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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Jagannath Rath yatra 2024 Jagannath Unique Lord of Kashi who rides three vehicles in four days

Jagannath Rath yatra: काशी के अनोखे देवता, डोली में आते हैं और कार में सवार होकर जाते हैं भगवान जगन्नाथ

Tue, 09 Jul 2024 12:03 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Tue, 09 Jul 2024 12:03 PM IST
सार

काशी के इकलौते देवता भगवान जगन्नाथ हैं, जो चार दिनों में तीन वाहन की सवारी करते हैं। भगवान जगन्नाथ डोली में आते हैं और कार में सवार होकर जाते हैं। इधर, 10 साल से कहार नहीं मिलने के कारण भगवान को पुजारी कार में लेकर जाते हैं। 

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Jagannath Rath yatra 2024 Jagannath Unique Lord of Kashi who rides three vehicles in four days
Jagannath Rath yatra - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

काशी की परंपरा, प्रथा और रस्में पूरी दुनिया में अनोखी हैं। यही कारण है कि यहां नाथों के नाथ भी बालसुलभ भाव से भक्तों को दर्शन देते हैं। भक्तों के प्रेम में स्नान करके बीमार पड़ते हैं और अज्ञातवास पर चले जाते हैं। भक्त भगवान के स्वास्थ्य लाभ के लिए काढ़े का भोग लगाते हैं और भगवान जब स्वस्थ हो जाते हैं तो भक्तों से मिलने के लिए काशी की गलियों में निकल पड़ते हैं। 

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भगवान जगन्नाथ काशी के इकलौते देवता हैं जो चार दिनों में तीन वाहनों की सवारी करते हैं। डोली में सवार होकर भक्तों को दर्शन देने आते हैं और जब विदाई की बेला होती है तो इन्हें कार में सवार होकर मंदिर परिसर जाते हैं।
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काशी के पहले लक्खा मेले की परंपराएं 222 सालों से निभाई जा रही हैं। काशी के पहले लक्खा मेले रथयात्रा में भक्त मंगलवार तक भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र के दर्शन करेंगे। बीते शनिवार को भगवान सपरिवार डोली पर सवार होकर मंदिर के गर्भगृह से काशी की गलियों में निकले। 13 मोहल्लों से डोली गुजरी। इसके बाद रथ पर सवार हुए और तीन दिनों तक भक्तों को दर्शन देंगे। मंगलवार की देर रातद भक्तों से विदा लेकर भगवान कार में सवार होकर मंदिर में लौट जाएंगे।

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यह काशी के इकलौते भगवान हैं जो वर्ष के चार दिनों में अलग-अलग तीन वाहन पर सवार होते हैं। डोली और रथ पर विराजमान भगवान के दर्शन तो हर कोई करता है लेकिन कार में सवार भगवान के दर्शन किसी को नहीं होते। मध्यरात्रि के बाद अपने नियत समय पर भगवान को रथ से उतारकर कार में विराजमान कराया जाता है। इसके बाद कार सीधे मंदिर परिसर में ही पहुंचकर रुकती है। इसके समय के बारे में सिर्फ और सिर्फ पुजारी व ट्रस्ट के पदाधिकारियों को ही पता होता है।

ट्रस्ट श्री जगन्नाथ के दीपक शापुरी ने बताया कि 2010 तक भगवान डोली पर सवार होकर निकलते थे, रथ पर विराजमान होकर दर्शन देते थे और फिर वापस डोली से अपने मंदिर में लौट जाते थे। इसके बाद रात में डोली उठाने वालों की किल्लत हो गई तो फिर इसमें बदलाव करना पड़ा। 

स्वस्थ होने के बाद भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र जब काशी की गलियों में निकलते हैं तो डोली उठाने वालों की होड़ सी लग जाती है लेकिन रात के समय ना तो भक्त होते हैं और ना ही कोई डोली उठाने वाला। इसको देखते हुए बदलते समय के साथ परंपराओं में थोड़ा सा बदलाव करना पड़ा। पिछले 14 सालों से भगवान को कार में विराजमान कराकर मंदिर वापस लाया जाता है। इस दौरान मंदिर के पुजारी और चालक के अलावा कोई तीसरा व्यक्ति मौजूद नहीं होता है।

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