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रंगभरी एकादशीः बाबा विश्वनाथ के गौने के लिए काशी तैयार, ये रहा कार्यक्रम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,वाराणसी
Updated Sun, 25 Feb 2018 02:54 PM IST
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दोपहर बारह बजे से आरंभ होगा पालकी दर्शन
- फोटो : अमर उजाला
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काशीपुराधिपति की नगरी काशी रंगभरी एकादशी के लिए तैयार है। रंगभरी एकादशी जिसका काशी में खासा महत्व है और हो भी क्यों नहीं इस दिन बाबा विश्वनाथ अपने ससुराल माता पार्वती की विदाई जो करने जाते हैं।
अबीर-गुलाल के धमाल के बीच जब निकलेगी गौने की बारात तब समूची काशी शिवमय हो उठेगी। अबीर-गुलाल, ढोल-नगाड़े ,डमरू की थाप और शंखनाद से पूरा रेडजोन परिसर गूंज उठता है।
विश्वनाथ मंदिर परिसर की गलियां पूरी तरह से अबीर-गुलाल से पट जाती हैं। रंगभरी एकादशी पर बाबा विश्वनाथ के गौने के दौरान शिवांजलि प्रस्तुत की जाएगी। चल रजत प्रतिमाओं की पालकी यात्रा से पूर्व सांस्कृतिक कार्यक्रम में भरत शर्मा के साथ स्थानीय कलाकार स्वरांजलि अर्पित करेंगे।
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गायन, वादन और नृत्य व बाबा के अभिषेक, शृंगार के साथ ही पूरे रेड जोन में गुलाल उड़ेगा। सोमवार की शाम को बाबा की पालकी यात्रा डमरू, शंख और ढोल के नाद के साथ महंत आवास से बाबा के गर्भगृह के लिए निकलेगी।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मंहत डॉ. कुलपति तिवारी ने बताया कि बाबा के गौना के पूर्व सोमवार को मंहत आवास पर सुबह ब्रह्म मूहूर्त में बाबा के साथ माता गौरा की चल प्रतिमा का पंचगव्य तथा पंचामृत स्नान करा दुग्धाभिषेक किया जायगा।
सुबह पांच से आठ बजे तक 11 वैदिक ब्राह्मणों द्वारा विशेष षोडशोपचार पूजन के बाद फलाहार का भोग लगाकर महाआरती की जाएगी। दस बजे चल प्रतिमाओं का राजसी शृंगार व 12 बजे भोग आरती के बाद के पालकी का दर्शन आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा।
शाम पांच बजे बाबा की पालकी की शोभायात्रा निकाली जाएगी जो मंहत आवास से मंदिर तक जाएगी। मंदिर के गर्भगृह में चल प्रतिमाओं को स्थापित कर बाबा को अबीर-गुलाल चढ़ाकर आरती संपन्न होगी।
अबीर-गुलाल के धमाल के बीच जब निकलेगी गौने की बारात तब समूची काशी शिवमय हो उठेगी। अबीर-गुलाल, ढोल-नगाड़े ,डमरू की थाप और शंखनाद से पूरा रेडजोन परिसर गूंज उठता है।
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विश्वनाथ मंदिर परिसर की गलियां पूरी तरह से अबीर-गुलाल से पट जाती हैं। रंगभरी एकादशी पर बाबा विश्वनाथ के गौने के दौरान शिवांजलि प्रस्तुत की जाएगी। चल रजत प्रतिमाओं की पालकी यात्रा से पूर्व सांस्कृतिक कार्यक्रम में भरत शर्मा के साथ स्थानीय कलाकार स्वरांजलि अर्पित करेंगे।
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गायन, वादन और नृत्य व बाबा के अभिषेक, शृंगार के साथ ही पूरे रेड जोन में गुलाल उड़ेगा। सोमवार की शाम को बाबा की पालकी यात्रा डमरू, शंख और ढोल के नाद के साथ महंत आवास से बाबा के गर्भगृह के लिए निकलेगी।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मंहत डॉ. कुलपति तिवारी ने बताया कि बाबा के गौना के पूर्व सोमवार को मंहत आवास पर सुबह ब्रह्म मूहूर्त में बाबा के साथ माता गौरा की चल प्रतिमा का पंचगव्य तथा पंचामृत स्नान करा दुग्धाभिषेक किया जायगा।
सुबह पांच से आठ बजे तक 11 वैदिक ब्राह्मणों द्वारा विशेष षोडशोपचार पूजन के बाद फलाहार का भोग लगाकर महाआरती की जाएगी। दस बजे चल प्रतिमाओं का राजसी शृंगार व 12 बजे भोग आरती के बाद के पालकी का दर्शन आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा।
शाम पांच बजे बाबा की पालकी की शोभायात्रा निकाली जाएगी जो मंहत आवास से मंदिर तक जाएगी। मंदिर के गर्भगृह में चल प्रतिमाओं को स्थापित कर बाबा को अबीर-गुलाल चढ़ाकर आरती संपन्न होगी।
फेसबुक पर दिखेगी रंगभरी एकादशी
रंगभरी एकादशी
- फोटो : अमर उजाला
मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह की पहल पर रंगभरी एकादशी को विश्व में कहीं से भी देखने की व्यवस्था की गई है। फेसबुक पेज बदलता बनारस के माध्यम से रंगभरी एकादशी पर बनाई गई डाक्यूमेंट्री फिल्म को इस पर अपलोड किया गया है। इस पेज के माध्यम से लोगा बाबा विश्वनाथ से जुड़े पर्व और त्योहार को देख सकेंगे।
मंदिर प्रशासन की ओर से भी रंगभरी एकादशी पर शिवार्चना का आयोजन किया जा रहा है। शनिवार को रत्नेश वर्मा, आलोक दीप ने बताया कि कार्यक्रम में डॉ. सुप्रिया शाह का सितार, डॉ. राजेश्वर आचार्य, देवाशीष डे का गायन, विधि नागर, सौरव गौरव मिश्रा का कथक, ताल वाद्य कचहरी विजय जायसवाल और उनके समूह द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा। कार्यक्रम का संचालन अंकिता खत्री व प्रीतेश आचार्य करेंगे।
भस्म की होली का होगा मंचन
रंगभरी एकादशी पर महंत आवास पर दोपहर 12 बजे से होने वाले शिवांजली कार्यक्रम में विख्यात भजन सम्राट भरत शर्मा के साथ स्थानीय कलाकार अपनी स्वरांजलि अर्पित करेंगे। महेन्द्र प्रसन्ना के शहनाई वादन से कार्यक्रम की शुरुआत होगी। विजय वाल्मीकि की नृत्य नाटिका होगी जिसमें वो भस्म की होली खेलने का मंचन करेंगे जो इस बार कुछ खास और अलग आकर्षण का केंद्र होगा।
उसके बाद अमित त्रिवेदी, अम्बा मिश्र अतुल अपना कार्यक्त्रस्म जोगी रे प्रस्तुत करेंगे। सिद्धार्थ बनर्जी सिद्धवीणा और तबले पर संदीप राव केवले युगलबंदी प्रस्तुत करेंगे। उसके बाद पूर्वांचल के जाने-माने कलाकार भजन गायक भरत शर्मा अपने भजनों से भक्तों को रिझाएंगे।
इसके अलावा डॉ. अमलेश शुक्ल, स्नेहा अवस्थी, ममता शर्मा, सहित कई कलाकार अपनी हाजिरी लगाएंगे।