G20 Summit: अगर नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नहीं होते तो क्या बनारस में जी-20 होता? विदेश मंत्री ने दिया जवाब
G20 Summit in Varanasi: वाराणसी में विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि जो विदेशी मेहमान काशी समेत 60 शहरों में आएंगे और वापस जाएंगे तो उनके मन में भारत का एक चित्र होगा। वह हमारी संस्कृति को समझेंगे और जब जाएंगे तो भारत के राजदूत बनकर जाएंगे।
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अगर नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नहीं होते तो क्या वाराणसी में जी-20 सम्मेलन होता? इस सवाल का जवाब विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने काशी विद्यापीठ में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब यह निर्णय लिया कि जी-20 को हम एक उत्सव के रूप में मनाएंगे तो उनकी अपेक्षा थी कि हम दुनिया को अपने सांस्कृतिक केंद्रों तक ले जाएंगे।
यह कोई सरकारी या अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम नहीं बल्कि उससे इतर है। जो मेहमान काशी समेत 60 शहरों में आएंगे और वापस जाएंगे तो उनके मन में भारत का एक चित्र होगा। वह हमारी संस्कृति को समझेंगे और जब जाएंगे तो भारत के राजदूत बनकर जाएंगे। दुनिया के सामने भारत की संस्कृति और परंपरा को रखेंगे। इस दौरान उन्होंने सवालिया लहजे में पूछा कि अगर नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नहीं होते तो जी-20 वाराणसी में होता क्या?
हर नागरिक का ख्याल रखते हैं पीएम मोदी
विदेश मंत्री ने कहा कि पीएम मोदी देश के हर नागरिक का ख्याल रखते हैं। वह कहते हैं, देश का एक भी नागरिक अगर बाहर फंसा हुआ है तो उसकी हरसंभव मदद करनी है। सबको यह विश्वास होना चाहिए कि कुछ भी हो जाए भारत सरकार उन्हें बचाने जरूर जाएगी।
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यूक्रेन में फंसे विदेशी छात्रों को ऑपरेशन गंगा और सूडान में फंसे नागरिकों के लिए ऑपरेशन कावेरी चलाकर सरकार ने यह विश्वास कायम रखा। ये ऑपरेशन दर्शाता है कि हम अपनों की चिंता करते हैं। आज दुनिया के किसी भी देश में भारतीय जाएं तो उनको यह भरोसा रहता है कि हमारे पीछे कोई है, जो हमारी चिंता करता है।
हम अगर किसी परेशानी में हैं तो हमें मदद जरूर मिलेगी। प्रधानमंत्री का प्रयास है कि योग, आयुर्वेद और मोटा अनाज, आंदोलन की तरह पूरी दुनिया में पहुंच चुका है। जब देश का प्रधानमंत्री नागरिक के बारे में सोचने लगे, राष्ट्रवादी विचार हों, तो ऐसे ही बदलाव आते हैं। तकनीक और मिलजुलकर काम करने से ये बदलाव आया है।