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कम समय में तैयार होंगे उन्नत किस्म के धान के बीज
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वाराणसी। अब उन्नत किस्म के धान के बीज कम समय में तैयार होंगे। अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (इरी) के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र चांदपुर में बन रहे स्पीड ब्रीडिंग फैसिलिटी सेंटर में बीजों के शोध में आसानी होगी।
अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (इरी) के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र चांदपुर को धान के बीज को तैयार करने में 12 से 13 साल का समय लग जाता है। वहीं किसानों तक यह बीज 15 साल में पहुंचता है। बनारस में साउथ एशिया का एक मात्र स्पीड ब्रीडिंग फैसिलिटी सेंटर बन जाने से धान के उन्नत किस्म के बीज आठ से 10 साल में ही तैयार होंगे। इसका लाभ भारत के साथ साउथ एशिया के कई देशों को लाभ मिलेगा।
इरी के एक वैज्ञानिक ने बताया कि भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग की मदद से संस्थान में स्पीड ब्रीडिंग फैसिलिटी का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। इसकी लागत सवा तीन करोड़ रुपये है। निर्माण कार्य करीब 80 प्रतिशत तक पूरा हो चुका और अगले डेढ़ माह में बनकर तैयार हो जाएगा। जहां एक साल में चार जनरेशन पर काम करने में मदद मिलेगी। पहले एक जनेरशन पर काम करने में एक साल का वक्त लग जाता था। जिससे एक प्रजाति के धान के बीच तैयार करने और परीक्षण करने में आठ से 10 साल का समय लग जाता था। इसके अलावा भारतीय चावल अनुसंधान में बीज के मौसम के अनुकूल शोध करने में तीन साल का समय लग जाता था। अब स्पीड ब्रीडिंग फैसिलिटी केंद्र में एक प्रजाति के बीज को तैयार होने में तीन से चार साल की बचत होगी। भारत ही नहीं समेत साउथ एशिया के कई देशों को इसका लाभ मिलेगा।
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कोट-------------
स्पीड ब्रीडिंग फैसिलिटी के निर्माण का कार्य तीन महीनों से चल रहा है जो अगले एक से डेढ़ माह में बनकर तैयार हो जाएगा। जहां धान के उन्नत किस्म के बीजों की प्रजातियों को तैयार करने में 10 से 15 साल का समय लगता था अब उसमें दो से तीन साल की कमी आएगी। -- सुधांशु सिंह, निदेशक, इरी
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अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (इरी) के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र चांदपुर को धान के बीज को तैयार करने में 12 से 13 साल का समय लग जाता है। वहीं किसानों तक यह बीज 15 साल में पहुंचता है। बनारस में साउथ एशिया का एक मात्र स्पीड ब्रीडिंग फैसिलिटी सेंटर बन जाने से धान के उन्नत किस्म के बीज आठ से 10 साल में ही तैयार होंगे। इसका लाभ भारत के साथ साउथ एशिया के कई देशों को लाभ मिलेगा।
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इरी के एक वैज्ञानिक ने बताया कि भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग की मदद से संस्थान में स्पीड ब्रीडिंग फैसिलिटी का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। इसकी लागत सवा तीन करोड़ रुपये है। निर्माण कार्य करीब 80 प्रतिशत तक पूरा हो चुका और अगले डेढ़ माह में बनकर तैयार हो जाएगा। जहां एक साल में चार जनरेशन पर काम करने में मदद मिलेगी। पहले एक जनेरशन पर काम करने में एक साल का वक्त लग जाता था। जिससे एक प्रजाति के धान के बीच तैयार करने और परीक्षण करने में आठ से 10 साल का समय लग जाता था। इसके अलावा भारतीय चावल अनुसंधान में बीज के मौसम के अनुकूल शोध करने में तीन साल का समय लग जाता था। अब स्पीड ब्रीडिंग फैसिलिटी केंद्र में एक प्रजाति के बीज को तैयार होने में तीन से चार साल की बचत होगी। भारत ही नहीं समेत साउथ एशिया के कई देशों को इसका लाभ मिलेगा।
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स्पीड ब्रीडिंग फैसिलिटी के निर्माण का कार्य तीन महीनों से चल रहा है जो अगले एक से डेढ़ माह में बनकर तैयार हो जाएगा। जहां धान के उन्नत किस्म के बीजों की प्रजातियों को तैयार करने में 10 से 15 साल का समय लगता था अब उसमें दो से तीन साल की कमी आएगी। -- सुधांशु सिंह, निदेशक, इरी