सुरक्षित होगा सफर: वाराणसी मंडल में 614.75 किमी रेल मार्ग पर लगेगा कवच, इस सिस्टम से होंगे तीन फायदे
रेलवे ने वाराणसी मंडल में 614.75 किलोमीटर रेल मार्ग पर कवच सिस्टम लगाने का निर्णय लिया है। जल्द ही वाराणसी मंडल में रेलवे की ओर से इस दिशा में काम शुरू हो जाएगा।
विस्तार
रेलवे की ओर से ट्रेनों का सुरक्षित संचालन और यात्रियों का सफर पहले से और अधिक आसान होगा। इसके लिए ट्रेन रूट को तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक कदम आगे बढ़ाते हुए रेलवे ने वाराणसी मंडल में 614.75 किलोमीटर रेल मार्ग पर कवच सिस्टम लगाने का निर्णय लिया है। इसके लगने के बाद ऑटोमेटिक सिग्नल प्रणाली को मजबूती मिलेगी।
रेलवे की ओर से इसके लिए 223 करोड़ रुपये मंजूर कर दिए गए हैं। जल्द ही वाराणसी मंडल में रेलवे की ओर से दिशा में काम शुरू हो जाएगा। बरेका की ओर से रेल इंजनों में ये सिस्टम लगाया जा रहा है। कवच एक अत्याधुनिक स्वदेशी तकनीक है। इससे रेल हादसों को रोकने में बड़ी मदद मिलेगी। यह पूर्ण रूप से स्वदेशी तकनीक है।
कवच लगने से यह होगा फायदा
- सिग्नल ओवरशूटिंग से बचाव : कवच ऑटोमेटिक सिग्नलिंग प्रणाली है। यदि कोई ट्रेन गलती से रेड सिग्नल पार करती है तो कवच तकनीक उसे तुरंत रोक देगी। यानी चालक सिग्नल को ओवरशूट नहीं कर सकेंगे।
- ऑटोमेटिक ब्रेकिंग सिस्टम : ट्रेन के संचालन के समय आपातकालीन स्थिति या खतरे का अहसास होते ही ट्रेन में अपने-आप ब्रेक लग जाएगा।
- सुरक्षित ट्रेन संचालन : इस प्रणाली से ट्रेनों की गति और उनके मूवमेंट की भी रियल-टाइम निगरानी हो सकेगी। घने कोहरे में भी ट्रेनों का सुरक्षित संचालन संभव होगा। अगर चालक निर्धारित गति से अधिक गति में ट्रेन चलाएगा तो कवच की ओर से चेतावनी दी जाती है।
बरेका में पहले से बन रहा है कवच आधारित रेल इंजन
बरेका में अब जो भी रेल इंजन बनाए जा रहे हैं, उसमें कवच की फिटिंग की जा रही है। बरेका के जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार का कहना है कि इंजन में कवच सिस्टम को फिट करके ही दिया जा रहा है। कवच प्रणाली दो प्रमुख भाग से बनी होती है। इसमें ऑन बोर्ड कवच और स्टेशनरी कवच शामिल है। ऑन बोर्ड कवच प्रणाली लोकोमोटिव यानी इंजन में स्थापित होता है जबकि स्टेशनरी कवच स्टेशनों व ट्रैक के किनारे लगने वाले उपकरणों से मिलकर बनता है। इंजन में कवच प्रणाली में कवच नियंत्रण इकाई, आरएफ एंटेना, जीपीएस, जीएसएम एंटेना, ड्राइवर मशीन इंटरफेस सहित कई उपकरण लगाए जाते है। ये सभी उपकरण ट्रेनों की गति, स्थान, दिशा, सिग्नल, ब्रेकिंग प्रणाली की निगरानी करते रहते हैं।