सहारे की उम्र में जुदाई का फैसला: बुढ़ापे में तलाक लेने कोर्ट पहुंचे पति-पत्नी, दो साल में ऐसे 240 मामले
शायर जमाल एहसानी का शेर है कि, ये किस मकाम पे सूझी तुझे बिछड़ने की, कि अब तो जा के कहीं दिन संवरने वाले थे...। उम्र के जिस पड़ाव पर दंपती को एक-दूसरे का सहारा बनना चाहिए, वहां कुछ रिश्ते अदालत की दहलीज पर टूटने की कगार पर हैं। कोर्ट में पिछले दो साल में ऐसे करीब 240 आवेदन आए, जिनमें बुजुर्ग दंपतियों ने तलाक के लिए आवेदन किया है। उम्र के इस मुहाने पर तलाक लेने वालों में सिर्फ पुरुष नहीं महिलाएं भी शामिल हैं। इसमें 80 वर्ष के पांच दंपती, 68 से 72 वर्ष के बीच की उम्र के करीब 40 बुजुर्ग दंपती हैं।
उम्र के आखिरी मुहाने पर अलग रहने का फैसला करनेवाले नौकरी पेशा लोगों की जिंदगी में ये बदलाव तब आया जब वह अपने काम से फुर्सत हुए। इन मामलों में ज्यादातर की कोर्ट में काउंसिलिंग की प्रक्रिया चल रही है।
विशेष लोक अभियोजक संतोष कुमार सिंह के मुताबिक काउंसिलिंग के दौरान सामने आया कि ऐसे लोगों ने जीवन का बड़ा हिस्सा नौकरी करने, परिवार की जिम्मेदारियां निभाने और बच्चों का भविष्य संवारने में गुजार दिया। अब जब बच्चे अपने जीवन में व्यस्त हैं और माता-पिता से अलग रह रहे हैं, तो वे बचे हुए वर्षों को अपने हिसाब से जीना चाहते हैं।
सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली पेंशन, बचत और आर्थिक आत्मनिर्भरता उन्हें अपने फैसले लेने का सहारा भी देती है। बनारस के कोर्ट में पहुंचे तलाक लेने वाले ज्यादातर मामलों में या तो किसी और से संबंध या फिर आर्थिक आत्मनिर्भरता कारण है।
बच्चों की जिम्मेदारी पूरी हुई तो अब मानसिक शांति के लिए तलाक
भोजूबीर क्षेत्र में रहने वाले एक दंपती जिनकी 67 साल है, उनके बच्चे पढ़ाई और नौकरी के बाद अलग रहने लगे। इसके बाद पति-पत्नी के बीच पहले से चले आ रहे मतभेद खुलकर सामने आने लगे। पत्नी का कहना था कि बच्चों की परवरिश और परिवार की जिम्मेदारियों में जीवन निकल गया, अब वह मानसिक शांति के साथ रहना चाहती हैं। पति-पत्नी दोनों आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं। इसी वजह से अलग रहने की मांग लेकर मामला अदालत तक पहुंचा।
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झारखंड गए, खदान में नौकरी की, 80 वर्ष की उम्र में मांग रहे तलाक
चौबेपुर क्षेत्र के निवासी एक व्यक्ति करीब 50 साल पहले झारखंड में कोयले की खदान में नौकरी करने गए। नौकरी के दौरान वहीं स्थानीय निवासी एक महिला से संपर्क हुआ। मामला सेवानिवृत्ति के बाद खुला। लगातार कई साल से संपत्ति को लेकर दोनों पक्षों में विवाद बढ़ गया। अब बनारस वाली पत्नी से तलाक लेने के लिए आवेदन किया है। मामला काउंसिलिंग में है।
केस-3
घरेलू सहायिका से संबंध का आरोप
जैतपुरा क्षेत्र की एक कॉलोनी में रहने वाले 78 वर्षीय बुजुर्ग दंपती का विवाद घरेलू सहायिका से जुड़े संबंध को लेकर अदालत तक पहुंचा। पत्नी ने काउंसिलिंग के दौरान पति पर लंबे समय से घरेलू सहायिका के साथ नजदीकी संबंध होने का आरोप लगाया। पति-पत्नी के बीच इस मुद्दे को लेकर विवाद लगातार बढ़ता गया। बच्चे बड़े होकर अलग रहने लगे तो दोनों के बीच सुलह कराने वाले परिवार का दबाव भी कम हो गया। अब पत्नी अलग रहने की इच्छा जता रही है।
विशेषज्ञ बोले
वर्तमान समय में लोग स्वतंत्र हो गए हैं और कोई भी अपने जीवन में दूसरों का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं करना चाहता। मनमुटाव होने पर सुलह की कोशिश करने के बजाय लोग अहंकार पाल लेते हैं। अब समाज में तलाक को बुरी नजर से नहीं देखा जाता, जबकि पहले सामाजिक भय के कारण तलाक के मामले कम होते थे। अब चाहे उम्र अधिक हो या लोग मध्य आयु में हों, वे किसी की टोका-टाकी बर्दाश्त करने की क्षमता खोते जा रहे हैं। - प्रो. संजय गुप्ता, डीन, मनोचिकित्सा विभाग, आईएमएस बीएचयू