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विधान परिषद में उठा विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के कामकाज में शासन के दखल का मुद्दा

Fri, 19 May 2017 12:36 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,लखनऊ/वाराणसी
ब्यूरो,अमर उजाला,लखनऊ/वाराणसी Updated Fri, 19 May 2017 12:36 AM IST
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Issue of governance interference in the functioning of Vishwanath temple council rise
काशी विश्वनाथ मंदिर - फोटो : file
विधान परिषद में गुरुवार को प्रश्नकाल के दौरान सपा के शतरुद्र प्रकाश ने काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के कामकाज में शासन के बढ़ते दखल न्यास की स्वायत्तता के मुद्दे को उठाया।
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उन्होंने कहा कि विश्वनाथ मंदिर का स्वामी सरकार नहीं, ज्योतिर्लिंग के रूप में गर्भगृह में विराजित बाबा खुद हैं। न्यास की स्वायत्तता पर कोई आंच नहीं आनी चाहिए। काशी विश्वनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं को ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं मिले, इस पर सभी का ध्यान केंद्रित होना चाहिए। 
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दरअसल, सपा एमएलसी ने काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद की तीन जनवरी 2017 की 90 वीं बैठक को अवैध घोषित करने के संबंध में प्रश्न पूछा था। कहा था कि काशी विश्वनाथ मंदिर करोड़ों सनातनधर्मियों की आस्था का केंद्र है। इसलिए इसे कामकाज में अनधिकृत हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए।
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जवाब देते हुए धर्मार्थ कार्य मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने कहा कि सरकार ने 90वीं बैठक को अवैध नहीं किया है। बता दें कि तीन जनवरी को न्यास परिषद की 90वीं बैठक हुई थी। तब तत्कालीन प्रमुख सचिव नवनीत सहगल ने प्रमुख सचिव वित्त व कुछ अन्य सदस्यों के उपस्थिति न होने के आधार पर अवैध ठहरा दिया था।

इसके बाद 25 मार्च को हुई 91वीं बैठक में लिए गए सभी निर्णय स्थगित रखने का निर्देश प्रमुख सचिव ने दिया था। 
मंत्री ने कहा कि काशी विश्वनाथ मंदिर के प्रति आस्था सबकी है। सरकार ने केवल 90वीं  बैठक के संबंध में दो बिंदुओं की सूचना मांगी थी। उन्होंने बताया कि 90वीं बैठक के केवल कुछ निर्णय रोके गए हैं।


इसमें इनोवा गाड़ी की खरीद व गेस्ट हाउस बनाने का निर्णय प्रमुख है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि मंदिर की गरिमा और भव्यता बढ़े और बरकरार रहे। विश्वनाथ मंदिर न्यास के मामलों में सरकार बेवजह हस्तक्षेप नहीं करेगी। 
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