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Childhood Cancer Day: बीएचयू में पांच साल में 38 बच्चों का ट्रांसप्लांट, हर साल 200 नए मरीज; ऐसे बरतें सावधानी
Sun, 15 Feb 2026 12:54 PM IST
प्रगति चंद
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: प्रगति चंद
Updated Sun, 15 Feb 2026 12:54 PM IST
सार
Varanasi News: पांच साल में कैंसर ग्रसित 38 बच्चों का बोन मैरो ट्रांसप्लांट हुआ। वहीं हर साल 200 नए मरीज सामने आ रहे हैं। बीएचयू में हर बुधवार को ओपीडी चलती है।
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बच्चों में कैंसर
- फोटो : Amarujala.com
विस्तार
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की जद में बच्चे बहुत तेजी से आते जा रहे हैं। पिछले पांच साल में बीएचयू में एक दो नहीं बल्कि 38 कैंसर ग्रसित बच्चों का बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया गया। इसमें 15 से अधिक बच्चों की उम्र 4 से 14 साल रही है। चिंता की बात यह है कि वाराणसी सहित पूर्वांचल के जिलों के अलावा बिहार को मिलाकर हर साल 200 नए बच्चों में कैंसर की पुष्टि हो रही हैं।
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बच्चों में कैंसर से बचाव के प्रति जागरूकता के उद्देश्य से हर साल 15 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस मनाया जाता है। जहां तक बीएचयू में उपचार की बात है तो इसके लिए बाल रोग विभाग में हर बुधवार को जहां विशेष ओपीडी चलती है, वहीं बोन मैरो ट्रांसप्लांट सेंटर में कैंसर ग्रसित बच्चों के जांच, इलाज के साथ ही ट्रांसप्लांट भी किया जा रहा है।
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बीएचयू में पीडियाट्रिक बीएमटी प्रभारी प्रो. विनीता गुप्ता का कहना है कि बाल कैंसर की ज्यादातर वजह अनुवांशिक होता है। इसमें जांच के बाद पता चलता है कि संबंधित बच्चे में बीमारी की वजह जीन संबंधी समस्या होती है। कहा कि पिछले तीन साल की बात करें तो 2023 से 2025 तक हर साल मरीजों की संख्या में औसतन 20 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही है।
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यह भी महत्वपूर्ण होता है कि जितना जल्दी बच्चों को लेकर डॉक्टर के पास पहुंचा जाए, बच्चों को कैंसर जैसे खतरे से उबारा जा सकता है। जागरूकता के लिहाज से समय-समय पर कार्यक्रम कराए जाते हैं। इसमें कैंसर को मात दे चुके बच्चों, उनके अभिभावकों को आमंत्रित किया जाता है।
ये लक्षण दिखे तो तुरंत ले डॉक्टर की सलाह
- बच्चे को लगातार कई दिनों से बुखार होना।
- शरीर में पीलापन दिखना और खून की कमी होना।
- नाक या मसूड़ों से बार- बार खून का आना।
- तेजी से वजन कम होना और भूख न लगना, थकान।