मगहर में पीएम की सभा पर कबीरपंथ के प्रमुख ने उठाए सवाल, कहा- परंपरा ना तोड़ें
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निर्वाण स्थली (मगहर) पर जयंती समारोह का आयोजन करके संत कबीर की परंपरा को खंडित करने और समाज को बांटने का काम किया जा रहा है। सौ वर्षों से संत कबीर की जन्मस्थली पर ही जयंती समारोह मनाने की परंपरा चली आ रही है।
इसमें अपने हितों के हिसाब से बदलाव गलत है। कबीर चौरा मठ में पत्रकारों से बातचीत में महंत ने 28 जून को संत कबीर के प्राकट्य उत्सव पर पीएम मोदी के मगहर दौरे पर कई सवाल उठाए। महंत ने कहा कि पीएम मोदी को भ्रमित किया जा रहा है।
पीएम को यह जानना चाहिए कि मगहर में कबीर दास ने अपने जीवन के अंतिम दिनों को बिताया था। आरोप लगाया कि पीएम मोदी को वहां के स्थानीय सांसद बहका रहे हैं क्योंकि वह कबीर मठ की जमीनों को कब्जा करने में लगे हुए हैं।
वह कबीर के नाम पर लाखों रुपये की हेराफेरी कर चुके हैं और अब पीएम मोदी को भ्रमित कर वहां बुला रहे हैं।
कबीर जयंती के बहाने पूर्वी उत्तर प्रदेश पर है निशाना
बता दें कि महंत विवेक दास ही वाराणसी के लहरतारा स्थित कबीर प्राकट्य स्थली, कबीरचौरा स्थित मूलगादी और संत कबीरनगर जिले में स्थित परिनिर्वाण स्थली मगहर, तीनों जगहों के गद्दी महंत हैं।
संत विवेक दास इस बात से भी नाराज है कि महंत होने के बावजूद प्रधानमंत्री की मौजूदगी में होने वाले इतने बड़े कार्यक्रम में उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया। जिससे कबीरपंथियों में भ्रम है।
विवेकदास ने इसे गलत परंपरा करार देते हुए कहा है कि इससे कबीर के विचार को बांटने की कोशिश को बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि लोग वहां एकत्र होंगे और पीएम मोदी का विरोध कर सकते हैं।
बता दें कि कबीर दास के 620वें प्राकट्य उत्सव के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संत कबीर नगर स्थित मगहर मठ पहुंचेंगे। इस दौरान उनकी रैली भी होगी। प्रदेश सरकार इस रैली को ऐतिहासिक बनाने में जुटी है। दरअसल, इस रैली के जरिए मिशन 2019 का पूर्वी उत्तर प्रदेश में आगाज भी माना जा रहा है।