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अंतरराष्ट्रीय ध्रुपद मेले का हुआ श्रीगणेश, देर रात तक बही सुरगंगा
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ध्रुपद मेले की पहली निशा का शुभारंभ ध्रुपद की प्राचीन विधा सुरबहार के वादन से हुआ। बनारस घराने के प्रख्यात सुरबहार वादक पद्मश्री पंडित शिवनाथ मिश्र एवं पंडित देवब्रत मिश्रा की प्रस्तुति से ध्रुपद की सुरमयी शाम का श्रीगणेश हुआ। उन्होंने सबसे पहले राग यमन में अलाप, जोड़ के उपरांत धमार ताल में बंदिश प्रस्तुत की।
इसमें राग में स्वरों के चलन के साथ-साथ लयकारी और तिहाई की प्रधानता रही। पिता-पुत्र की सुरबहार पर अद्भुत जुगलबंदी ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके साथ पखावज पर अंकित पारिख ने संगत की। शनिवार को तुलसी घाट पर अंतरराष्ट्रीय ध्रुपद मेले का शुभारंभ महंत प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र एवं उत्तर प्रदेश नाटक अकादमी के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. राजेश्वर आचार्य ने दीप जलाकर किया।
प्रथम प्रस्तुति में सुरबहार की प्रस्तुति में पिता-पुत्र की जोड़ी ने आलापचारी के साथ राम यमन में आलाप जोड़ के साथ धमार से रससिक्त किया। पखवाज संगति अंकित पारिख ने की। ध्रुपद मेले के संयोजक प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र ने ध्रुपद मेले को नई ऊर्जा एवं साधना का प्रतीक बताया। अतिथियों का स्वागत संदीप पांडेय एवं जेपी पाठक ने किया। दूसरी प्रस्तुति में पं. ऋत्विक सान्याल का गायन और तीसरी प्रबाल नाथ के पखावज की प्रस्तुति हुई।
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चौथी प्रस्तुति में बनारस के युवा बांसुरी वादक डॉ. हरि प्रसाद पौडवाल ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने अमृतवर्षिणी राग में आलाप, जोड़, झाला के बाद चौताल में निबद्ध बंदिश की प्रस्तुति दी। अप्रचलित रागों में से एक इस राग में गमक और तान का अप्रतिम संगम श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर गया। इसके बाद उन्होंने मौसम के अनुसार द्रुत लय सूलताल में निबद्ध राग बहार में बजाकर कार्यक्रम का समापन किया। संचालन सौरभ चक्रवर्ती ने किया।
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इसमें राग में स्वरों के चलन के साथ-साथ लयकारी और तिहाई की प्रधानता रही। पिता-पुत्र की सुरबहार पर अद्भुत जुगलबंदी ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके साथ पखावज पर अंकित पारिख ने संगत की। शनिवार को तुलसी घाट पर अंतरराष्ट्रीय ध्रुपद मेले का शुभारंभ महंत प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र एवं उत्तर प्रदेश नाटक अकादमी के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. राजेश्वर आचार्य ने दीप जलाकर किया।
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प्रथम प्रस्तुति में सुरबहार की प्रस्तुति में पिता-पुत्र की जोड़ी ने आलापचारी के साथ राम यमन में आलाप जोड़ के साथ धमार से रससिक्त किया। पखवाज संगति अंकित पारिख ने की। ध्रुपद मेले के संयोजक प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र ने ध्रुपद मेले को नई ऊर्जा एवं साधना का प्रतीक बताया। अतिथियों का स्वागत संदीप पांडेय एवं जेपी पाठक ने किया। दूसरी प्रस्तुति में पं. ऋत्विक सान्याल का गायन और तीसरी प्रबाल नाथ के पखावज की प्रस्तुति हुई।
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चौथी प्रस्तुति में बनारस के युवा बांसुरी वादक डॉ. हरि प्रसाद पौडवाल ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने अमृतवर्षिणी राग में आलाप, जोड़, झाला के बाद चौताल में निबद्ध बंदिश की प्रस्तुति दी। अप्रचलित रागों में से एक इस राग में गमक और तान का अप्रतिम संगम श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर गया। इसके बाद उन्होंने मौसम के अनुसार द्रुत लय सूलताल में निबद्ध राग बहार में बजाकर कार्यक्रम का समापन किया। संचालन सौरभ चक्रवर्ती ने किया।