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भारतीय भाषाएं आ रहीं करीब, हिंदी बन रही है वैश्विक भाषा
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इंदिरा गांधी जनजातीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी ने कहा कि कोरोनाकाल में भाषा का भावनात्मक और संवेदनात्मक पक्ष उभर कर सामने आया है। भाषा ही वह माध्यम है जिसके द्वारा साहित्य का सृजन होता है, साहित्य से समाज, संसार और हम सभी व्यक्त होते हैं, सभी भारतीय भाषाएं एक दूसरे के करीब आ रही हैं एवं हिंदी धीरे-धीरे वैश्विक भाषा बन रही है।
वह बुधवार को पं. विद्यानिवास मिश्र की जयंती के अवसर पर विद्याश्री न्यास एवं लाल बहादुर शास्त्री पीजी कॉलेज चंदौली के संयुक्त तत्वावधान में प्रमुख भारतीय भाषाएं समकालीन प्रवृत्तियां विषय पर केंद्रित वेबिनार को संबोधित कर रहे थे। विशिष्ट अतिथि प्रो. कुमुद शर्मा ने कहा कि विभिन्न भारतीय भाषा के सर्जकों में मनुष्य को बचा लेने की एक सर्वव्यापी जिद दिखाई देती है।
अध्यक्षता करते हुए उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. सदानंद गुप्ता ने कहा कि भारतीय भाषाओं की मूल चेतना एक है, कर्मफल और पुनर्जन्म का सिद्धांत भारतीय साहित्य की अद्भुत विशेषता है। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि ने पं. विद्यानिवास मिश्र के चित्र पर माल्यार्पण, दीप प्रज्ज्वलन और मंगलाचरण से हुआ। इस दौरान डॉ. दयानिधि मिश्र, प्रो. श्रद्धानंद, प्रो. स्वर्णप्रभा चौनारी, डॉ. गोमा देवी शर्मा, प्रो. ह. सुबदनी देवी, प्रो. दमयंती बेसरा, डॉ. अनुराधा राय, प्रतीक त्रिपाठी एवं शशिशेखर आदि रहे।
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वह बुधवार को पं. विद्यानिवास मिश्र की जयंती के अवसर पर विद्याश्री न्यास एवं लाल बहादुर शास्त्री पीजी कॉलेज चंदौली के संयुक्त तत्वावधान में प्रमुख भारतीय भाषाएं समकालीन प्रवृत्तियां विषय पर केंद्रित वेबिनार को संबोधित कर रहे थे। विशिष्ट अतिथि प्रो. कुमुद शर्मा ने कहा कि विभिन्न भारतीय भाषा के सर्जकों में मनुष्य को बचा लेने की एक सर्वव्यापी जिद दिखाई देती है।
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अध्यक्षता करते हुए उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. सदानंद गुप्ता ने कहा कि भारतीय भाषाओं की मूल चेतना एक है, कर्मफल और पुनर्जन्म का सिद्धांत भारतीय साहित्य की अद्भुत विशेषता है। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि ने पं. विद्यानिवास मिश्र के चित्र पर माल्यार्पण, दीप प्रज्ज्वलन और मंगलाचरण से हुआ। इस दौरान डॉ. दयानिधि मिश्र, प्रो. श्रद्धानंद, प्रो. स्वर्णप्रभा चौनारी, डॉ. गोमा देवी शर्मा, प्रो. ह. सुबदनी देवी, प्रो. दमयंती बेसरा, डॉ. अनुराधा राय, प्रतीक त्रिपाठी एवं शशिशेखर आदि रहे।
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