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दशलक्षण महापर्व के नौवें दिन विश्व कल्याण की हुई कामना
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संपूर्ण विश्व के प्राणियों के जीवन को एक नई दिशा के कामना के साथ ही दिगंबर जैन समाज के महापर्व के नौवें दिन की रस्में निभाई गईं। श्री दिगंबर जैन समाज काशी के तत्वावधान में सोमवार को जैन मंदिरों में चौबीसों तीर्थंकरों का प्रक्षालन एवं पूजन किया गया। महापर्व के नौवें दिन जैन मंदिरों में रत्नत्रय स्थापना, नंदीश्वर दीप पूजन व दशलक्षण पूजन, सोलह कारण व्रत पूजन एवं स्वयंभू स्त्रोत पूजन आरंभ हुआ।
सोमवार की शाम को फेसबुक लाइव में व्याख्यान देते हुए पं. सिद्धांत शास्त्री सांगानेर ने उत्तम अकिंचन धर्म पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि भौतिकता में नहीं भगवंता में जियो यही अकिंचन धर्म है। यह आत्मा संकल्प, विकल्प रूप कर्तव्य भावों से संसार सागर में डूबती रहती है। परिग्रह का परित्याग कर परिणामों को आत्मकेंद्रित करना ही अकिंचन धर्म की भावधारा है।
उन्होंने कहा कि आत्मा के अपने गुणों के सिवाय जगत में अपनी अन्य कोई भी वस्तु नहीं है। इस दृष्टि से आत्मा अकिंचन है। अध्यात्म की साधना का चरम रूप मेरा कुछ भी नहीं हैं ये अनुभूति ही जीवन का यथार्थ है। सर्वश्रेष्ठ धर्म मानवता है। हमारे जीवन का मूल ध्येय धन अर्जन करना ही नहीं अपितु धर्म के आधार पर सुख-समृद्धि लाना भी है। धर्म जीवन का परम आधार है, जो स्व के अनुशासन को संचालित करती है। भक्तों ने घर बैठे ही सभी आयोजनों को लाइव देखा। शाम को जिनवाणी, शास्त्र पूजन व तीर्थंकरों की आरती की गई।
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सोमवार की शाम को फेसबुक लाइव में व्याख्यान देते हुए पं. सिद्धांत शास्त्री सांगानेर ने उत्तम अकिंचन धर्म पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि भौतिकता में नहीं भगवंता में जियो यही अकिंचन धर्म है। यह आत्मा संकल्प, विकल्प रूप कर्तव्य भावों से संसार सागर में डूबती रहती है। परिग्रह का परित्याग कर परिणामों को आत्मकेंद्रित करना ही अकिंचन धर्म की भावधारा है।
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उन्होंने कहा कि आत्मा के अपने गुणों के सिवाय जगत में अपनी अन्य कोई भी वस्तु नहीं है। इस दृष्टि से आत्मा अकिंचन है। अध्यात्म की साधना का चरम रूप मेरा कुछ भी नहीं हैं ये अनुभूति ही जीवन का यथार्थ है। सर्वश्रेष्ठ धर्म मानवता है। हमारे जीवन का मूल ध्येय धन अर्जन करना ही नहीं अपितु धर्म के आधार पर सुख-समृद्धि लाना भी है। धर्म जीवन का परम आधार है, जो स्व के अनुशासन को संचालित करती है। भक्तों ने घर बैठे ही सभी आयोजनों को लाइव देखा। शाम को जिनवाणी, शास्त्र पूजन व तीर्थंकरों की आरती की गई।
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