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काशी के कोतवाल का हुआ भव्य शृंगार, सजी भव्य झांकी
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काशी के कोतवाल बाबा कालभैरव का भव्य शृंगार देखकर काशीवासी अभिभूत नजर आए। बाबा के वार्षिक शृंगार महोत्सव एवं भंडारे में देर रात तक श्रद्धालुओं की कतार लगी रही। महोत्सव में श्रद्धालुओं ने बाबा का दर्शन करने के बाद प्रसाद ग्रहण किया। बाबा का खप्पर कारज से भरा गया और बाबा कालभैरव के मंदिर का परिक्षेत्र देर रात तक बाबा के जयकारे से गूंजता रहा।
बृहस्पतिवार को महोत्सव का शुभारंभ प्रात: पांच बजे से महंत पं. सुमित उपाध्याय ने बाबा को पंचमेवा स्नान एवं नवीन वस्त्र लगाकर मनमोहक झांकी सजाकर मंदिर का कपाट भक्तों के लिए खोला गया। दोपहर में भोग आरती के बाद बाबा को नया रजत मुखौटा लगाकर भव्य स्वरूप की झांकी सजाई गई। बाबा को विभिन्न प्रकार के मिष्ठान, फल, पकवान, कारज का भोग लगाकर आरती उतारी गई। इसके बाद दोबारा बाबा के मंदिर का कपाट खोला गया।
कपाट खुलते ही भक्तों ने बाबा का जयकारा लगाया। अपराह्न चार बजे से चारों वेदों की ऋचाओं से बाबा की बसंत पूजा हुई। शाम को छह बजे भजन संध्या में आलोक नादान के संगीत पर बाबा के भक्त झूम उठे। मध्यरात्रि में सवा लाख बत्तियों से बाबा की महाआरती की गई। बाबा के दरबार को कामिनी की पत्तियों व फूलों से सजाया गया था। मंदिर परिसर रंग-बिरंगी रौशनी से जगमग रहा। मंदिर के पूर्व महंत स्व. प्रदीपनाथ उपाध्याय को मंदिर प्रांगण में श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान मनीष उपाध्याय, पुनीत उपाध्याय मौजूद रहे।
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बृहस्पतिवार को महोत्सव का शुभारंभ प्रात: पांच बजे से महंत पं. सुमित उपाध्याय ने बाबा को पंचमेवा स्नान एवं नवीन वस्त्र लगाकर मनमोहक झांकी सजाकर मंदिर का कपाट भक्तों के लिए खोला गया। दोपहर में भोग आरती के बाद बाबा को नया रजत मुखौटा लगाकर भव्य स्वरूप की झांकी सजाई गई। बाबा को विभिन्न प्रकार के मिष्ठान, फल, पकवान, कारज का भोग लगाकर आरती उतारी गई। इसके बाद दोबारा बाबा के मंदिर का कपाट खोला गया।
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कपाट खुलते ही भक्तों ने बाबा का जयकारा लगाया। अपराह्न चार बजे से चारों वेदों की ऋचाओं से बाबा की बसंत पूजा हुई। शाम को छह बजे भजन संध्या में आलोक नादान के संगीत पर बाबा के भक्त झूम उठे। मध्यरात्रि में सवा लाख बत्तियों से बाबा की महाआरती की गई। बाबा के दरबार को कामिनी की पत्तियों व फूलों से सजाया गया था। मंदिर परिसर रंग-बिरंगी रौशनी से जगमग रहा। मंदिर के पूर्व महंत स्व. प्रदीपनाथ उपाध्याय को मंदिर प्रांगण में श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान मनीष उपाध्याय, पुनीत उपाध्याय मौजूद रहे।
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