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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Janmashtami Kanha offerings are protected not only from evil eyes but also from shadow of person

Janmashtami 2025: कान्हा के भोग को नजर से ही नहीं व्यक्ति की छाया से भी बचाते हैं, ब्रह्मचर्य का होता है पालन

Wed, 13 Aug 2025 05:18 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Wed, 13 Aug 2025 05:18 PM IST
सार

Varanasi News: लड्डू गोपाल का प्रसाद बनाने के दाैरान कई नियमों का पालन भी किया जाता है। इसमें ब्रह्मचर्य का पालन भी किया जाता है। प्रभु के भोग शृंगार के बाद ही भक्तों को दर्शन कराया जाता है। 

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Janmashtami Kanha offerings are protected not only from evil eyes but also from shadow of person
Janmashtami Special - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Janmashtami 2025: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण के शृंगार और भोग सामग्री की तैयारी रक्षाबंधन से ही शुरू हो जाती है। प्रसाद बंद कमरे में बनता है, ताकि भोग पर किसी व्यक्ति की दृष्टि न पड़े। यहां तक की किसी की छाया भी उस पर नहीं पड़नी चाहिए। ब्रह्मचर्य का पालन करने वाला ही भोग सामग्री छू सकता है। प्रभु के भोग शृंगार के बाद ही भक्त दर्शन कर सकते हैं। गोपाल मंदिर में 56 भोग लगता है।

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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 16 अगस्त को है। कृष्ण मंदिरों में भोग प्रसाद बनाने के लिए कई दशक से कारीगर बाहर से आ रहे हैं। पुष्टि मार्गीय गोपाल मंदिर में पूजा से लेकर भोग प्रसाद के अलग-अलग नियम हैं। 
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मंदिर के प्रमुख वैष्णव सेवी अशोक बल्लभदास ने बताया कि प्रभु को भोग लगाने के पहले भोग की सामग्री को हर किसी की दृष्टि और छाया से बचाया जाता है। वो इसलिए कि कहीं उनके मन में प्रभु के भोग को खाने का भाव न जग जाए। प्रभु के भोग शृंगार के बाद ही भक्तों को दर्शन कराया जाता है।

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नियमों का किया जाता है पालन

वैष्णवजन के घरों में भी इसी नियम का पालन होता है। इस्काॅन मंदिर के मनीष प्रभुदास ने बताया कि जन्माष्टमी के चार दिन पहले से ही प्रसाद बनने लगता है। वृंदावन से ट्रेनिंग लेने वाले कारीगर ही प्रसाद तैयार करते हैं। उनको वहां सात्विक प्रसाद बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। हरे कृष्ण हरे राम संकीर्तन सोसाइटी के अध्यक्ष कृष्ण प्रसाद दास ने बताया कि एक सप्ताह पहले से ही पेड़े और लड्डू बन रहे हैं।

60 क्विंटल बनेगा लड्डू, पेड़ा और हलवा: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर शहर में 60 क्विंटल से अधिक लड्डू, पेड़ा और हलवा बनेगा। इनमें गोपाल मंदिर, इस्काॅन मंदिर और संकीर्तन सोसाइटी की ओर से 30 क्विंटल से ज्यादा तैयार होता है। गोपाल मंदिर में एक हजार से अधिक भक्तों को प्रसाद दिया जाता है। 

भोग बनाने के ये नियम 
गोपाल मंदिर के तीसरी मंजिल के बंद कमरे में प्रसाद बनता है। कारीगर स्नान और भोजन करके प्रसाद बनाना शुरू करते हैं। इस दौरान वो किसी सगे संबंधी से नहीं मिल सकते। उस कमरे में कारीगरों के अलावा कोई प्रवेश नहीं कर सकता है। अगर एक बार बाहन निकले तो दोबारा कमरे में जाने से पहले स्नान करना होता है। इस्काॅन मंदिर में प्रसाद को छूने के लिए इस्काॅन के नियमों का पालन करना पड़ता है। नशा, जुआ और शेयर मार्केट से दूर रहने और मांस-मदिरा के अलावा लहसुन-प्याज तक का सेवन न करने वाला ही प्रसाद छू सकता है। 

असम, ओडिशा, बंगलूरू और वृंदावन से आते हैं कारीगर
काशी में प्रसाद बनाने के लिए वृंदावन के अलावा अन्य राज्यों से भी कारीगर आते हैं। गोपाल मंदिर में बनारस के अलावा प्रयागराज और लखनऊ के कुल 20 कारीगर हैं। यह कारीगर औदीच्य ब्राह्मण ही होते हैं। वही भोग बना सकते हैं। इस्काॅन मंदिर में असम, ओडिशा, बंगलूरू और वृंदावन के  कारीगर प्रसाद बना रहे हैं।

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