सम्मान: आईटीबीपी के डीआईजी इंदू भूषण झा को मिला पुलिस पदक, बीएचयू का नाम किया रोशन
आईटीबीपी के डीआईजी इंदु भूषण झा को सराहनीय सेवा के लिए पुलिस पदक मिला। उनको यह सम्मान मिलने पर बीएचयू में खुशी का माहौल है। उन्होंने बीएचयू से पढ़ाई की है।
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भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) में उप-महानिरीक्षक (डीआईजी) स्थापना, बल मुख्यालय के पद पर तैनात इंदु भूषण झा को सराहनीय सेवा के लिए पुलिस पदक से सम्मानित किया गया। जम्मू कश्मीर के उधमपुर में आयोजित आईटीबीपी बल-स्थापना दिवस के अवसर पर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार द्वारा पदक प्रदान कर सम्मानित किया गया। डीआईजी इंदू भूषण झा को मिले इस सम्मान से बेगुसराय और काशी हिंदू विश्वविद्यालय में खुशी का माहौल है।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के आयुर्वेद संकाय के पूर्व डीन प्रो. चंद्र भूषण झा के बेटे डीआईजी इंदु भूषण झा बेगुसराय के मंझौल गांव, बरियारपुर के मूल निवासी हैं। बेगुसराय में प्रारम्भिक शिक्षा के बाद वे काशी हिंदू विश्विद्यालय में अध्ययनरत रहे और मेधावी छात्र के रूप में बीएससी करने के बाद वर्ष 1996 में आईटीबीपी में असिस्टेंट कमांडेंट के रूप में सेवा प्रारंभ की। डीआईजी इंदु भूषण झा ने एमबीए भी किया है।
लगभग 30 साल की सेवा के दौरान डीआईजी इंदू भूषण झा ने जम्मू-कश्मीर के आतंकवाद प्रभावित क्षेत्रों और भारत-चीन सीमा पर लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम एवं अरुणाचल प्रदेश में तैनात रहे। उन्होंने छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियानों में आईटीबीपी के बटालियन का सफल नेतृत्व किया और वामपन्थ उग्रवाद को सीमित करने के अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जिससे भविष्य में उक्त क्षेत्रों में नक्सलियों का प्रभुत्व समाप्त किया जा सका।
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उन्होंने छत्तीसगढ़ के मोहला मानपुर और कोंडागांव जिलों में नक्सल विरोधी अभियानों में आईटीबीपी की बटालियन का नेतृत्व किया। उनकी सेवा और योगदान के विषय में उप सेनानी, द्वितीय कमान, कमांडेंट एवं डीआईजी के रूप में पदोन्नति मिली। डीआईजी इंदू भूषण झा को पूर्व में पुलिस (स्पेशल ड्यूटी) मेडल, महानिदेशक प्रशस्ति पत्रों एवं डिस्क्स से सम्मानित किया जा चुका है।
डीआईजी इंदू भूषण झा ने आईटीबीपी की कई नवीन बटालियंस की स्थापना में अहम योगदान दिया है, साथ ही निर्माण एवं मानव संसाधन के विविध क्षेत्रों में लगातार बल की सेवा की है। डीआईजी इंदू भूषण झा आईटीबीपी की तीन बटालियनों की स्थापना और उन्हें विकसित करने में सक्रिय रूप से शामिल रहे। वर्ष 2014 में, तिहाड़ केंद्रीय जेल और उपराष्ट्रपति भवन को सुरक्षा व्यवस्था की कमान थामी।
उन्होंने देहरादून और बरेली में तदर्थ (एड-हॉक) प्रशिक्षण केंद्र की भी कमान संभाली। आपने जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले में सेवाएं दीं। डीआईजी इंदू भूषण झा चीन में कैलाश मानसरोवर यात्रा के भारतीय यात्रियों के दल में विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि एवं एल ओ के रूप में राष्ट्र का प्रतिनिधित्व भी कर चुके हैं।