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Jitiya Vrat 2023: इस साल जितिया व्रत कब? काशी के विद्वानों ने दूर किया तिथि भेद का संशय, जानें पूजा विधि

Thu, 28 Sep 2023 07:01 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Thu, 28 Sep 2023 07:01 PM IST
सार

जीवित्पुत्रिका या जितिया व्रत पर तिथि भेद के संशय का काशी के पंचांगकारों ने समाधान कर दिया है। काशी के पंचांगकारों के अनुसार छह अक्तूबर को ही जीवित्पुत्रिका का व्रत और अनुष्ठान संपन्न होगा। 

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Jivitputrika Vrat 2023 Jitiya Date Scholars of Kashi removed doubt of date difference know puja vidhi
जीवित्पुत्रिका या जितिया व्रत 2023 - फोटो : iStock

विस्तार

संतान के लिए आयु, आरोग्य, लाभ तथा सर्वविध कल्याण के लिए जीवित्पुत्रिका या जितिया व्रत पर तिथि भेद के संशय का काशी के पंचांगकारों ने समाधान कर दिया है। काशी के पंचांगकारों के अनुसार छह अक्तूबर को ही जीवित्पुत्रिका का व्रत और अनुष्ठान संपन्न होगा। विश्व पंचांग को छोड़कर काशी के सभी पंचांगकार छह अक्तूबर को जीवित्पुत्रिका व्रत का विधान कर रहे हैं। महिलाएं संतान की दीर्घायु के लिए निराजल व्रत रहकर जीवित्पुत्रिका की पूजा करेंगी।

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श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास और ज्योतिष विज्ञान समिति के अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय ने बताया कि भविष्य पुराण और विष्णु धर्मोत्तर पुराण में कहा गया है कि पूर्वेद्युरपुरे द्युर्वा प्रदोषे यत्र चाष्टमी। तत्र पूज्या सदा स्त्रीभि: राजा जीमूत वाहन। तिथि पत्रिका में भी पद्माकर मिश्र ने भी इस कथन का पूर्ण समर्थन किया है। वस्तुत: उदयकालिक और प्रदोष कालिक अष्टमी का विभेद है।
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इसमें बंगाल, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश के विद्वान वर्षकृत्य के अनुसार प्रदोष व्यापिनी को स्वीकार किया है। काशी के पंचांगकारों ने बहुमत के आधार पर निर्णय दिया है कि छह अक्तूबर को जीवित्पुत्रिका का व्रत रखा जाएगा। महावीर पंचांग के संपादक डॉ. रामेश्वर नाथ ओझा, प्रो. चंद्रमौलि उपाध्याय और बीएचयू के प्रो. विनय कुमार पांडेय ने भी इस पर सहमति दी है।

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विश्वपंचांग में है सात अक्तूबर

बीएचयू से प्रकाशित विश्व पंचांग में जीवित्पुत्रिका का व्रत सात अक्तूबर को मान्य किया गया है। इसके लिए उन्होंने राजा मार्तंड के भृगु वचन का उल्लेख किया है।

ऐसे करें पूजन

Jivitputrika Vrat 2023 Jitiya Date Scholars of Kashi removed doubt of date difference know puja vidhi
जीवित्पुत्रिका पर्व पर पूजन करतीं महिलाएं। - फोटो : फाइल

गाय के गोबर से पूजा स्थल को लीप कर स्वच्छ कर दें। छोटा-सा तालाब भी जमीन खोदकर बना लें। तालाब के निकट एक पाकड़ की डाल लाकर खड़ा कर दें। शालिवाहन राजा के पुत्र धर्मात्मा जीमूतवाहन की कुशनिर्मित मूर्ति जल (या मिट्टी) के पात्र में स्थापित कर पीली और लाल रूई से अलंकृत करें तथा धूप, दीप, अक्षत, फूल माला एवं विविध प्रकार के नैवेद्यों से पूजन करें।

मिट्टी तथा गाय के गोबर से चिल्ली या चिल्होड़िन (मादा चील) और सियारिन की मूर्ति बनाकर उनके मस्तकों को लाल सिंदूर से भूषित कर दें। अपने वंश की वृद्धि और प्रगति के लिए उपवास कर बांस के पत्रों से पूजन करना चाहिए। इसेक बाद व्रत माहात्म्य की कथा का श्रवण करना चाहिए

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