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जेएनयू में कम आवेदन शुभ संकेतःआदित्यनाथ
ब्यूरो/अमर उजाला वाराणसी
Updated Fri, 01 Apr 2016 01:52 AM IST
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भाजपा के फायर ब्रांड नेता महंत आदित्यनाथ ने जेएनयू में इस बार प्रवेश के लिए आवेदनों की घटी संख्या को शुभ संकेत बताया है। कहा कि इससे लगता है कि भारत का नौजवान राष्ट्रीयता के प्रति जागरूक है। भारत की मूल परंपरा को नकारने का प्रयास करने वालों की यही दुर्दशा होगी। बिहार के कैमूर में आयोजित एक ब्रह्मभोज में शामिल होने जा रहे आदित्यनाथ ने बाबतपुर एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत में ये बातें कहीं।
जेएनयू प्रकरण पर बोलते हुए आदित्यनाथ ने कहा कि लोग जेएनयू को एक प्रतिष्ठित प्रगतिशील शैक्षणिक संस्थान मानते थे, जो एक भ्रम था। प्रगतिशीलता अश्लीलता, नग्नता नहीं हो सकती है और देशद्रोह भी नहीं। प्रगतिशीलता का मतलब नई तकनीक से है, अथवा उन विचारों, मूल्यों, आदर्शों से जिससे समाज और लोक का कल्याण हो।
उत्तराखंड के राजनीतिक हालात पर बोलते हुए आदित्यनाथ ने कहा कि कोई भी सरकार अगर सदन में अविश्वास प्रस्ताव पेश नहीं कर पाती या विधेयक पास नहीं करा पाती तो उसे गिरा हुआ माना जाता है। सदन में स्पीकर द्वारा वहां पर जिस ध्वनि मत से विवरण पास किया गया, वह सीधे-सीधे संवैधानिक प्राविधानों का उल्लंघन और संसदीय मर्यादाओं का दुरुपयोग है। इसलिए वहां पर राष्ट्रपति शासन लगाया गया। जब सरकार संवैधानिक प्रावधानों की धज्जियां उड़ाने लगे तो यही एक विकल्प है।
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जेएनयू प्रकरण पर बोलते हुए आदित्यनाथ ने कहा कि लोग जेएनयू को एक प्रतिष्ठित प्रगतिशील शैक्षणिक संस्थान मानते थे, जो एक भ्रम था। प्रगतिशीलता अश्लीलता, नग्नता नहीं हो सकती है और देशद्रोह भी नहीं। प्रगतिशीलता का मतलब नई तकनीक से है, अथवा उन विचारों, मूल्यों, आदर्शों से जिससे समाज और लोक का कल्याण हो।
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उत्तराखंड के राजनीतिक हालात पर बोलते हुए आदित्यनाथ ने कहा कि कोई भी सरकार अगर सदन में अविश्वास प्रस्ताव पेश नहीं कर पाती या विधेयक पास नहीं करा पाती तो उसे गिरा हुआ माना जाता है। सदन में स्पीकर द्वारा वहां पर जिस ध्वनि मत से विवरण पास किया गया, वह सीधे-सीधे संवैधानिक प्राविधानों का उल्लंघन और संसदीय मर्यादाओं का दुरुपयोग है। इसलिए वहां पर राष्ट्रपति शासन लगाया गया। जब सरकार संवैधानिक प्रावधानों की धज्जियां उड़ाने लगे तो यही एक विकल्प है।
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