभी से मास्क पहनने और सामाजिक दूरी बनाए रखने की अपील भी की गई। शुक्रवार को संयोजक राजेश शुक्ला ने कहा कि काशी की सांस्कृतिक विरासत और परंपरा भी वैश्विक सभ्यता के लिए धरोहर है। काशी का वर्णन वेद और पुराणों में भी मिलता है। यह विश्व की सबसे प्राचीन नगरी है। चंद्राकार उत्तर वाहिनी पावन गंगा के किनारे बसी विश्वनाथ प्रिया काशी में द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक काशी विश्वनाथ मंदिर है। भगवान शिव के त्रिशूल पर बसी काशी को शिव नगरी के रूप में भी जाना जाता है। काशी की आत्मा मां गंगा में बसी है। गंगा सनातनी संस्कृति की जीवन रेखा है। काशी में बहती उत्तर वाहिनी गंगा अर्थव्यवस्था का मेरुदंड और भारतीय अध्यात्म का सार है। यहां की गलियां, मठ, मंदिर, संस्कृति, परंपरा भारतवर्ष में अद्वितीय है। स्कंदपुराण के काशी खंड में यहां के तीर्थों, घाटों का आख्यान, गंगा महिमा, वाराणसी महिमा, ज्ञानवापी माहात्म्य, त्रिलोचन आविर्भाव आदि का उल्लेख है। वाराणसी केवल हिंदुओं के लिए ही खास नहीं है यहां से कुछ किलोमीटर दूर सारनाथ है, जहां गौतम बुद्ध ने अपने शिष्यों को पहला उपदेश दिया था। संस्कृत पढ़ने से लेकर मोक्ष प्राप्ति तक के लिए प्राचीनकाल से ही लोग वाराणसी आया करते हैं और ये क्रम आज भी जारी है। दो नदियों वरुणा और असि के मध्य बसा होने के कारण इसका नाम वाराणसी पड़ा। काशी की संस्कृति गंगा-जमुनी संस्कृति कही जाती है। काशी अनेक महापुरुषों की गाथाओं का परिचायक रही है। अगर काशी की परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को इसी तरह आगे बढ़ाना है तो बस जरूरत है इसे और संजोने की। संरक्षित रखने की और इसकी अहमियत दुनिया को बताने की।