फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Imlavti become the enemy of health juices and beverages

सेहत के दुश्मन बन रहे िमलावटी जूस और पेय पदार्थ

Wed, 03 Jun 2015 02:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी Updated Wed, 03 Jun 2015 02:08 AM IST
विज्ञापन
Imlavti become the enemy of health juices and beverages
सेहतमंद बनना है तो सड़क पर बिकने वाला मौसमी, अनार, अनानास, गाजर, चुकंदर, तरबूज, गन्ने आदि का जूस न पीएं। क्योंकि उल्टे ये आपकी सेहत को बिगाड़ सकते हैं। ये हम नहीं बल्कि खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन और डॉक्टर कह रहे हैं। उनके अनुसार गंदे बर्फ और पानी, मक्खियों, एक ही गिलास में कई लोगों को पेय पदार्थ परोसने और उसकी ठीक से सफाई न होने से बीमारियों का खतरा बना  रहता है। बीते महीने शहर की एक दूकान से मैंगो शेक का सैंपल लिया गया था। रिपोर्ट आई तो पता चला कि शेक में आम की जगह पपीता मिलाया गया था। आम के स्वाद के लिए कुछ एसेंस मिलाए गए थे जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक थे। वहीं डॉक्टर लोगों को डिब्बाबंद जूस के फल खाने और घर पर ही जूस निकाल कर उसके सेवन की सलाह दे रहे हैं।
विज्ञापन


अधिक मुनाफे के चक्कर में कहीं मैंगो शेक में आम की जगह पपीते तो कहीं चीनी की जगह सैक्रीन का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। लंका पर जूस बेचने वाले विनोद कुमार ने बताया फलों को पहले से ही छेदकर पानी में भिगो दिया जाता है। इससे फल पानी सोख लेते हैं। इसके बाद ग्राहक के सामने ही फल को छिलकर जूस निकालने पर तीन से चार मौसमी में ही गिलास भर जाता है। वहीं अगर मौसमी को बिना भिगोए हुए जूस निकाला जाए तो छह से सात फल में एक गिलास जूस निकलेगा। अर्दली बाजार में नींबू पानी बेचने वाले सीताराम ने बताया कि चीनी महंगी है। ऐसे में मिठास के लिए सैक्रीन का इस्तेमाल किया जाता है।
विज्ञापन


एक चम्मच सैक्रीन आठ चम्मच चीनी के बराबर मिठास देता है वहीं ये चीनी से काफी सस्ता भी है। सिगरा पर मैंगो शेक बेचने वाले अभिनव ने बताया कि आम 50 से 70 रुपये किलो मिल रहा है। लगन के चलते दूध भी 80 से 90 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। चीनी भी 30 से 40 रुपये किलो तक मिल रही है। इन सब को मिलाकर मैंगो शेक बनाएंगे तो 20 रुपये प्रति गिलास से नीचे बेचना मुश्किल होगा। इस नाते पपीता मिलाते हैं। पपीता 10 से 20 रुपये प्रति किलो मिलता है। पपीते और आम का रंग एक होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


मैंगो एसेंस डालने पर पता करना मुश्किल होता है कि मैंगो शेक में पपीता मिला है या नहीं।  इस बाबत खाद्य सुरक्षा के अभिहित अधिकारी हरिशंकर सिंह का कहना है कि सड़क पर और दूकानों में बिकने वाले जूस की सैंपलिंग कराने के लिए अभियान चलाया जाएगा। पिछले दिनों मैंगो शेक की सैंपलिंग में पपीते की पुष्टि हुई थी। फिलहाल अभी सैक्रीन के बारे में रिपोर्ट नहीं मिली है। इसकी भी जांच कराई जाएगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed