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वाराणसी में इंडिया कारपेट एक्सपो का शुभारंभ कल, 58 देशों से आएंगे आयातक
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Mon, 09 Oct 2017 04:36 PM IST
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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में आयोजन
- फोटो : अमर उजाला
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कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) की ओर से वाराणसी के संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में आयोजित चार दिवसीय इंडिया कारपेट एक्सपो का उद्घाटन 10 अक्टूबर केंद्रीय कपड़ा राज्यमंत्री अजय टमटा करेंगे। एक्सपो में 274 कालीन निर्यातक उत्पादों का प्रदर्शन करेंगे।
58 देशों के 353 आयातकों के आने की उम्मीद है। यह जानकारी सीईपीसी के प्रथम उपाध्यक्ष सिद्धनाथ सिंह ने दी है। यह पूछने पर कि गत एक्सपो में 327 के मुकाबले इस बार निर्यातकों की संख्या घटकर 274 क्यों हो गई तो उन्होंने इसका कारण नोटबंदी और जीएसटी बताया।
उन्होंने कहा कि नोटबंदी से हमारा कालीन उद्योग उबर भी नहीं पाया था कि सरकार ने जीएसटी थोप दिया। इसे लागू करने से पहले सरकार को विभिन्न उद्यमी संस्थाओं से विचार-विमर्श करना चाहिए था, जो नहीं किया गया।
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आज स्थिति यह है कि भदोही मिर्जापुर परिक्षेत्र के कालीन उद्यमी सबसे अधिक प्रभावित हैं। एक तो जीएसटी में रिफंड नहीं मिल रहा है। लोगों के लाखों रुपये रिटर्न में फंस गए हैं। स्थानीय अधिकारी सिस्टम में खामी का रोना रो रहे हैं।
यहां के उत्पादक परंपरागत हस्तनिर्मित कालीन बनाने से परहेज कर रहे हैं। इसका लाभ पानीपत समेत दूसरे प्रांतों के मशीनमेड कालीन उत्पादक उठा रहे हैं।
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58 देशों के 353 आयातकों के आने की उम्मीद है। यह जानकारी सीईपीसी के प्रथम उपाध्यक्ष सिद्धनाथ सिंह ने दी है। यह पूछने पर कि गत एक्सपो में 327 के मुकाबले इस बार निर्यातकों की संख्या घटकर 274 क्यों हो गई तो उन्होंने इसका कारण नोटबंदी और जीएसटी बताया।
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उन्होंने कहा कि नोटबंदी से हमारा कालीन उद्योग उबर भी नहीं पाया था कि सरकार ने जीएसटी थोप दिया। इसे लागू करने से पहले सरकार को विभिन्न उद्यमी संस्थाओं से विचार-विमर्श करना चाहिए था, जो नहीं किया गया।
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आज स्थिति यह है कि भदोही मिर्जापुर परिक्षेत्र के कालीन उद्यमी सबसे अधिक प्रभावित हैं। एक तो जीएसटी में रिफंड नहीं मिल रहा है। लोगों के लाखों रुपये रिटर्न में फंस गए हैं। स्थानीय अधिकारी सिस्टम में खामी का रोना रो रहे हैं।
यहां के उत्पादक परंपरागत हस्तनिर्मित कालीन बनाने से परहेज कर रहे हैं। इसका लाभ पानीपत समेत दूसरे प्रांतों के मशीनमेड कालीन उत्पादक उठा रहे हैं।