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चार राज्यों में लहलहाएगी धान की उन्नत प्रजाति ‘स्वर्ण समृद्धि’
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वाराणसी। बिहार की प्रमुख धान की प्रजाति स्वर्ण समृद्धि देश के चार राज्यों में लहलहाएगी। चांदपुर स्थित अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (इरी) ने यूपी, बिहार, छत्तीसगढ़ और ओडिसा के 559 ऑन फार्म ट्रायल (ओएफटी) 27 प्रजाति के धान के बीजों पर किया था। इसमें स्वर्ण समृद्धि का सबसे अच्छा प्रदर्शन रहा। अब इस प्रजाति को इरी किसानों के खेतों में लगाने की तैयारी में है। वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. कुंतल दास के नेतृत्व में शोध कार्य किया गया।
मौसम के अनुकूल कम संसाधनों में अधिक और गुणवत्ता युक्त धान की फसल के उत्पादन के उद्देश्य से इरी ने पिछले साल चांदपुर सहित बिहार, छत्तीसगढ़ और ओडिसा में 27 प्रजाति के धान के बीजों पर शोध किया था। इसमें बिहार के पर्यावरण के लिए सरस्वती, सबौर हर्षित, सबौर श्री, स्वर्ण समृद्धि, बीआरआरआई-69 का प्रदर्शन आशाजनक रहा। ओडिसा के लिए सीआर धान-210, बीनाधान-17, बीआरआरआई 69, स्वर्ण समृद्धि का बेहतर प्रदर्शन रहा। छत्तीसगढ़ में बीनाधान-17, बीआरआरआई-69, स्वर्ण समृद्धि, एमटीयू-1155 का अच्छा प्रदर्शन देखने को रहा। जबकि उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से के लिए बीआरआरआई-75, सीआर धान 307, स्वर्ण समृद्धि को प्राथमिकता दी गई।
इनसेट------
जल्दी पकने वाली प्रजाति में राजेंद्र सरस्वती और सबौर हर्षित बेहतर
डॉ. कुंतल दास ने बताया कि चार राज्यों में 27 रिलीज प्रजातियों में सीधी बुवाई और जल्दी पकने वाली प्रजाति में राजेंद्र सरस्वती और सबौर हर्षित बेहतर है। वहीं रोपाई के लिए जल्दी पकने वाली और सिंचाई क्षेत्र के लिए बीनाधान-11, सीआर-307, बीआरआरआई-75 को बेहतर माना गया है। सबसे अच्छा प्रदर्शन बिहार की स्वर्ण समृद्धि का रहा, जो 130 से 135 दिनों में पक कर तैयार होने वाली प्रजाति है। इसका उत्पादन पांच से छह टन प्रति हेक्टेयर आंका गया है। डॉ. कुंतल दास ने बताया अब इन चयनित किस्मों को प्रदर्शन के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए आगे बढ़ाया जाएगा। किस्मों को संबंधित और अनुकूलित राज्यों की बीज श्रृंखला में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा।
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मौसम के अनुकूल कम संसाधनों में अधिक और गुणवत्ता युक्त धान की फसल के उत्पादन के उद्देश्य से इरी ने पिछले साल चांदपुर सहित बिहार, छत्तीसगढ़ और ओडिसा में 27 प्रजाति के धान के बीजों पर शोध किया था। इसमें बिहार के पर्यावरण के लिए सरस्वती, सबौर हर्षित, सबौर श्री, स्वर्ण समृद्धि, बीआरआरआई-69 का प्रदर्शन आशाजनक रहा। ओडिसा के लिए सीआर धान-210, बीनाधान-17, बीआरआरआई 69, स्वर्ण समृद्धि का बेहतर प्रदर्शन रहा। छत्तीसगढ़ में बीनाधान-17, बीआरआरआई-69, स्वर्ण समृद्धि, एमटीयू-1155 का अच्छा प्रदर्शन देखने को रहा। जबकि उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से के लिए बीआरआरआई-75, सीआर धान 307, स्वर्ण समृद्धि को प्राथमिकता दी गई।
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जल्दी पकने वाली प्रजाति में राजेंद्र सरस्वती और सबौर हर्षित बेहतर
डॉ. कुंतल दास ने बताया कि चार राज्यों में 27 रिलीज प्रजातियों में सीधी बुवाई और जल्दी पकने वाली प्रजाति में राजेंद्र सरस्वती और सबौर हर्षित बेहतर है। वहीं रोपाई के लिए जल्दी पकने वाली और सिंचाई क्षेत्र के लिए बीनाधान-11, सीआर-307, बीआरआरआई-75 को बेहतर माना गया है। सबसे अच्छा प्रदर्शन बिहार की स्वर्ण समृद्धि का रहा, जो 130 से 135 दिनों में पक कर तैयार होने वाली प्रजाति है। इसका उत्पादन पांच से छह टन प्रति हेक्टेयर आंका गया है। डॉ. कुंतल दास ने बताया अब इन चयनित किस्मों को प्रदर्शन के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए आगे बढ़ाया जाएगा। किस्मों को संबंधित और अनुकूलित राज्यों की बीज श्रृंखला में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा।
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