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पूर्वांचल के इस जिला कारागार के जेलर ने ही जताई असुरक्षा की आशंका
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बलिया
Updated Tue, 10 Jul 2018 07:41 PM IST
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जिला कारागार में खाद्य सामग्री चेक करते बंदीरक्षक
- फोटो : अमर उजाला
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माफिया मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में हत्या के बाद बलिया जिला कारागार भी अलर्ट हो गया है। सुरक्षा की दृष्टि से देखा जाए तो बलिया जिला कारागार की स्थिति भी सही नहीं है।
जेल प्रशासन ने असुरक्षा की आशंका जताई है, उसकी वजह यह है कि जेल कारागार से सटे क्षेत्र में मानक के विपरीत कई ऊंची-ऊंची इमारतें बन गई हैं, जहां से जेल की गतिविधियों पर आसानी से नजर रखी जा सकती है। इसको लेकर जेल अधीक्षक ने असुरक्षा की आशंका जताई है।
बागपत के जिला कारागार में अत्याधुनिक हथियार से मुन्ना बजरंगी की हत्या कर दी गई। जेल में हत्या के बाद शासन स्तर से सभी जिला कारागारों को सुरक्षा के इंतजाम के लिए हाई अलर्ट जारी तो कर दिए गए है, लेकिन बीते कई सालों से जेल की सुरक्षा को लेकर शासन-प्रशासन के अफसरों को भेजे गए पत्र में भी कई बिंदुओं का उल्लेख किया गया है।
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जिससे साबित हो रहा है कि जिला कारागार भी अब सुरक्षित नहीं रह गया है। ऐसे में जो भी जेल अधीक्षक जिले में आया उसने शासन-प्रशासन को इस बात के लिए आगाह किया कि जिला कारागार वर्तमान परिवेश में पूरी तरह से सुरक्षित नहीं रह गया है।
जेल सूत्रों की मानें तो जिला कारागार के दो सौ मीटर की रेंज कोई रिहायशी मकान नहीं होना चाहिए। अगर है भी तो उसे दो मंजिला से अधिक नहीं बनवाया जा सकता है।
जबकि जिला कारागार के आसपास करीब दर्जन भर से अधिक मकान ऐसे हैं जो सौ मीटर से भी कम दूरी पर हैं और बहुमंजिले है। ऐसे में जिला कारागार की गतिविधियों पर अपने निजी मकान से भी नजर रखी जा सकती है।
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जेल प्रशासन ने असुरक्षा की आशंका जताई है, उसकी वजह यह है कि जेल कारागार से सटे क्षेत्र में मानक के विपरीत कई ऊंची-ऊंची इमारतें बन गई हैं, जहां से जेल की गतिविधियों पर आसानी से नजर रखी जा सकती है। इसको लेकर जेल अधीक्षक ने असुरक्षा की आशंका जताई है।
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बागपत के जिला कारागार में अत्याधुनिक हथियार से मुन्ना बजरंगी की हत्या कर दी गई। जेल में हत्या के बाद शासन स्तर से सभी जिला कारागारों को सुरक्षा के इंतजाम के लिए हाई अलर्ट जारी तो कर दिए गए है, लेकिन बीते कई सालों से जेल की सुरक्षा को लेकर शासन-प्रशासन के अफसरों को भेजे गए पत्र में भी कई बिंदुओं का उल्लेख किया गया है।
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जिससे साबित हो रहा है कि जिला कारागार भी अब सुरक्षित नहीं रह गया है। ऐसे में जो भी जेल अधीक्षक जिले में आया उसने शासन-प्रशासन को इस बात के लिए आगाह किया कि जिला कारागार वर्तमान परिवेश में पूरी तरह से सुरक्षित नहीं रह गया है।
जेल सूत्रों की मानें तो जिला कारागार के दो सौ मीटर की रेंज कोई रिहायशी मकान नहीं होना चाहिए। अगर है भी तो उसे दो मंजिला से अधिक नहीं बनवाया जा सकता है।
जबकि जिला कारागार के आसपास करीब दर्जन भर से अधिक मकान ऐसे हैं जो सौ मीटर से भी कम दूरी पर हैं और बहुमंजिले है। ऐसे में जिला कारागार की गतिविधियों पर अपने निजी मकान से भी नजर रखी जा सकती है।
जेल में कहीं भी ढील देने के मूड में नहीं दिख रहा जेल प्रशासन
सामान लेकर जेल में प्रवेश करते कैदियों के परिजन
- फोटो : अमर उजाला
बागपत की घटना के बाद जिला कारागार में भी अभूतपूर्व सुरक्षा देखने को मिली। जेल में निरूद्घ कैदियों से मिलने वालों की गहन तलाशी के बाद ही उन्हें अंदर भेजा जा रहा था।
जेल सुरक्षा को लेकर अलर्ट शासन के फरमान के बाद निगरानी के लिए कई टीमें भी बनाई गई है। जो जेल के अंदर जाने वाले कैदियों के शुभेच्छुओं पर नजर रखे हुए हैं। जेल प्रशासन किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की ढील देने के मूड में नहीं दिख रही है।
जिला कारागार के जेल अधीक्षक प्रशांत मौर्य ने बताया कि बागपत की घटना के बाद जेल में सुरक्षा के कड़े प्रबंध कर दिए गए हैं। संगीन मामलों के अपराधियों पर पैनी निगाह रखी जा रही है। जेल के मुख्य गेट पर चेक करने के बाद लोगों को अंदर भेजा जाता है। वहां भी मेटल डिटेक्टर लगाया गया है। जिससे कोई भी धातु की वस्तु अंदर नहीं जा सकती है।
हालांकि जेल के आसपास बने बहुमंजिले इमारतों से खतरा है। उन बहुमंजिली इमारतों के चलते जेल को दूसरे जगह स्थानांतरित करने के लिए मैने भी जिला प्रशासन से लेकर जेल प्रशासन तक को पत्र लिखा है, जबकि जिला जज, डीएम और एसपी की त्रिमासिक जांच के बाद भी जेल को असुरक्षित बताते हुए अन्यत्र जेल बनाकर स्थानांतरण करने के लिए रिपोर्ट भेजी गई है।
बलिया के जिलाधिकारी भवानी सिंह खंगारौत का कहना है कि जिला कारागार की सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन गंभीर है। जेल की गतिविधियों पर प्रशासन की पूरी नजर है।
इसके लिए बकायदा टीम बनाकर जांच कराई जाती है। जेल के आसपास के इमारतों को लेकर जो असुरक्षा की संभावना जताई गई है, वह संज्ञान में है, चूकि यहां का जेल काफी पुराना है, जो आबादी के बीच में है। इसको लेकर जल्द ही कोई व्यवस्था की जाएगी।
जेल सुरक्षा को लेकर अलर्ट शासन के फरमान के बाद निगरानी के लिए कई टीमें भी बनाई गई है। जो जेल के अंदर जाने वाले कैदियों के शुभेच्छुओं पर नजर रखे हुए हैं। जेल प्रशासन किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की ढील देने के मूड में नहीं दिख रही है।
जिला कारागार के जेल अधीक्षक प्रशांत मौर्य ने बताया कि बागपत की घटना के बाद जेल में सुरक्षा के कड़े प्रबंध कर दिए गए हैं। संगीन मामलों के अपराधियों पर पैनी निगाह रखी जा रही है। जेल के मुख्य गेट पर चेक करने के बाद लोगों को अंदर भेजा जाता है। वहां भी मेटल डिटेक्टर लगाया गया है। जिससे कोई भी धातु की वस्तु अंदर नहीं जा सकती है।
हालांकि जेल के आसपास बने बहुमंजिले इमारतों से खतरा है। उन बहुमंजिली इमारतों के चलते जेल को दूसरे जगह स्थानांतरित करने के लिए मैने भी जिला प्रशासन से लेकर जेल प्रशासन तक को पत्र लिखा है, जबकि जिला जज, डीएम और एसपी की त्रिमासिक जांच के बाद भी जेल को असुरक्षित बताते हुए अन्यत्र जेल बनाकर स्थानांतरण करने के लिए रिपोर्ट भेजी गई है।
बलिया के जिलाधिकारी भवानी सिंह खंगारौत का कहना है कि जिला कारागार की सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन गंभीर है। जेल की गतिविधियों पर प्रशासन की पूरी नजर है।
इसके लिए बकायदा टीम बनाकर जांच कराई जाती है। जेल के आसपास के इमारतों को लेकर जो असुरक्षा की संभावना जताई गई है, वह संज्ञान में है, चूकि यहां का जेल काफी पुराना है, जो आबादी के बीच में है। इसको लेकर जल्द ही कोई व्यवस्था की जाएगी।