JEE Exam 2020: बेहतर कल की आस में नापी सैकड़ों किमी की दूरी,बोले छात्र, बर्बाद हो जाता एक साल
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इंजीनियरिंग में दाखिले के लिए छह सितंबर तक होने वाले जेईई (जॉइंट एंट्रेंस एक्जाम) के दूसरे दिन बुधवार को अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी। बारिश के बाद भी वाराणसी, आसपास के जिलों के साथ ही सैकड़ों किमी की दूरी तय करके आने वाले कई अभ्यर्थी सुबह ही परीक्षा केंद्रों पर पहुंच गए। पंजीकृत 1541 में से करीब 70 से 80 प्रतिशत उपस्थिति रही।
जिले में सिगरा, हरहुआ, सारनाथ, आयर सहित अन्य जगहों पर बने 11 केंद्रों पर दो पाली में हुई परीक्षा के लिए केंद्रों पर सैनिटाइजेशन, थर्मल स्क्रीनिंग के बाद अभ्यर्थियों को अंदर प्रवेश मिला। अभ्यर्थियों के मुताबिक कुल मिलाकर पेपर सही रहा। पेपर में मैथ से जुड़े सवाल थोड़े कठिन थे, जिस वजह से माथापच्ची करनी पड़ी, लेकिन केमिस्ट्री के सवाल आसान रहे। वाराणसी और आसपास के जिलों से परीक्षा देने आए अभ्यर्थियों का कहना था कि परीक्षा को लेकर उनकी तैयारियां चल रही थीं। अगर परीक्षा नहीं होती तो उनका पूरा साल बर्बाद हो जाता। कोरोना काल में सोशल डिस्टेंसिंग और सैनिटाइजेशन का विशेष ख्याल रखा जा रहा है।
अपनों के लिए तय किया लंबा सफर
भभुआ से भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली वाराणसी के सारनाथ आकर जेईई की मुख्य परीक्षा में शामिल हुए। भभुआ बिहार के निवासी अंकुर ने अपने छोटे भाई शिवम को डेढ सौ किमी से अधिक की दूरी नापकर परीक्षा दिलाई। अंकुर बताते हैं कि कोरोना संक्रमण से अधिक महत्व अपना भविष्य है। कोरोना काल में अपना साधन ही यात्रा के लिए सबसे सुरक्षित साधन है। अंकुर अपने छोटे भाई शिवम को बाइक से मोहनिया, दुर्गावती, नौबतपुर, चंदौली, अलीनगर, मुग़लसराय, पड़ाव, राजघाट होते लंका आकर मंगलवार शाम को एक लाज में ठहरे। बुधवार की सुबह वह सारनाथ में बने परीक्षा केंद्र पर पहुंचे।
अंकुर का कहना है कि बसों का आवागमन जरूर है लेकिन बसों में सफाई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में संक्रमण की अधिक संभावना की वजह से बस का प्रयोग नहीं किया। इस कोरोना काल में बाइक ही सबसे सुरक्षित साधन है। आंबेडकर नगर के सत्य प्रकाश पांडेय अपने पुत्र हर्ष को बाइक से 160 किलोमीटर की दूरी तय कर परीक्षा दिलाने पहुंचे थे। उनका कहना है कि सभी प्रतियोगी परीक्षाएं हो लेकिन सावधानी और सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है।
परीक्षा को लेकर तैयारियां पहले से ही चल रही थी। बस यही इच्छा थी कि किसी तरह से साल ना बर्बाद हो। जैसे ही परीक्षा तिथि कराने का फैसला हुआ वैसे ही तैयारियां और तेज कर दी गई।
रोमेशा, मऊ
कोरोना संक्रमण के साथ ही कुछ इलाकों में बाढ़ के भी हालात हैं तो अभ्यर्थी बाहर नहीं निकल पाते। लेकिन परीक्षा की तैयारी भी जारी रही जिससे तिथि घोषित होने पर कोई परेशानी न हो।
अभिजीत राय, भोजूबीर
आवेदन करने के बाद से ही परीक्षा की तैयारी चल रही थी। जिस तरह से देश भर में इसको लेकर के विरोध हो रहा था ऐसा लग रहा था कि परीक्षा नही हो पाएगी और साल बर्बाद हो जाएगा।
अक्षय, मंडुवाडीह
फार्म भरने के बाद से ही तैयारी शुरू हो गई थी। विरोध से लगा कि इस साल परीक्षा नही दे पाएंगे। परीक्षा तिथि घोषित हुई तब बहुत खुशी हुई की साल बर्बाद नहीं होगा। मैथ के कुछ सवाल टफ रहे।
प्रतिभा, मऊ
मैथ के सवाल बस कठिन रहे। हमारी तैयारी पूरी हो गई थी। कोरोना महामारी की वजह से जो परीक्षा अप्रैल में होती है उसे टाल दिया गया था, जिससे तैयारी करने का समय मिल पाया।
आनंद कुमार, गाजीपुर
कोरोना वायरस का आड़ लेकर राजनीतिक पार्टियां परीक्षा न करवाने का विरोध कर अपनी राजनीति चमकाने में लगी है। परीक्षा होनी चाहिए और हुआ भी। कम से कम हमारा साल तो बच गया।
अविनाश, जौनपुर
परीक्षा को लेकर डर बना था, लेकिन जहां देर में होने से हमें तैयारी का पूरा समय मिला वही सेंटर पर कोरोना वायरस से बचाव के लिए पूरी तैयारियां थी। प्रवेश परीक्षा जरूर होनी चाहिए थी।
अभिषेक सिंह, रामनगर