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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Independence day : Such was the passion that went to prison in 14 years

जुनून ऐसा था कि 14 साल में जेल चला गया

Tue, 09 Aug 2016 02:14 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी Updated Tue, 09 Aug 2016 02:14 AM IST
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Independence day  :  Such was the passion that went to prison in 14 years
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी
देश को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद कराने का ऐसा जुनून था कि मैं14 साल की उम्र में जेल गया। वाराणसी सेंट्रल जेल में बंद था। जेल में ही मेरी राजनारायण से मुलाकात हुई। जेल से निकला तो घर छोड़कर आजादी के मतवालों की टोली में शामिल हो गया। एक बार जेल जाने के बाद अंग्रेजों की काली सूची में नाम जुड़ गया था। बाद में छोटी-छोटी घटनाओं पर भी पुलिस घर पहुंच जाती थी। यह दास्तां सुनाई शहंशाहपुर गांव के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रामकृष्ण सिंह ने। कहते हैं, 70 साल में बहुुत कुछ बदल गया। अब न तो पहले जैसे नेता हैं और न ही राजनीतिक कार्यकर्ता रह गए हैं। यही वजह है कि देश वैसी तरक्की नहीं कर सका, जैसी करनी चाहिए थी।
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 90 साल के इस बुजुर्ग से जब जंग-ए-आजादी की चर्चा होती है तो उनकी आंखों में चमक बिखर जाती है। बताते हैं कि जब गांव के स्कूल में नौवीं मेें पढ़ रहे थे, पहली दफा जेल गए थे। उन्हें अंग्रेजी हुकूमत का विरोध करने की सजा मिली थी। बताया कि गांव के बुजुर्गों से अंग्रेजों की प्रताड़ना और महात्मा गांधी के बारे में सुनते थे। बचपन से ही राष्ट्रपिता से प्रभावित था। नेताजी सुभाष चंद्र बोस से कभी मिला तो नहीं मगर उनकी वजह से जंग-ए-आजादी में जुटने की प्रेरण जरूर मिली। 
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मौजूदा दौर की चर्चा चली तो रामकृष्ण का दर्द छलक गया। बोले, आज के राजनीतिज्ञों की भाषा से मर्माहत हूं। राजनेताओं को तो संस्कारवान होना चाहिए। मृदुभाषी होना चाहिए। वह विधानसभा और लोकसभा में बैठते हैं, उन्हें मर्यादित बोल बोलने चाहिए। पुराने दिनों की यादों को साझा करते हुए रामकृष्ण ने बताया कि युवावस्था में शराब के खिलाफ उन्होंने जागरूकता अभियान चलाया था।
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 बता दें कि आराजी लाइन विकास खंड का शहंशाहपुर ही एक  ऐसा गांव है, जहां दो स्वतंत्रता सेनानी जीवित हैं। गांव के ही स्वतंत्रता सेनानी हबीबुल्ला खान बीमार हैं। बोलने की स्थिति में नहीं हैं लेकिन आजादी के संस्मरण के बारे में पूछने पर उनके चेहरे पर झलकने वाले भाव बता देते हैं कि उन्हें अंग्रेजों से आजाद होने की खुशी है।
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