कबीर प्राकट्य महोत्सवः हर तरफ नजर आया भावों का संगम, धूल को सिर माथे लगाकर धन्य हुए भक्त
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सुबह से शुरू हुआ आरती-पूजन और भजन-प्रवचन का सिलसिला देर शाम तक चला। कबीरवाणी के सस्वर पाठ की गूंज के बीच इलाके में मेले सी रौनक नजर आई। देश के विभिन्न प्रांतों के अलावा पाकिस्तान, वेस्टइंडीज और हालैंड सहित कई अन्य देशों से कबीर पंथी यहां पहुंचे हैं।
सपरिवार आए अनुयायियों ने भजनों-प्रवचनों का रसपान करने के साथ ही जन्मस्थली पर मत्था टेका। भजनों से कबीर साहेब की महिमा का गुणगान किया। कबीरवाणी की मिठास के साथ उनके संदेशों की गूंज हर पल सुनाई दे रही थी। आयोजन में बच्चों, महिलाओं के साथ ही बुजुर्ग और युवा सभी नजर आए।
कबीर साहेब के भजनों की सुमधुर प्रस्तुतियों पर श्रद्धालु मगन होकर झूमते-नाचते रहे। भजन-प्रवचन के बाद भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। धर्माधिकारी सुधाकर साहब ने बताया कि बुधवार को समारोह के अंतिम दिन सुबह नौ बजे शोभायात्रा निकली। दोपहर आशीर्वचन कार्यक्रम होगा।
विदेशों से पहुंचे श्रद्घालु
उन्होंने बताया कि देश के बंटवारे के पहले से ही हम लोगों के दादा जी कराची में बस गए थे, तब से हम लोग वहीं रह रहे हैं। वेस्टइंडीज से आए सुरेश और अंकित दास ने बताया कि हम लोग नौंवी बार काशी आए हैं।
हम दोनों हिंदी नहीं समझ पाते हैं, लेकिन कबीर के भजन और प्रवचन याद हैं। हम पिछले कई पीढ़ियों से संत कबीर को मान रहे हैं। ऐसे में जब समय मिलता है तो काशी दर्शन करने के लिए आते हैं।
प्रवचन में हुजूर अर्द्धनाम साहेब ने कहा कि सद्गुरु कबीर साहेब ने देश-दुनिया को सत्य लोक की राह दिखाई। सद्गुरु साहेब के संदेशों को आत्मसात कर यह लोक और परलोक दोनों सुधारा जा सकता है।
सद्गुरु साहेब के बताए भक्ति के साधनों का प्रयोग करके आप सत्य लोक के निवासी बन सकते हैं। मनुष्य का जीवन मिलना कठिन है, दुर्लभ है, लेकिन उससे भी अधिक दुर्लभ है सच्चे सद्गुरु का मिलना।