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आपसी सौहार्द व प्रेम का प्रतीक है ईद
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ईद का त्योहार सबको साथ लेकर चलने के लिए जाना जाता है। ईद पर हर मुसलमान एक साथ नमाज पढ़ते हैं और एक दूसरे को गले लगाते हैं। उक्त बातें सैयद नबील हैदर ने सोमवार को अर्दली बाजार में आयोजित जलसे को खिताब करते हुए कहीं।
उन्होंने कहा कि ईद सौहार्द की मिसाल वक्त-वक्त पर पेश करती रही है। इस्लाम में जकात एक अहम पहलू है जिसमें हर मुसलमान को कुछ ना कुछ दान करने को कहा गया है। हिजरी कैलेंडर के शव्वाल महीने के पहले दिन इस त्यौहार को पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह महीना चांद देखने के साथ शुरू होता है इस तरह रमजान आखरी दिन चांद देखने के बाद अगले दिन ईद मनाई जाती है। नबील ने कहा कि एक समय पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब ने बद्र की लड़ाई में जीत हासिल की थी इसी जीत की खुशी में सबका मुंह मीठा कराया गया था।
इस्लामी कैलेंडर के अनुसार हिजरी सवत 2 यानी 624 ई. में पहली बार ईद उल फितर मनाया गया। नबील ने अफ सोस जाहिर करते हुए कहा कि पिछले साल और इस वर्ष में भी रमजान व ईद कोरोना की भेंट चढ़ गया। उन्होंने रब से दुआ करते हुए कहा कि या रब इस मुसीबत से हम सब को निजात दे और पूर्व की भांति अमन, चैन और सुकून की जिंदगी हम सब गुजारें। ऐ मौला सब कुछ पहले सा कर दे।
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उन्होंने कहा कि ईद सौहार्द की मिसाल वक्त-वक्त पर पेश करती रही है। इस्लाम में जकात एक अहम पहलू है जिसमें हर मुसलमान को कुछ ना कुछ दान करने को कहा गया है। हिजरी कैलेंडर के शव्वाल महीने के पहले दिन इस त्यौहार को पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह महीना चांद देखने के साथ शुरू होता है इस तरह रमजान आखरी दिन चांद देखने के बाद अगले दिन ईद मनाई जाती है। नबील ने कहा कि एक समय पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब ने बद्र की लड़ाई में जीत हासिल की थी इसी जीत की खुशी में सबका मुंह मीठा कराया गया था।
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इस्लामी कैलेंडर के अनुसार हिजरी सवत 2 यानी 624 ई. में पहली बार ईद उल फितर मनाया गया। नबील ने अफ सोस जाहिर करते हुए कहा कि पिछले साल और इस वर्ष में भी रमजान व ईद कोरोना की भेंट चढ़ गया। उन्होंने रब से दुआ करते हुए कहा कि या रब इस मुसीबत से हम सब को निजात दे और पूर्व की भांति अमन, चैन और सुकून की जिंदगी हम सब गुजारें। ऐ मौला सब कुछ पहले सा कर दे।
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