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2012 से दालमंडी में हो रहा था अवैध निर्माण, वीडीए के अफसर काटते रहे मलाई

Thu, 18 Jan 2018 02:15 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Thu, 18 Jan 2018 02:15 PM IST
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illegal construction in dalmandi begain from 2012
आठ हजार वर्ग फीट में बेसमेंट से लेकर एक मंजिल तक हुआ था निर्माण - फोटो : अमर उजाला
वाराणसी के दालमंडी में जिस अवैध निर्माण की जानकारी होने से वीडीए के अफसर इंकार कर रहे हैं, वह कोई नया निर्माण नहीं है बल्कि 2012 से निर्माणाधीन है। उस दौरान जानकारी होने पर वीडीए ने सीलिंग की कार्रवाई केसाथ ही अवैध निर्माण को ध्वस्त करने का आदेश था मगर वीडीए के अफसर छह साल तक मलाई काटते रहे और अधिकारियों-कर्मचारियेां की मिलीभगत से रात में चोरी छिपे निर्माण होता रहा।
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वीडीए और पुलिस की कार्रवाई के दौरान चर्चा यह भी थी कि अधिकारी निर्माण के बदले में धन उगाही करते हैँ और जब उच्चाधिकारियों को पता चलता है तो कार्रवाई शुरू कर दी जाती है। वीडीए के सूत्रों का कहना है कि बिना अनुमति निर्माण की जानकारी होने पर इस भवन को सील कर दिया गया था। सील करने और ध्वस्तीकरण करने के आदेश के बाद भवन स्वामी ने मंडलायुक्त के यहां अपील कर दी।
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तब से पूरा प्रकरण मंडलायुक्त के यहां लंबित है। लेकिन इधर वीडीए के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से छह साल से निर्माण जारी था। वीडीए के अलावा नगर निगम, आवास-विकास के अफसर भी अवैध निर्माण में कोई रुचि नहीं दिखाई।
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चौक थाने और दशाश्वमेध जोन के दालमंडी के अलावा हड़हा, चौक, राजाबाजार, कोदई चौकी का सघन इलाका है जहां अवैध निर्माण अब भी चोरी-छिपे जारी है। निर्माण के एवज में मोटी रकम वसूली जाती है और अफसर से लेकर कर्मचारी तक आंखें मूंद लेते हैं।

मामले में  वीडीए उपाध्यक्ष राजेश कुमार ने कहा कि दालमंडी इलाके में अवैध निर्माण की शिकायत मिलने और कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही उजागर होने पर भवन सील करने के साथ दो कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही तीन अभियंताओं के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को संस्तुति कर दी गई है। अब तक की जांच कार्यालय के अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है। इसमें जो भी दोषी होंगे दंडित किए जाएंगे।

निर्माण के आसपास दो सौ साल तक पुराने जर्जर भवन

illegal construction in dalmandi begain from 2012
दालमंडी में तीन अवैध निर्माण सील, दो सुपरवाइजर सस्पेंड, - फोटो : अमर उजाला
दालमंडी के जिस इलाके में नया निर्माण हुआ है उसके आपसपास करीब दो सौ साल पुराने और जर्जर मकान हैं। चोरी छिपे छह साल से इस सघन इलाके में निर्माण चल रहा था लेकिन वीडीए और पुलिस की नजर अब तक इस पर नहीं पड़ रही थी। संयोग ठीक रहा कि भूमिगत निर्माण के दौरान कोई हादसा नहीं हुआ। नतीजतन दालमंडी का आधे से अधिक इलाका भरभराकर बैठ जाता और शहर में बड़ा हादसा होता।

इतनी सघन आबादी वाले इलाके में वीडीए की अफसरों की मनमानी, लापरवाही और मिलीभगत से निर्माण हो गया। यहां तक उच्चाधिकारियों तक इसके निर्माण की भनक तक नहीं लगी।

दालमंडी सहित आसपास केइलाके में अवैध निर्माण पर कार्रवाई से क्षेत्रीय दुकानदार खुश है। लेकिन उनका कहना है कि ऐसी कार्रवाई वीडीए या प्रशासन तब करता है जब निर्माण आधे से अधिक हो जाता है। ऐसे निर्माणों पर शुरूआती दौर में नकेल कसी जानी चाहिए और समान रूप से कार्रवाई की जानी चाहिए।
दुकानदार इमरान अहमद का कहना है कि वीडीए और पुलिस समय से कार्रवाई करती तो निर्माण नहीं हो पाता।

पहले बनने की छूट दे दी जाती है बाद में दबाव पड़ने पर ढहा दिया जाता है। वहीं मकसूद आलम कहते हैँ कि इतने दिन तक पुलिस और प्रशासन की नींद नहीं खुली थी। यह कार्रवाई पहले होनी चाहिए थी। एमएस अहदम का कहना है कि दालमंडी सहित शहर के सभी सघन बाजारों में इस तरह की कार्रवाई होनी चाहिए जहां अवैध ढंग से निर्माण कराया जा रहा है।
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