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काशी में नहीं बदला गंगा का व्यवहार, घाट व धाराएं सुरक्षित

Fri, 16 Oct 2015 02:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Fri, 16 Oct 2015 02:10 AM IST
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 Kashi has not changed in the behavior of the river, ferries and streams protected
काशी के गंगा घाटों में सात जगहों पर हुई कटान का असर तटीय शहर पर नहीं पड़ा है। गंगा का प्रवाह सिद्धांत और अपेक्षा के अनुरूप पाया गया है। रामनगर से राजघाट के बीच धारा मुड़ने या घाटों की तरफ दबाव बढ़ने के भी लक्षण नहीं मिले हैं। इसलिए इस कटान से बनारस को किसी भी तरह के नुकसान की चिंता छोड़ देनी चाहिए। यह रिपोर्ट केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनरुद्धार मंत्रालय की ओर से गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग के चेयरमैन जीएस झा के नेतृत्व में गठित आठ सदस्यीय विशेषज्ञ टीम ने दी है। नदी विशेषज्ञों के आकलन से उपजी चिंता के आधार पर जिला प्रशासन ने गंगा के बाएं किनारे पर कटान से हो रहे नुकसान की जांच कराने के लिए पत्र भेजा था।
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गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग के चेयरमैन के नेतृत्व में विशेषज्ञों ने सामने घाट से राजघाट तक गंगा घाटों पर हो रही कटान और अन्य नुकसानों की परीक्षण किया। टीम ने गंगा के वेग, बहाव और बाएं किनारे पर जल दबाव के अलावा उस पार बालू क्षेत्र के लगातार हो रहे विस्तार को केंद्र में रखकर परीक्षण किया। जांच में टीम को घाटों के बाएं किनारे पर कहीं भी बड़े नुकसान के लक्षण नहीं मिले। रिपोर्ट में कहा गया है कि घाटों में कटान स्थानीय समस्या के कारण हुई है। इसकी मरम्मत कराई जानी चाहिए। नदी का व्यवहार अपेक्षा के अनुरूप पाया गया। नदी में भविष्य में किसी तरह के बदलाव के भी लक्षण नहीं हैं। अलबत्ता विशेषज्ञों ने काशी के घाटों को लेकर अभी और अध्ययन और शोध करने की जरूरत पर बल दिया है, ताकि तटीय शहर और कछुआ सेंचुरी को लेकर और भी गहराई से परीक्षण किया जा सके।
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इस टीम में गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग के सदस्य अरुण कुमार सिन्हा, सेंटर फार फ्लड मैनेजमेंट स्टडीज (नर्मदा बेसिन) के वैज्ञानिक पंकज मणि, रीवर हाइड्रोलिक डिवीजन सेंट्रल वाटर एंड पावर रिसर्च स्टेशन पुणे के वैज्ञानिक डॉ. आरजी पाटिल, सीडब्ल्यूसी हाइड्रोलिक (नार्थ) के निदेशक रघुराम राजन, प्रो. यूके चौधरी और सिंचाई विभाग के चीफ इंजीनियर ओपी श्रीवास्तव शामिल थे।
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