काशी से बजा था स्वतंत्रता का बिगुल: ...तो 15 अगस्त 1781 को ही आजाद हो गया होता भारत, पढ़ें- पूरी कहानी
काशी में क्रांति की पहली चिंगारी कौंधी थी। राजा चेतसिंह की रणनीतिक चूक ने वॉरेन हेस्टिंग्स की जान बख्श दी। हेस्टिंग महिला वेश में पालकी से भागा था।
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क्रांति की पहली चिंगारी काशी में कौंधी थी। अंग्रेजों को सबसे पहले करारी शिकस्त काशी के लोगों ने दी थी। राजा चेतसिंह की रणनीतिक चूक ने हेस्टिंग्स की जान बख्श दी और वह महिला वेश में पालकी से भागा था। अगर काशी का विद्रोह सफल हो गया होता तो देश 243 साल पहले 15 अगस्त 1781 को ही आजाद हो गया होता। देश के पहले स्वतंत्रता संग्राम के हीरो राजा चेतसिंह को देश ने वह सम्मान दिया जिसके वह हकदार थे।
243 साल पहले शिवाला में अंग्रेजों को सबसे पहला विद्रोह झेलना पड़ा था। कई अंग्रेज अधिकारी मारे गए थे। शिवाला क्षेत्र में दफन अंग्रेजों की कब्रें उस ऐतिहासिक विद्रोह और काशीवासियों की वीरता की कहानी खुद सुनाती हैं।
वॉरेन हेंस्टिंग्स ने स्वयं अपनी आत्मकथा में लिखा है कि यदि उस दिन चेतसिंह रामनगर ना जाकर स्वामी बाग (वर्तमान स्वामी बाग कबीरचौरा अस्पताल के पूरब) के बगीचे पर हमला बोल देते तो मैं जरूर मारा जाता और चारों तरफ बगावत फैल जाती।
बनारस बार के पूर्व महामंत्री नित्यानंद राय बताते हैं कि यह ऐतिहासिक घटना 15 अगस्त 1781 के आसपास हुई थी। 15 अगस्त 1781 को वाॅरेन हेस्टिंग्स बनारस पहुंच गया। उसने स्वामी बाग (वर्तमान कबीरचौरा अस्पताल) में कैंप किया। उसने राजा चेतसिंह को पत्र लिखकर पांच लाख रुपये और दो हजार सवारों की मांग की। राजा के इन्कार करने पर हेस्टिंग्स आपे से बाहर हो गया और रेजिडेंट मार्कहम को शिवाला घाट स्थित चेतसिंह के महल में जाकर कैद करने का आदेश दे दिया।
राजा के गिरफ्तार होने की खबर शहर में आग की तरह फैल गई। लोगों ने शिवाला घाट का महल घेर लिया। रामनगर से हथियारबंद सैनिक भी पहुंच गए। शहर में बलवा होने लगा। अंग्रेज और उनके साथी पीटे जाने लगे। स्टाकर, स्काट, साइक्स जैसे अंग्रेज अधिकारी मारे गए। लेफ्टिनेंट बिरेल भी मारा गया।
शिवाला घाट की लड़ाई में अंग्रेजी फौज को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। 82 सैनिक मारे गए थे और 93 घायल हुए थे।हेस्टिंग्स को महिला वेश में पालकी से भागना पड़ा था। हेस्टिंग्स ने स्वयं लिखा कि यदि उस दिन चेतसिंह रामनगर न जाकर, माधोदास के बगीचे पर हमला बोल देते तो मैं जरूर मारा जाता। स्पष्ट है हेस्टिंग्स के मरते ही अंग्रेजों के हौसले पस्त हो जाते, अंग्रेजों के पांव जमने से पहले ही उखड़ जाते और देश आजाद हो जाता।