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25 साल बाद दुनिया की नंबर वन इकोनॉमी होगा भारत : धर्मेंद्र प्रधान
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- केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने टेक्नोक्रेट्स से किया आह्वान, जॉब सीकर नहीं जॉब क्रिएटर बनें
- देश को आठ ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने में प्रौद्योगिकी शिक्षा है महत्वपूर्ण
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि आज भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। आज हम दुनिया की पांचवीं अर्थव्यवस्था हैं और आने वाले 25 साल में नंबर वन पर होंगे और ये नियति ने हमारे भाग्य में लिख दिया है। आने वाले समय में हमें अपनी अर्थव्यवस्था को आठ ट्रिलियन तक पहुंचाना है और इसमें प्रौद्योगिकी और तकनीकी शिक्षा महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगी।
सोमवार को आईआईटी बीएचयू के दीक्षांत समारोह में मेधावियों को उपाधि देने के साथ ही शिक्षा मंत्री ने कहा कि आज मैं आपसे वचन लेने आया हूं। आज जैसी मेधा देश की मजबूती के आधारस्तंभ है। छात्रों से सवाल किया कि आप जॉब सीकर बनेंगे या जॉब क्रिएटर? आज चुनौती इसी बात की है। आने वाले 25 साल में भारत आजादी के एक सौ साल पूरा करेगा। उस वक्त भारत दुनिया का सबसे युवा देश भी रहेगा। उस वक्त तक हमें जॉब सीकर नहीं बल्कि जॉब क्रिएटर बनना होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू होने के बाद जो पहला बैच निकला है वह आप हैं। इसकी मैं आपको बधाई देता हूं।
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दुनिया के ग्लोबल ब्रांड बन चुके हैं भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि रिन्युएबल, सस्टेनेबल और न्यू एनर्जी, पूरी दुनिया को इसकी अपेक्षा भारत से ही है। इसमें आईआईटी बीएचयू महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। देश के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दुनिया के ग्लोबल ब्रांड बन चुके हैं। आप उस ब्रांड के स्टेकहोल्डर भी हो चुके हैं। पांच सदी की समीक्षा करते हैं तो पहली औद्योगिक क्रांति हुई थी तो भारत पराधीन था। हमारी कोई पहचान नहीं थी। आज चौथे औद्योगिक क्रांति के समय यह अवसर है जब भारत में दुनिया का नेतृत्व करने की क्षमता है। आईआईटी बीएचयू इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मैं इसी आशा से आपके पास आया हूं। देश में 50 रिसर्च पार्क बनने हैं। इनमें एक का उद्घाटन आज आईआईटी बीएचयू में सेंटेनरी रिसर्च पार्क के तौर पर हो रहा है।
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आपकी जिंदगी स्व के लिए नहीं समूह के लिए
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने छात्रों से आह्वान किया कि आपकी जिंदगी स्व के लिए नहीं, समूह के लिए है। भारत में वसुधैव कुटुंबकम की मान्यता है इसलिए आप विश्व कल्याण के द्योतक बनिये। दुनिया आपकी क्षमता का लोहा मानती है। आज आवश्यकता है नए द्रोणाचार्य, कृपाचार्य और भीष्मपितामह की। दुनिया के अंदर काशी सर्वोत्तम स्थान है जो विश्व की आवश्यकता को पूर्ण कर सकती है। यह केवल गोल्ड मेडल या डिग्री नहीं है। आप कुछ लाख के पैकेज तक सीमित मत रहिए।
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अमेरिका, चीन और यूरोप से ज्यादा डिजिटल पेमेंट भारत में
धर्मेंद्र प्रधान ने काशी के साथ-साथ देश में डिजिटल विकास की महत्ता को दर्शाते हुए एक दृष्टांत साझा किया। उन्होंने कहा कि एक साल पहले काशी की प्रसिद्ध चाची की कचौड़ी मंगाकर खाई। अमरूद खाया, फिर चौराहे पर पान भी खाया। तीनों जगह मैंने डिजिटल पेमेंट किया। ये बात कहते हुए मुझे अत्यंत गौरव का भान हो रहा है कि आज अमेरिका, चीन और यूरोप से ज्यादा भारत में डिजिटल पेमेंट होता है।
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काशी की कसौटी पर खरा उतरने वाला ही कहलाता है बनारसी
काशी की कसौटी पर जो खरा उतरता है, वह सोना कहीं का भी हो बनारसी ही कहलाता है। आप सौभाग्यशाली हैं। इस शहर में रानी लक्ष्मीबाई, पं. रविशंकर, गोस्वामी तुलसीदास, संत कबीरदास, मुंशी प्रेमचंद, संत रविदास से आप कतई कम नहीं हैं। आपकी जिंदगी का इस शहर से जो रिश्ता बना है वह सौभाग्य से बना है।
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- देश को आठ ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने में प्रौद्योगिकी शिक्षा है महत्वपूर्ण
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि आज भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। आज हम दुनिया की पांचवीं अर्थव्यवस्था हैं और आने वाले 25 साल में नंबर वन पर होंगे और ये नियति ने हमारे भाग्य में लिख दिया है। आने वाले समय में हमें अपनी अर्थव्यवस्था को आठ ट्रिलियन तक पहुंचाना है और इसमें प्रौद्योगिकी और तकनीकी शिक्षा महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगी।
सोमवार को आईआईटी बीएचयू के दीक्षांत समारोह में मेधावियों को उपाधि देने के साथ ही शिक्षा मंत्री ने कहा कि आज मैं आपसे वचन लेने आया हूं। आज जैसी मेधा देश की मजबूती के आधारस्तंभ है। छात्रों से सवाल किया कि आप जॉब सीकर बनेंगे या जॉब क्रिएटर? आज चुनौती इसी बात की है। आने वाले 25 साल में भारत आजादी के एक सौ साल पूरा करेगा। उस वक्त भारत दुनिया का सबसे युवा देश भी रहेगा। उस वक्त तक हमें जॉब सीकर नहीं बल्कि जॉब क्रिएटर बनना होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू होने के बाद जो पहला बैच निकला है वह आप हैं। इसकी मैं आपको बधाई देता हूं।
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दुनिया के ग्लोबल ब्रांड बन चुके हैं भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि रिन्युएबल, सस्टेनेबल और न्यू एनर्जी, पूरी दुनिया को इसकी अपेक्षा भारत से ही है। इसमें आईआईटी बीएचयू महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। देश के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दुनिया के ग्लोबल ब्रांड बन चुके हैं। आप उस ब्रांड के स्टेकहोल्डर भी हो चुके हैं। पांच सदी की समीक्षा करते हैं तो पहली औद्योगिक क्रांति हुई थी तो भारत पराधीन था। हमारी कोई पहचान नहीं थी। आज चौथे औद्योगिक क्रांति के समय यह अवसर है जब भारत में दुनिया का नेतृत्व करने की क्षमता है। आईआईटी बीएचयू इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मैं इसी आशा से आपके पास आया हूं। देश में 50 रिसर्च पार्क बनने हैं। इनमें एक का उद्घाटन आज आईआईटी बीएचयू में सेंटेनरी रिसर्च पार्क के तौर पर हो रहा है।
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आपकी जिंदगी स्व के लिए नहीं समूह के लिए
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने छात्रों से आह्वान किया कि आपकी जिंदगी स्व के लिए नहीं, समूह के लिए है। भारत में वसुधैव कुटुंबकम की मान्यता है इसलिए आप विश्व कल्याण के द्योतक बनिये। दुनिया आपकी क्षमता का लोहा मानती है। आज आवश्यकता है नए द्रोणाचार्य, कृपाचार्य और भीष्मपितामह की। दुनिया के अंदर काशी सर्वोत्तम स्थान है जो विश्व की आवश्यकता को पूर्ण कर सकती है। यह केवल गोल्ड मेडल या डिग्री नहीं है। आप कुछ लाख के पैकेज तक सीमित मत रहिए।
अमेरिका, चीन और यूरोप से ज्यादा डिजिटल पेमेंट भारत में
धर्मेंद्र प्रधान ने काशी के साथ-साथ देश में डिजिटल विकास की महत्ता को दर्शाते हुए एक दृष्टांत साझा किया। उन्होंने कहा कि एक साल पहले काशी की प्रसिद्ध चाची की कचौड़ी मंगाकर खाई। अमरूद खाया, फिर चौराहे पर पान भी खाया। तीनों जगह मैंने डिजिटल पेमेंट किया। ये बात कहते हुए मुझे अत्यंत गौरव का भान हो रहा है कि आज अमेरिका, चीन और यूरोप से ज्यादा भारत में डिजिटल पेमेंट होता है।
काशी की कसौटी पर खरा उतरने वाला ही कहलाता है बनारसी
काशी की कसौटी पर जो खरा उतरता है, वह सोना कहीं का भी हो बनारसी ही कहलाता है। आप सौभाग्यशाली हैं। इस शहर में रानी लक्ष्मीबाई, पं. रविशंकर, गोस्वामी तुलसीदास, संत कबीरदास, मुंशी प्रेमचंद, संत रविदास से आप कतई कम नहीं हैं। आपकी जिंदगी का इस शहर से जो रिश्ता बना है वह सौभाग्य से बना है।