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International Olympic Day: यूपी के ब्राजील दालमंडी-बेनिया में कई खिलाड़ी बन गए दुकानदार, कई बने अधिकारी

Tue, 23 Jun 2026 06:17 PM IST
Pragati Chand हिमांशु अस्थाना, अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी।
हिमांशु अस्थाना, अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Tue, 23 Jun 2026 06:17 PM IST
सार

दालमंडी से बेनिया मैदान से निकले कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के फुटबॉलर अब दुकानदार और बिल्डर बन गए। वहीं कुछ खेल कोटे से अधिकारी या क्लब-एकेडमी में सेवाएं दे रहे हैं। 

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International Olympic Day 2026 Many players in Dalmandi Benia area of UP become shopkeepers
बेनियाबाग मैदान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फुटबॉलर्स के लिए उत्तर प्रदेश का ब्राजील रही दालमंडी से बेनिया मैदान के बीच अब फुटबॉल नहीं वाहनों और पर्यटकों के फुटफॉल गिने जा रहे हैं। ढाई दशक पहले तक यहां से निकले राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के फुटबॉलर अब दुकानदार और बिल्डर हैं तो कुछ खेल कोटे से अधिकारी या क्लब-एकेडमी में सेवाएं दे रहे हैं। दालमंडी से 90 साल पहले बनारस स्पोर्टिंग बना, फिर फिरोज सहित 10 से 12 क्लब बने। यहां के फुटबॉलरों ने पाकिस्तान, रूस और यूरोप की धरती पर ही वहां के खिलाड़ियों को चुनौती दी और हराया भी। अब उन गलियों की ये गाथा यादों के फ्रेम में या दुकानों में कैद हो गई है।

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बेनिया और दालमंडी से निकले अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रहे नूर आलम के अनुसार, शताब्दियों से फुटबॉलर पैदा कर रहे बेनिया मैदान के नीचे पार्किंग बन गई। उसके बाद यहां पर कभी भी 11-11 खिलाड़ियों के मैच नहीं कराए जा सके। प्रशासन ने वादा किया था कि निर्माण के बाद 80-120 आकार का मैदान दिया जाएगा लेकिन अब यहां सिर्फ सेवन और नाइन साइड ही मैच हो पाते हैं। यानी कि 7-7 या 9-9 खिलाड़ी ही फुटबॉल मैच खेल सकते हैं। 
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नूर आलम ने बताया कि दालमंडी के सभी दुकानदार फुटबॉलर ही थे। पूरे बेनिया और दालमंडी में ऐसी कोई जगह नहीं बचती थी जहां पोल लगाकर फुटबॉल न खेला जा रहा हो। 10 से 12 टीमें खेलती थीं। जिस दिन बेनिया, सिगरा या 39 जीटीसी में फुटबॉल मैच होते थे, दालमंडी की दुकानों के शटर गिर जाते थे। 
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लीग मैच के 50 रुपये टिकट देकर मैच देखने जुट जाते थे। कोई संगठित व्यवस्था नहीं थी फिर भी प्रशंसक खूब प्यार लुटाते थे। लोग अपने रुपयों से खिलाड़ियों को भरपूर नाश्ता-पानी कराते थे। 39 जीटीसी बनाम बनारस स्पोर्टिंग के बीच मैचों में प्रशसंकों का उत्साह इतना बढ़ जाता था कि कभी-कभी मैच बंद हो जाता था।

30 साल पहले दालमंडी से पेशावर पहुंचकर पाकिस्तान को हराया
फुटबॉल कोच और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रहे शम्सी रजा ने बताया कि 30 साल पहले उन्होंने वाइचुंग भूटिया के साथ अपनी टीम लेकर पेशावर गए। वहां प्री ओलंपिक में पाकिस्तान को पटखनी दी थी। यहां के खिलाड़ियों ने कई देशों में जाकर अपनी धाक जमाई है। 20 साल पहले तक बेनिया की एलुमनी मीट भी होती थी लेकिन अब काफी समय से कई खिलाड़ी एक-दूसरे से नहीं मिले हैं। दालमंडी से इतने खिलाड़ियों के निकलने के पीछे एक बड़ी वजह 1936 में बना बनारस स्पोर्टिंग क्लब था।

बेनिया से निकले राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फुटबॉलर

  • अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी : नूर आलम, शम्शी रजा, मुहम्मद नसीम नसीम इंडिया, नसीम अख्तर।
  • राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी : मोहम्मद सिब्तैन, सफीर हसन, शाहिद अली, शाहिद अली बेलग्रामी, जीशान अली, मोहम्मद सलाम, अनवर खां, जहीर अहमद शकील रजा, मोहम्मद इम्तियाज, शरीयत रजा, फरहत रजा, राना अनवर, शकील अहमद बबलू आदि।
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