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क्लाइमेट चेंज का सोलर एनर्जी पर क्या पड़ रहा असर, दुनिया को बताएगा बीएचयू
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Fri, 28 Apr 2017 09:29 PM IST
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आईआईटी बीएचयू में जल्द स्थापित किया जाएगा सेंटर फॉर क्लाइमेट चेंज
- फोटो : file photo(iit bhu)
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आईआईटी बीएचयू रिन्यूएबल एनर्जी पर पड़ने वाले जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का अध्ययन करेगा। जलवायु परिवर्तन का सौर, वायु, बायो मास, जियो थर्मल, वेव एनर्जी समेत महासागर ऊष्मा पर क्या असर पड़ रहा है, इसका अध्ययन यहां के विशेषज्ञ करेंगे।
साल भर के अध्ययन के बाद इसकी रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र को सौंपी जाएगी। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने इसका जिम्मा आईआईटी बीएचयू को सौंपा है। इसके लिए जल्द आईआईटी बीएचयू में सेंटर फॉर क्लाइमेट चेंज की स्थापना की जाएगी।
जलवायु परिवर्तन आज वैश्विक मुद्दा बन चुका है। यूनाइटेड नेशंस फोरम फॉर क्लाइमेट चेंज इस पर शोध और अध्ययन कर रही है। इसके लिए अब तक दो अध्ययन हो चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र द्वारा अब तीसरा नेशनल कम्यूनिकेशन तैयार किया जा रहा है।
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इस अध्ययन के लिए मंत्रालय ने आईआईटी बीएचयू को चुना है। आईआईटी बीएचयू के सेंटर फॉर रिन्यूएबल एनर्जी के समन्वयक प्रो. एसके शुक्ला ने इस अध्ययन के लिए सेंटर फॉर क्लाइमेट चेंज का प्रस्ताव बनाकर मंत्रालय को भेज दिया है।
प्रो. शुक्ला ने बताया कि रिन्यूएबल एनर्जी पर जलवायु परिवर्तन का क्या असर पड़ रहा है, ये अध्ययन करना है। इस अध्ययन में 2020, 2030, 2050 और 2100 में जलवायु परिवर्तन का क्या असर होगा, इसके पूर्वानुमान पर रिपोर्ट तैयार करनी है।
देश के छह क्लाइमेटिक जोन के अनुसार हमें अध्ययन व शोध करना होगा। इसके लिए हमें देश भर के मौसम विभाग से आंकड़ा एकत्र करना होगा। हमारे रिपोर्ट के अनुसार ही संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए रणनीति तैयार करेगा।
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साल भर के अध्ययन के बाद इसकी रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र को सौंपी जाएगी। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने इसका जिम्मा आईआईटी बीएचयू को सौंपा है। इसके लिए जल्द आईआईटी बीएचयू में सेंटर फॉर क्लाइमेट चेंज की स्थापना की जाएगी।
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जलवायु परिवर्तन आज वैश्विक मुद्दा बन चुका है। यूनाइटेड नेशंस फोरम फॉर क्लाइमेट चेंज इस पर शोध और अध्ययन कर रही है। इसके लिए अब तक दो अध्ययन हो चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र द्वारा अब तीसरा नेशनल कम्यूनिकेशन तैयार किया जा रहा है।
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इस अध्ययन के लिए मंत्रालय ने आईआईटी बीएचयू को चुना है। आईआईटी बीएचयू के सेंटर फॉर रिन्यूएबल एनर्जी के समन्वयक प्रो. एसके शुक्ला ने इस अध्ययन के लिए सेंटर फॉर क्लाइमेट चेंज का प्रस्ताव बनाकर मंत्रालय को भेज दिया है।
प्रो. शुक्ला ने बताया कि रिन्यूएबल एनर्जी पर जलवायु परिवर्तन का क्या असर पड़ रहा है, ये अध्ययन करना है। इस अध्ययन में 2020, 2030, 2050 और 2100 में जलवायु परिवर्तन का क्या असर होगा, इसके पूर्वानुमान पर रिपोर्ट तैयार करनी है।
देश के छह क्लाइमेटिक जोन के अनुसार हमें अध्ययन व शोध करना होगा। इसके लिए हमें देश भर के मौसम विभाग से आंकड़ा एकत्र करना होगा। हमारे रिपोर्ट के अनुसार ही संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए रणनीति तैयार करेगा।