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संत कबीर के विचार पूरी दुनिया में प्रासंगिक
वाराण्ासी, ब्यूरो
Updated Wed, 03 Jun 2015 02:06 AM IST
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वाराणसी। ‘जो घर जारै आपना चले हमारे साथ...।’ फक्कड़ संत कबीर के दरवाजे पर माया, मोह, अहंकार का घर फूंकने का हुनर सीखने के लिए देश के कोने-कोने से लोग जुटे। कबीर के 617 वें प्राकट्य महोत्सव पर कबीरचौरा मूलगादी मठ में मंगलवार को सुबह से शाम तक आस्था का रेला लगा रहा।
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गायक कबीर की साखियों और पदों के जरिए संत की वाणी सुनाते रहे तो विद्वतजन उनके वचनों की व्याख्या पेश करने में लगे रहे। मूलगादी पीठाधीश्वर संत विवेकदास आचार्य ने कहा कि साईं बाबा तक ने दावा किया है कि वे कबीर के अवतार हैं।
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कबीर ही ऐसे संत हैं, जिनके अवतार होने का दावा बाद के सौ से ज्यादा संत करते रहे हैं। यह पूरी दुनिया में संत कबीर की लोकप्रियता और प्रासंगिकता का प्रमाण है। इस दौरान संत विवेक दास की पुस्तक ‘स्वाधीनता संघर्ष में कबीर मठ का योगदान’ का विमोचन किया गया।
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जहां कभी जुलाहा दंपती नीरू-नीमा ने कबीर का पालन किया था, वह जगह आज कबीरचौरा मूलगादी मठ है। कबीर को मानने वालों के लिए मुकद्दस जमीन। संत साहेब की जयंती पर यहां देश के कोने-कोने से संतों, श्रद्धालुओं, गायकों और बुद्धिजीवियों का रेला उमड़ा। रामप्रसाद दास ने खंजड़ी बजाकर ‘तोरा हीरा हेराय गइल कचरे में’ गाना शुरू किया तो सबको अपनी आत्मा के स्वरूप का सहज ही ध्यान हो आया।
बुद्धिजीवियों ने यही काम संत की वाणी की व्याख्या के जरिए किया। बीएचयू हिंदी विभाग के प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल ने कहा कि ‘जो घर जारै अपना में’ कहते समय कबीर की मुराद घास-फूस, काठ और कबाड़ जलाने से नहीं बल्कि मोह, अहंकार और माया को फूंकने से है।
जो इन सबको जला देगा वही कबीर की मुक्ति चेतना का सहचर बन पाएगा। बतौर मुख्य अतिथि बिहार के खनन मंत्री रामलखन राम रमन ने बताया कि बिहार में कबीर की जयंती पर अवकाश घोषित कर दिया गया है। आने वाले वर्षों में संत का प्राकट्य दिवस वहां उत्सव का रूप लेगा।
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के प्रो. सुरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि जिस संत की वाणी का अनुवाद करने की जरूरत गुरु रवींद्रनाथ टैगोर ने समझी हो उसकी प्रासंगिकता का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। इस मौके पर प्रो. श्रद्धानंद, विजय शंकर पांडेय समेत तमाम लोगों ने विचार व्यक्त किए।
संचालन ब्योमेश शुक्ल ने किया। उधर चौबेपुर के उमरहां स्थित स्वर्वेद मंदिर में हजारों की तादात में कबीर पंथियों का जमावड़ा लगा रहा। संत विज्ञान देव महाराज ने भक्तों को गुरु के बताए मार्ग पर चलने की सीख दी।