वाराणसी: शहरी क्षेत्र में शामिल गांवों की सफाई व्यवस्था संभालेगी जायका
जायका सबसे पहले गांवों से निकलने वाले ठोस अपशिष्ट के निपटारे पर काम करेगी। अगले चरण में वह सीवरेज और मलजल अपशिष्ट का भी निस्तारण करेगी।
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जायका सबसे पहले गांवों से निकलने वाले ठोस अपशिष्ट के निपटारे पर काम करेगी। अगले चरण में वह सीवरेज और मलजल अपशिष्ट का भी निस्तारण करेगी। यहां प्रयोग सफल होने के बाद शहरी सीमा में शामिल 89 गांवों में जायका सफाई का जिम्मा उठाएगी।
नगर निगम की योजनाएं कई गांवों तक नहीं पहुंच पाई
दरअसल, शहरी सीमा में शामिल किए 89 गांवों में अब तक नगर निगम की योजनाएं और परियोजनाएं नहीं पहुंच पाई हैं। संसाधन और प्रबंधन के अभाव के चलते इन गांवों की स्थिति बदतर ही है। कारण पंचायत व्यवस्था से बाहर होने के बाद यहां साफ सफाई, सीवर सहित अन्य सुविधाओं की लोग बांट जोह रहे हैं।
ऐसे में प्रशासनिक अधिकारियों की पहल पर जायका ने इन गांवों की सफाई व्यवस्था का जिम्मा उठाने की सहमति दी है। फिलहाल 15 अप्रैल तक एजेंसी कंचनपुर गांव की निगरानी करेगी और वहां सर्वे के माध्यम से यह पड़ताल करेगी कि निकलने वाले ठोस अपशिष्ट का निस्तारण वर्तमान में कैसे किया जा रहा है।
मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने बताया कि जायका प्रबंधन के साथ बैठक में यह निर्णय लिया गया है। कंचनपुर में प्रयोग सफल रहा तो शहरी सीमा में शामिल सभी गांवों में यह एजेंसी काम करेगी।
सारनाथ परियोजना में अब केवल एएसआई की बाधा
सारनाथ के समग्र विकास के लिए लागू प्रो पुअर योजना में मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल की सख्ती के बाद नगर निगम, जल निगम, लोक निर्माण विभाग ने अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया है। हालांकि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण इकाई (एएसआई) की ओर से एनओसी नहीं जारी की गई है। हालांकि स्थानीय एजेंसियों की एनओसी के बाद एएसआई के संरक्षण से अलग इलाकों में काम शुरू कराने के निर्देश दे दिए गए हैं। उधर, एएसआई से अनापत्ति प्राप्त करने के लिए वीडीए अधिकारियों ने पत्राचार शुरू किया है।