दरोगा भर्ती: पकड़ा गया सॉल्वर दो बार पहले भी दे चुका है परीक्षा, बिहार और प्रयागराज से संचालित हो रहा नेटवर्क
थानाध्यक्ष मिर्जा रिजवान बेग ने बताया कि चार अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीम गठित की जा रही है।
विस्तार
वाराणसी के चितईपुर स्थित केंद्र पर दरोगा भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़ा करने वाले दो आरोपियों ने पुलिस को कई अहम जानकारियां दी है। दोनों के मोबाइल से अलग-अलग नंबरों से हुई कई बार बातचीत के रिकार्ड भी पुलिस को मिले हैं। इसमें पकड़े गए बिहार निवासी आरोपी ने पुलिस को बताया कि इसके पहले भी दो बार फर्जी तरीके से परीक्षा दे चुका है।
उसके सीडीआर और व्हाट्सएप चैट को कब्जे में लेकर चितईपुर पुलिस तफ्तीश शुरू कर दी है। दोनों के द्वारा बताए हुए पते पर पुलिस ने संपर्क साधना शुरू कर दिया है। इस खेल में बिहार और प्रयागराज का नेटवर्क काम कर रहा है। गिरफ्तार दोनों आरोपियों को पुलिस ने मंगलवार को न्यायालय में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया।
चितईपुर थाना अंतर्गत करौंदी स्थित केंद्र पर सोमवार को प्रथम पाली की परीक्षा में एक ही प्रवेश पत्र और आधार कार्ड लेकर प्रवेश कर रहे प्रयागराज के करोदिया थाना अंतर्गत मैदा मिसकुरी निवासी विद्याशंकर और बिहार गया के धनराई गांव निवासी विश्वजीत को पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
पुलिस की पूछताछ में विद्याशंकर ने बताया कि पहल स्नेह टाइपिंग सेंटर जानसेनगंज लीडर रोड में टाइपिंग सीखता था, वहीं पर प्रयागराज के नैनी निवासी शैलेंद्र चौधरी व फूलपुर प्रयागराज के महेन्द्र कुमार से कोचिंग में मुलाकात हुई थी। इन्हीं लोगों के माध्यम से दस लाख रुपये पर परीक्षा में पास करने की सेटिंग कराया गया था।
वहीं विश्वजीत ने बताया कि विद्याशंकर का प्रवेश पत्र व आधार कार्ड नालंदा निवासी मामा के लड़के दीपक और उसका साथी चालक दिनेश ने दिया था। दिनेश को कभी देखा नहीं सिर्फ फोन से बात हुई थी, जिसने बीस हजार रुपये एडवांस के तौर पर प्रवेश पत्र पर परीक्षार्थी का फोटो बदलकर अपना फोटो लगाकर दिया था।
पूछताछ में विश्वजीत ने कबूला कि इससे पहले भी बिहार में दो बार इसी तरह की परीक्षा दे चुका हूं। थानाध्यक्ष मिर्जा रिजवान बेग ने बताया कि चार अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीम गठित की जा रही है।