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स्वर्ण पालकी के दर्शन के साथ काशी से विदा हुए रविदासी
ब्यूरो, वाराणसी अमर उजाला
Updated Wed, 24 Feb 2016 01:44 AM IST
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संत रविदास के जन्मस्थान तीर्थ सीर गोवर्धन में जयंती उत्सव मनाने के बाद विश्व भर से आए अनुयायी मंगलवार को विदा होने लगे।
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मेला क्षेत्र के शिविरों में आखिरी दिन भजनों की धुन पर जगह-जगह भक्त झूमते-नाचते नजर आए। रविदास शक्ति अमर रहे... जो बोले सो निरपै...जैसे जयकारे गूंज रहे थे।
डेरा सच्च खंड बल्लां के संत निरंजन दास महाराज ने मंदिर में रविदासिया समाज के लोगों को एकजुटता का संदेश दिया। कहा कि हमको अपनी ताकत बढ़ाने पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
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स्वर्ण पालकी के दर्शन के बाद अनुयायियों के साथ वह भी बेगमपुरा एक्सप्रेस से जालंधर के लिए रवाना हो गए।
सीर गोवर्धन में गुरु रविदास के जयंती महोत्सव में शामिल होने विश्व भर से पहुंचे अनुयायी मंगलवार को टेंट, तंबुओं से सामान समेटने लगे।
देर रात तक ट्रेनों, बसों, ट्रकों और अन्य निजी वाहनों से भक्त अपने घरों के लिए रवाना होने लगे। दोपहर बाद रविदास मंदिर में डेरा सच्च खंड बल्लां के गद्दीनशीन संत और जन्मस्थान पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट के चेयरमैन निरंजन दास महाराज ने भक्तों को एकजुटता और प्रेम का संदेश दिया।
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उन्होंने कहा कि गुरु रविदास ने अछूत समझे जाने वाले सबसे बड़े वर्ग को जीने का रास्ता दिखाया। उन्होंने छूआछूत मिटाने के साथ ही मानव को बराबरी और आपसी समरसता के साथ जीने का संदेश दिया।
उनके पदचिह्नों पर चलकर हमें अपनी ताकत बढ़ानी चाहिए। इसके बाद संत ने स्वर्ण पालकी का दर्शन किया। शाम को वाहनों के काफिले के साथ पुजारी मंदीप दास, ट्रस्ट के जनरल सेक्रेटरी सत्यपाल बिरदी, केएल सरोवा, निरंजन दास चीमा समेत तमाम लोगों ने कैंट रेलवे स्टेशन पर उन्हें विदा किया।
अनुयायियों के साथ संत निरंजन दास बेगमपुरा एक्सप्रेस से जालंधर रवाना हुए। इसी के साथ सीर गोवर्धन में लगे शिविर खोले जाने लगे हैं।