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पीएम के आदर्श गांव में प्रधान चुनने को लगी कतार
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Thu, 10 Dec 2015 02:15 AM IST
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पंचायत चुनाव के चौथे और अंतिम चरण में दो ब्लॉकों काशी विद्यापीठ और आराजीलाइन की कुल 210 ग्राम पंचायतों में मतदान हुआ। सुबह घने कोहरे की वजह से ग्रामीण इलाकों के बूथों पर मतदाताओं की संख्या कम दिखी मगर जैसे-जैसे दिन चढ़ा वोटरों की कतार बढ़ती गई।
आराजीलाइन ब्लॉक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदर्श गांव जयापुर के मतदाताओं में मतदान को लेकर जबर्दस्त उत्साह दिखा। कोहरे के बावजूद सुबह से ही बूथों पर कतार लगी रही। दोपहर डेढ़ बजे तक लगभग 60 फीसदी वोटर अपने मताधिकार का प्रयोग कर चुके थे जबकि मतदान खत्म होने तक 75 फीसदी से अधिक वोट पड़ चुके थे।
जयापुर में भी अन्य गांवों की तरह सड़क, बिजली और पानी ही चुनावी मुद्दा रहा। यहां से तीन प्रत्याशी प्रधान पद के दावेदार रहे और तीनों के ही पोस्टर में पीएम मोदी की फोटो रही। चुनाव में विकास के मुद्दे के साथ मोदी की छवि को प्रत्याशियों ने भुनाने में कोई कसर नहीं रखी।
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इस गांव के एक प्रत्याशी नारायण पटेल की भाभी दुर्गावती देवी पहले से इस गांव की ग्राम प्रधान हैं और इन्हें ग्राम प्रधान का प्रतिनिधि भी कहा जाता है। वहीं दूसरी तरफ राजकुमार यादव भी प्रधानी पद के लिए खम ठोक रहे हैं। तीसरे प्रेमशंकर सिंह ने तो मोदी के ‘सबका साथ-सबका विकास’ के नारे को ही अपना लिया था। कुल मिलाकर यहां त्रिकोणीय संघर्ष नजर आया।
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आराजीलाइन ब्लॉक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदर्श गांव जयापुर के मतदाताओं में मतदान को लेकर जबर्दस्त उत्साह दिखा। कोहरे के बावजूद सुबह से ही बूथों पर कतार लगी रही। दोपहर डेढ़ बजे तक लगभग 60 फीसदी वोटर अपने मताधिकार का प्रयोग कर चुके थे जबकि मतदान खत्म होने तक 75 फीसदी से अधिक वोट पड़ चुके थे।
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जयापुर में भी अन्य गांवों की तरह सड़क, बिजली और पानी ही चुनावी मुद्दा रहा। यहां से तीन प्रत्याशी प्रधान पद के दावेदार रहे और तीनों के ही पोस्टर में पीएम मोदी की फोटो रही। चुनाव में विकास के मुद्दे के साथ मोदी की छवि को प्रत्याशियों ने भुनाने में कोई कसर नहीं रखी।
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इस गांव के एक प्रत्याशी नारायण पटेल की भाभी दुर्गावती देवी पहले से इस गांव की ग्राम प्रधान हैं और इन्हें ग्राम प्रधान का प्रतिनिधि भी कहा जाता है। वहीं दूसरी तरफ राजकुमार यादव भी प्रधानी पद के लिए खम ठोक रहे हैं। तीसरे प्रेमशंकर सिंह ने तो मोदी के ‘सबका साथ-सबका विकास’ के नारे को ही अपना लिया था। कुल मिलाकर यहां त्रिकोणीय संघर्ष नजर आया।