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दमकल की राह में ट्रैफिक का रोड़ा
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 11 Apr 2016 01:37 AM IST
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शहर में कहीं आग लगने पर सही समय पर सूचना देने के बाद भी फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर देर से पहुंचती हैं। कई बार तो आग बुझ जाने के बाद पहुंचती है। ऐसा नहीं कि अग्निशमन विभाग लापरवाह है अथवा उसके पास संसाधन नहीं हैं, बल्कि इसकी प्रमुख वजह है शहर का व्यस्त ट्रैफिक। फायर ब्रिगेड की राह में ट्रैफिक बड़ा रोड़ा बन रहा है। सायरन बजाने के बाद भी इन गाड़ियों को आगे बढ़ने के लिए जगह नहीं मिलती।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी ने बताया कि विभाग के पास आग बुझाने के पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं। करीब 44 मीटर ऊंचाई तक की आग बुझाने के लिए उपयोगी दस-दस करोड़ की दो हाइड्रोलिक प्लेटफार्म मौजूद हैं। बताया कि विभाग के पास आग लगने की प्रतिदिन दो से चार शिकायतें आती हैं। सूचना मिलने के तुरंत बाद गाड़ियां निकल जाती हैं लेकिन व्यस्ततम इलाकों में जाम की वजह से पहुंचने में देर हो जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचने में और ज्यादा लगता है। बताया कि सबसे ज्यादा समस्या गलियों मेें आग लगने पर होती है। फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को सड़क पर ही रोड़ना पड़ता है। वहां से पाइप के सहारे गलियों की आग बुझाने की मशक्कत की जाती है।
फायर ब्रिगेड के अधिकारियों का कहना है कि उनके पास आग बुझाने के पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं। दो हाइड्रोलिक प्लेटफार्म के अलावा 11 हजार लीटर पानी की क्षमता का एक वाटर वाउजर, आठ हजार लीटर का एक वाटर टेंडर, 6500 लीटर के दो, 5000 का एक और 4500 का चार वाटर टेंडर मौजूद है। विभाग के पास गाड़ियों समेत कुल 172 उपकरण हैं। इसमें 93 फायर इंस्टीग्युसर भी शामिल हैं। यह हल्की आग बुझाने में काम आता है।
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विभाग के मुताबिक इस साल मार्च में जिले में 62 स्थानों पर आग लगने की घटनाएं हुईं, जिससे 17, 88,200 रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ। वहीं, जनवरी से मार्च तक कुल 115 स्थानों पर आग लगी। इसमें 70 लाख 95 हजार रुपये की संपत्ति जल गई। इन हादसों में दो जानें गईं और 16 लोग गंभीर रूप से झुलस गए।
काशी के मंदिरों में कभी आग लगने की घटना हुई तो देवस्थानों को बचाना आसान नहीं होगा। काशी विश्वनाथ, अन्नपूर्णा, काल भैरव आदि मंदिरों में न तो पानी की पाइप है न फायर एक्स्टींग्यूशर। हजारों दर्शनार्थियों की भीड़ वाले इन मंदिरों में बालू भरी बाल्टियां तक नहीं रखी गईं। केरल के परवूर स्थित पुत्तिंगल देवी मंदिर में आतिशबाजी से भीषण आग लगने के बाद रविवार को काशी के मंदिरों की कराई गई पड़ताल में यह सचाई सामने आई।
काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन के पास अग्निशमन का न तो दस्ता है और न कोई उपकरण। सिर्फ मंदिर के भंडार में एक फायर एक्स्टींग्यूशर रखा है। पुलिस कंट्रोल रूम के पास फायर कनेक्शन है लेकिन संकरी गली होने की वजह से वहां दमकल नहीं जा सकता। अन्नपूर्णा मंदिर में सिर्फ दो फायर एक्स्टींग्यूशर लगाए गए हैं। यहां भी अग्निशमन के उपाय नदारद हैं। मंदिर प्रबंधक काशी मिश्रा बताते हैं कि कभी न आशंका पैदा हुई न जरूरत समझी गई। काल भैरव मंदिर में कोई प्रबंध नहीं हैं। महंत नवीन गिरि का कहना है कि उनकी जानकारी में कभी आग नहीं लगी। इसलिए इस दिशा में कभी सोचा नहीं गया।
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मुख्य अग्निशमन अधिकारी ने बताया कि विभाग के पास आग बुझाने के पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं। करीब 44 मीटर ऊंचाई तक की आग बुझाने के लिए उपयोगी दस-दस करोड़ की दो हाइड्रोलिक प्लेटफार्म मौजूद हैं। बताया कि विभाग के पास आग लगने की प्रतिदिन दो से चार शिकायतें आती हैं। सूचना मिलने के तुरंत बाद गाड़ियां निकल जाती हैं लेकिन व्यस्ततम इलाकों में जाम की वजह से पहुंचने में देर हो जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचने में और ज्यादा लगता है। बताया कि सबसे ज्यादा समस्या गलियों मेें आग लगने पर होती है। फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को सड़क पर ही रोड़ना पड़ता है। वहां से पाइप के सहारे गलियों की आग बुझाने की मशक्कत की जाती है।
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फायर ब्रिगेड के अधिकारियों का कहना है कि उनके पास आग बुझाने के पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं। दो हाइड्रोलिक प्लेटफार्म के अलावा 11 हजार लीटर पानी की क्षमता का एक वाटर वाउजर, आठ हजार लीटर का एक वाटर टेंडर, 6500 लीटर के दो, 5000 का एक और 4500 का चार वाटर टेंडर मौजूद है। विभाग के पास गाड़ियों समेत कुल 172 उपकरण हैं। इसमें 93 फायर इंस्टीग्युसर भी शामिल हैं। यह हल्की आग बुझाने में काम आता है।
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विभाग के मुताबिक इस साल मार्च में जिले में 62 स्थानों पर आग लगने की घटनाएं हुईं, जिससे 17, 88,200 रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ। वहीं, जनवरी से मार्च तक कुल 115 स्थानों पर आग लगी। इसमें 70 लाख 95 हजार रुपये की संपत्ति जल गई। इन हादसों में दो जानें गईं और 16 लोग गंभीर रूप से झुलस गए।
काशी के मंदिरों में कभी आग लगने की घटना हुई तो देवस्थानों को बचाना आसान नहीं होगा। काशी विश्वनाथ, अन्नपूर्णा, काल भैरव आदि मंदिरों में न तो पानी की पाइप है न फायर एक्स्टींग्यूशर। हजारों दर्शनार्थियों की भीड़ वाले इन मंदिरों में बालू भरी बाल्टियां तक नहीं रखी गईं। केरल के परवूर स्थित पुत्तिंगल देवी मंदिर में आतिशबाजी से भीषण आग लगने के बाद रविवार को काशी के मंदिरों की कराई गई पड़ताल में यह सचाई सामने आई।
काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन के पास अग्निशमन का न तो दस्ता है और न कोई उपकरण। सिर्फ मंदिर के भंडार में एक फायर एक्स्टींग्यूशर रखा है। पुलिस कंट्रोल रूम के पास फायर कनेक्शन है लेकिन संकरी गली होने की वजह से वहां दमकल नहीं जा सकता। अन्नपूर्णा मंदिर में सिर्फ दो फायर एक्स्टींग्यूशर लगाए गए हैं। यहां भी अग्निशमन के उपाय नदारद हैं। मंदिर प्रबंधक काशी मिश्रा बताते हैं कि कभी न आशंका पैदा हुई न जरूरत समझी गई। काल भैरव मंदिर में कोई प्रबंध नहीं हैं। महंत नवीन गिरि का कहना है कि उनकी जानकारी में कभी आग नहीं लगी। इसलिए इस दिशा में कभी सोचा नहीं गया।