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Varanasi News: भारतीय ज्ञान परंपरा में है संप्रेषण का प्रभावी तरीका
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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में पत्रकारिता विभाग और संस्थान की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य अतिथि पद्मभूषण प्रो. देवी प्रसाद द्विवेदी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में संप्रेषण का प्रभावी तरीका देखने को मिलता है। इस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
प्रो. वासुदेव सिंह स्मृति न्यास के सहयोग से केंद्रीय पुस्तकालय के समिति कक्ष में आयोजित संगोष्ठी में प्रो. देवी प्रसाद द्विवेदी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा हमें बोध करता है कि हमें किस ओर चलना चाहिए। इसमें यह भी बताया गया है कि हमेशा सत्य बोलना चाहिए। अब लोगों में किताब की जगह इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने ले लिया है। ऐसे में हमें किताबों को अपनी परंपरा में शामिल करना चाहिए। अध्यक्षता करते हुए जय प्रकाश नारायण विश्वविद्यालय, छपरा बिहार के पूर्व कुलपति प्रो. हरिकेश सिंह ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा का मूल आधार समग्रता है। साहित्य और ज्ञान परंपरा के क्षेत्र में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। काशी विद्यापीठ के डॉ. अमरीश राय ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा एक सतत प्रवाह है इसलिए हमारी परंपरा सनातनी है। बीएचयू हिंदी विभाग प्रो. प्रभाकर सिंह ने बताया कि हमें सामाजिक वह साहित्यिक को जानना चाहिए। यूपी कॉलेज हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. राम सुधार सिंह ने कहा कि पराड़कर जी ने भारतीय ज्ञान परंपरा में सामाजिक वह सांस्कृतिक विषय को रेखांकित किया है। इस दौरान यूजीसी केयर लिस्टेड शोध पत्रिका नमन का लोकार्पण हुआ। स्वागत पत्रकारिता संस्थान के निदेशक डॉ. नागेंद्र कुमार सिंह और संचालन डॉ. राहुल अवस्थी व डॉ. चन्द्रशील पांडेय ने किया। धन्यवाद ज्ञापन सुधांशु शेखर सिंह व डॉ. मनोहर लाल ने किया। कार्यक्रम में प्रो. श्रद्धा सिंह, प्रो. जंग बहादुर पाण्डेय, डॉ. जयदेव सिंह, डॉ. बृजेन्द्र पांडेय आदि मौजूद रहे।
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प्रो. वासुदेव सिंह स्मृति न्यास के सहयोग से केंद्रीय पुस्तकालय के समिति कक्ष में आयोजित संगोष्ठी में प्रो. देवी प्रसाद द्विवेदी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा हमें बोध करता है कि हमें किस ओर चलना चाहिए। इसमें यह भी बताया गया है कि हमेशा सत्य बोलना चाहिए। अब लोगों में किताब की जगह इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने ले लिया है। ऐसे में हमें किताबों को अपनी परंपरा में शामिल करना चाहिए। अध्यक्षता करते हुए जय प्रकाश नारायण विश्वविद्यालय, छपरा बिहार के पूर्व कुलपति प्रो. हरिकेश सिंह ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा का मूल आधार समग्रता है। साहित्य और ज्ञान परंपरा के क्षेत्र में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। काशी विद्यापीठ के डॉ. अमरीश राय ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा एक सतत प्रवाह है इसलिए हमारी परंपरा सनातनी है। बीएचयू हिंदी विभाग प्रो. प्रभाकर सिंह ने बताया कि हमें सामाजिक वह साहित्यिक को जानना चाहिए। यूपी कॉलेज हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. राम सुधार सिंह ने कहा कि पराड़कर जी ने भारतीय ज्ञान परंपरा में सामाजिक वह सांस्कृतिक विषय को रेखांकित किया है। इस दौरान यूजीसी केयर लिस्टेड शोध पत्रिका नमन का लोकार्पण हुआ। स्वागत पत्रकारिता संस्थान के निदेशक डॉ. नागेंद्र कुमार सिंह और संचालन डॉ. राहुल अवस्थी व डॉ. चन्द्रशील पांडेय ने किया। धन्यवाद ज्ञापन सुधांशु शेखर सिंह व डॉ. मनोहर लाल ने किया। कार्यक्रम में प्रो. श्रद्धा सिंह, प्रो. जंग बहादुर पाण्डेय, डॉ. जयदेव सिंह, डॉ. बृजेन्द्र पांडेय आदि मौजूद रहे।
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