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Varanasi News: विदेशी साइबर अपराधियों को किराए पर थे भारतीय बैंक खाते, 5 गिरफ्तार

Thu, 30 Jul 2026 12:56 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 30 Jul 2026 12:56 AM IST
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Indian bank accounts were being rented out to foreign cybercriminals arrested.Indian bank accounts were being rented out to foreign cybercriminals; 5 arrested.
अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का भंडाफोड़, पांच आरोपी गिरफ्तार
अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़, थार और 43 डेबिट कार्ड और 18 मोबाइल बरामद
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माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का साइबर क्राइम थाना ने बुधवार को भंडाफोड़ किया। गिरोह के पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। यह गिरोह विदेशी साइबर अपराधियों को किराए पर बैंक खाते उपलब्ध कराता था। आरोपियों के पास से आईफोन समेत 18 मोबाइल, 43 डेबिट कार्ड, तीन लैपटॉप और थार समेत दो लग्जरी गाड़ियां बरामद की गई हैं। डीसीपी क्राइम नीतू ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में मूलरूप से मिर्जापुर, चुनार के रामगढ़ निवासी आदर्श चौबे, आजमगढ़ के बिलरियागंज थाना क्षेत्र के तोफापुर बिंदवल निवासी आशीष यादव, मुजफ्फरनगर के जनसठ थाना क्षेत्र के कवाल निवासी सुजल सिंह, मऊ घोषी के भीखमपुर निवासी पियूष सिंह और लंका थाना क्षेत्र के गांधीनगर निवासी युवराज शर्मा हैं। सभी वर्तमान में सुंदरपुर के वरुणा इंक्वलेव और गणपति इंक्वलेव में रहते थे। सुंदरपुर से ही आरोपियों की गिरफ्तारी हुई। यह गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को पैसे का लालच देता था। उनके नाम पर विभिन्न बैंकों में खाते खुलवाए जाते थे। इसके बाद डेबिट कार्ड, पासबुक, चेकबुक, सिम कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग पहचान पत्र का पूरा नियंत्रण खुद ले लेते थे। ये बैंक खाते देश-विदेश के अन्य साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराए जाते थे। ट्रांजेक्शन एपीके फाइल विदेशी साइबर अपराधियों से लेकर खातों में लिंक मोबाइल नंबर वाले डिवाइस इंस्टाल कराकर और अन्य तकनीकी माध्यमों से बैंक खाताें पर रिमोट एक्सेस देकर साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि खातों में मंगाते थे। बाद में उसे विभिन्न स्तरों पर अन्य बैंक खातों में स्थानांतरित कर साइबर ठगी की जाती है। साइबर क्राइम विनय द्विवेदी ने बताया कि आरोपियों को साइबर ठगी से मिली राशि पर 8 से 15 फीसदी तक कमीशन मिलता था। इसी अवैध कमाई से आरोपियों ने महंगी गाड़ियां खरीदी थीं। इनमें महिंद्रा थार और हुंडई आई-20 जैसी गाड़ियां शामिल हैं। मासिक किस्त भी इसी अवैध धन से भरते थे। यह दर्शाता है कि गिरोह ने ठगी से काफी संपत्ति अर्जित की थी। आरोपियों से तीन लैपटॉप, 43 डेबिट कार्ड, 12 पासबुक, 10 चेकबुक, 11 क्यूआर कोड और 12 सिम कार्ड भी मिले हैं। गिरोह के सदस्यों के पास से 12060 रुपये नकद भी मिले हैं।
पुलिस की आमजन को सलाह
साइबर क्राइम प्रभारी उदयवीर सिंह ने शहरवासियों को सतर्क किया कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर पैसे के लालच में बैंक खाता, डेबिट-क्रेडिट कार्ड, पासबुक या सिम कार्ड किराए पर न दें। ऐसा करना आपको अपराध का भागीदार बना सकता है। मोबाइल में किसी भी अनजान स्रोत से एप्लीकेशन पैकेज या कोई ऐसे लिंक पर क्लिक न करें। साइबर ठगी होने पर राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें। इसके अलावा, www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।
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चीन, ताइवान समेत खाड़ी देशों में बैठे हैं सरगना
भारतीय बैंक खातों को किराए पर देना एक गंभीर वित्तीय अपराध है, जिसके तहत चीनी, ताइवानी और अन्य विदेशी साइबर अपराधी भारतीय नागरिकों के खातों का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और साइबर धोखाधड़ी के पैसे छिपाने के लिए कर रहे हैं। इन खातों को तकनीकी भाषा में ''''म्यूल अकाउंट'''' कहा जाता है।
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ऐसे काम करता है गिरोह
जालसाज स्थानीय लोगों, छात्रों या कम आय वाले लोगों को कुछ हजार रुपये प्रतिदिन या निश्चित कमीशन (जैसे 10000 या 2 प्रतिशत) का लालच देकर उनके बैंक खाते, यूपीआई और सिम कार्ड किराए पर ले लेते हैं। साइबर ठगी से लूटी गई रकम सबसे पहले इन किराए के भारतीय खातों में डाली जाती है। पैसे आते ही कुछ ही मिनटों में एटीएम निकासी, चेक या डिजिटल ट्रांसफर के जरिए पैसे निकाल लिए जाते हैं। अंत में इस पैसे को अवैध पेमेंट गेटवे, हवाला नेटवर्क या क्रिप्टो करेंसी से चीन, ताइवान या अन्य देशों में बैठे मुख्य सरगनाओं तक पहुंचा दिया जाता है।
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