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काशी ने देखा एलिजाबेथ से शिंजो तक का सफर
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 14 Dec 2015 02:20 AM IST
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काशी ने इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय से लेकर जापानी प्रधानमंत्री श्ंिाजो अबे तक का सफर देखा। दक्षिण अफ्रिका के पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला समेत कई अन्य देशों के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री यहां आए। गंगा घाट, बीएचयू से सारनाथ तक उनके दौरे हुए।
इससे वैश्विक स्तर पर बनारस की साख मजबूत हुई और मान भी बढ़ा लेकिन विकास की आस अधूरी ही रही। अब पीएम मोदी के साथ जापानी पीएम श्ंिाजो अबे की यात्रा से विकास की नई संभावनाएं जगी हैं। लोगों को उम्मीद है कि काशी के विकास को निश्चित रूप से गति मिलेगी।
इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ (द्वितीय) 1961 में दिल्ली आई थीं। भारत यात्रा के दौरान वह वाराणसी, अहमदाबाद, जयपुर, उदयपुर, कोलकाता, मुंबई, बंगलूरू, और चेन्नई गई थीं। उस समय वह तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू के साथ वाराणसी आई थीं।
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रामनगर का किला घूमने के बाद उन्होंने पं. नेहरू और महाराजा बनारस के साथ बजरे पर गंगा की सैर भी की थी। काशी में उन्होंने फोटोग्राफी भी कराई थी। पीएम नरेंद्र मोदी पिछले दिनों ब्रिटेन यात्रा के दौरान जब एलिजाबेथ से मिले तो उन्होंने उनके वाराणसी दौरे का जिक्र किया था।
बकिंघम पैलेस में मोदी के लिए महारानी के साथ लंच का आयोजन किया गया था। पीएम मोदी ने महारानी को उनकी 54 साल पुरानी कुछ तस्वीरें तोहफे में दीं। इसमें बनारसी शॉल भी शामिल थी। 1990 में दक्षिण अफ्रिक ा के तत्कालीन राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला वाराणसी आए थे।
उस समय मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। मंडेला ने अपनी भारत यात्रा के दौरान लखनऊ और काशी घूमने की इच्छा जाहिर की थी। मुलायम सिंह यादव मंडेला को इन दोनों शहरों की यात्रा पर ले गए थे। नेल्सन मंडेला वाराणसी और लखनऊ की खूबसूरती और इन शहरों की सदियों पुरानी तहजीब से काफ ी प्रभावित हुए थे।
वाराणसी में उन्होंने मुलायम सिंह यादव के साथ गंगा में नाव से भ्रमण का लुत्फ भी उठाया था। वह बीएचयू भी गए थे। अमेरिका के ऊर्जा मंत्री बिल रिचर्डसन सन 2000 में वाराणसी आए थे। तुलसीघाट पर संकटमोचन मंदिर के दिवंगत महंत प्रो. वीरभद्र मिश्र से मिलने के बाद गंगा की सैर के साथ शहर का भ्रमण किया था।
पिछले साल नेपाल के तत्कालीन राष्ट्रपति रामबरन यादव ने भी काशी का दौरा किया था। इसके अलावा करीब दस साल पूर्व श्रीलंका के तत्कालीन राष्ट्रपति महिंद्रा राजपक्षे, मारीशस के राष्ट्रपति नवीनचंद राम गुलाम, फिजी के राष्ट्रपति ने भी काशी का दौरा किया था।
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इससे वैश्विक स्तर पर बनारस की साख मजबूत हुई और मान भी बढ़ा लेकिन विकास की आस अधूरी ही रही। अब पीएम मोदी के साथ जापानी पीएम श्ंिाजो अबे की यात्रा से विकास की नई संभावनाएं जगी हैं। लोगों को उम्मीद है कि काशी के विकास को निश्चित रूप से गति मिलेगी।
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इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ (द्वितीय) 1961 में दिल्ली आई थीं। भारत यात्रा के दौरान वह वाराणसी, अहमदाबाद, जयपुर, उदयपुर, कोलकाता, मुंबई, बंगलूरू, और चेन्नई गई थीं। उस समय वह तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू के साथ वाराणसी आई थीं।
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रामनगर का किला घूमने के बाद उन्होंने पं. नेहरू और महाराजा बनारस के साथ बजरे पर गंगा की सैर भी की थी। काशी में उन्होंने फोटोग्राफी भी कराई थी। पीएम नरेंद्र मोदी पिछले दिनों ब्रिटेन यात्रा के दौरान जब एलिजाबेथ से मिले तो उन्होंने उनके वाराणसी दौरे का जिक्र किया था।
बकिंघम पैलेस में मोदी के लिए महारानी के साथ लंच का आयोजन किया गया था। पीएम मोदी ने महारानी को उनकी 54 साल पुरानी कुछ तस्वीरें तोहफे में दीं। इसमें बनारसी शॉल भी शामिल थी। 1990 में दक्षिण अफ्रिक ा के तत्कालीन राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला वाराणसी आए थे।
उस समय मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। मंडेला ने अपनी भारत यात्रा के दौरान लखनऊ और काशी घूमने की इच्छा जाहिर की थी। मुलायम सिंह यादव मंडेला को इन दोनों शहरों की यात्रा पर ले गए थे। नेल्सन मंडेला वाराणसी और लखनऊ की खूबसूरती और इन शहरों की सदियों पुरानी तहजीब से काफ ी प्रभावित हुए थे।
वाराणसी में उन्होंने मुलायम सिंह यादव के साथ गंगा में नाव से भ्रमण का लुत्फ भी उठाया था। वह बीएचयू भी गए थे। अमेरिका के ऊर्जा मंत्री बिल रिचर्डसन सन 2000 में वाराणसी आए थे। तुलसीघाट पर संकटमोचन मंदिर के दिवंगत महंत प्रो. वीरभद्र मिश्र से मिलने के बाद गंगा की सैर के साथ शहर का भ्रमण किया था।
पिछले साल नेपाल के तत्कालीन राष्ट्रपति रामबरन यादव ने भी काशी का दौरा किया था। इसके अलावा करीब दस साल पूर्व श्रीलंका के तत्कालीन राष्ट्रपति महिंद्रा राजपक्षे, मारीशस के राष्ट्रपति नवीनचंद राम गुलाम, फिजी के राष्ट्रपति ने भी काशी का दौरा किया था।