बारिश का असर: 13 दिन बाद फिर बढ़ने लगा गंगा का जलस्तर, केंद्रीय जल आयोग ने जारी किया पूर्वानुमान; बढ़ी चिंता
बारिश के बाद 13 दिन की गिरावट के बाद गंगा का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने लगा है। केंद्रीय जल आयोग ने जलस्तर में वृद्धि को लेकर पूर्वानुमान जारी किया है। गंगा के बढ़ते पानी को देखते हुए घाट किनारे रहने वाले लोगों और नाविकों की चिंता बढ़ गई है। प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
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करीब 13 दिनों तक लगातार घटने के बाद गंगा के जलस्तर में एक बार फिर शनिवार को तेजी से बढ़ोतरी होने लगी। जलस्तर बढ़ने की रफ्तार पांच सेंटीमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई। इस साल अब तक पहली बार गंगा के जलस्तर में इतनी तेज गति से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 13 सितंबर के बाद आसपास के क्षेत्रों में हुई भारी बारिश और ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से पानी आने के कारण गंगा के जलस्तर में फिर उफान आया है।
केंद्रीय जल आयोग के पूर्वानुमान के अनुसार अगले सात दिनों में गंगा के जलस्तर में करीब 3.96 मीटर तक बढ़ोतरी हो सकती है। इससे घाटों और तटवर्ती इलाकों में एक बार फिर पानी बढ़ने की आशंका है। हालांकि अभी जलस्तर खतरे के निशान से काफी नीचे है, लेकिन बढ़ोतरी की मौजूदा रफ्तार ने प्रशासन और तटवर्ती इलाकों के लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
सितंबर के पहले पखवाड़े में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु के आसपास पहुंच गया था। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार 13 सितंबर को वाराणसी में गंगा का जलस्तर 68.72 मीटर दर्ज किया गया था और उस समय पानी करीब दो सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से घट रहा था। इसके बाद लगातार घटाव जारी रहा।
अब करीब 13 दिन बाद फिर से जलस्तर बढ़ने लगा है। खास बात यह है कि इस बार बढ़ोतरी की गति शुरुआती दौर में ही पांच सेंटीमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई है। पिछले साल सितंबर में गंगा का जलस्तर काफी दिनों तक चेतावनी बिंदु के आसपास बना रहा था। 12 सितंबर 2025 को वाराणसी में जलस्तर 70.83 मीटर था और इसके बाद घटाव शुरू हुआ था।
14 सितंबर 2025 को जलस्तर 70.10 मीटर दर्ज किया गया था। उस समय चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर और खतरे का निशान 71.26 मीटर था। पिछले साल अगस्त और सितंबर में गंगा कई बार चेतावनी बिंदु पार कर चुकी थी। केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार सितंबर में भी जलस्तर में उतार-चढ़ाव का सिलसिला बना रहा था।