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Varanasi News: आईआईटी बीएचयू में नैनो कण की खोज, 48 घंटे तक नहीं जमा खून, हार्ट अटैक और स्ट्रोक से होगा बचाव

Tue, 06 May 2025 11:14 AM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Tue, 06 May 2025 11:14 AM IST
सार

आईआईटी बीएचयू में नैनो कण की खोज की गई। हार्ट अटैक, स्ट्रोक समेत नसों में खून के जमने से जुड़ी बीमारियों को रोकने में मदद मिलेगी। ऐसा नैनो पार्टिकल खोजा गया है जो कि रक्त का थक्का बनने से रोकता है।
 

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IIT BHU research to prevent diseases related to blood clotting in veins including heart attack and stroke
IIT BHU - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आईआईटी बीएचयू में हार्ट अटैक, स्ट्रोक समेत नसों में खून के जमने से जुड़ी बीमारियों को रोकने के लिए बड़ा रिसर्च हुआ है। एक ऐसा नैनो पार्टिकल खोजा गया है जो कि रक्त का थक्का बनने (थ्रॉम्बोसिस) से रोकता है।

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इंसानों और चूहों के खून पर रिसर्च कर वैज्ञानिकों ने पाया कि रक्त की संरचना और गुणों को बिना बदले ही 48 घंटे तक ब्लड क्लॉटिंग की समस्या नहीं हुई। यह रिसर्च अंतरराष्ट्रीय जर्नल एसीएस अप्लाइड मटेरियल्स एंड इंटरफेसेज में प्रकाशित किया जा चुका है। खोज के लिए एक पेटेंट भी फाइल किया गया है। 
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संस्थान के स्कूल ऑफ बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुदीप मुखर्जी के नेतृत्व में शोध टीम ने पोटैशियम फेरिक ऑक्सालेट नैनोकण की खोज की है। इसकी मदद से स्ट्रोक, हार्ट अटैक, पल्मोनरी एंबोलिज्म और डीप वेन थ्रॉम्बोसिस जैसी बीमारियों को रोका जा सकेगा।
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इस वजह से होती हैं बीमारियां

ये बीमारियां अक्सर खून में खतरनाक थक्के बनने की वजह से होती है। ये नसों को अवरुद्ध कर जान के लिए खतरा बन जाते हैं। भारत में वेनस थ्रॉम्बो एम्बोलिज्म की वार्षिक दर हर 1,000 लोगों पर 1-2 ही है, जबकि पल्मोनरी एंबोलिज्म के मामले हर एक लाख पर 39-115 और डीप वेन थ्रॉम्बोसिस के मामले 53-162 प्रति लाख तक दर्ज किए गए हैं।

दी जाती है खून को पतला करने वाली दवा

आम तौर पर इन रोगों से बचने के लिए रक्त को पतला करने वाली पारंपरिक दवा दी जाती है। वारफारिन और हेपरिन धक्कों के इलाज या रोकथाम में इस्तेमाल होती हैं। इनके कई दुष्प्रभाव भी देखे जाते हैं। इसी तरह लैब में खून के नमूने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले केमिकल से इंडीटीए और सोडियम साइट्रेट समय के साथ रक्त कोशिकाओं की संरचना को प्रभावित करते हैं। इससे जांच की सटीकता पर असर पड़ता है। डॉ. सुदीप मुखर्जी ने बताया कि यह नैनो मैटेरियल रक्त संबंधी रोगों की रोकथाम और निदान के लिए एक सुरक्षित और अधिक प्रभावी विकल्प देता है।

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