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इंसानियत: पैसे के अभाव में पिता का शव लिए घंटों बैठी रही बेटी, काशी के 'कबीर' ने कराया अंतिम संस्कार

Tue, 27 Jul 2021 09:46 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Tue, 27 Jul 2021 09:46 AM IST
सार

घर-घर झाड़ू-पोछा लगाने वाली पाण्डेयपुर निवासी प्रेमलता के पिता का निधन रविवाऱ शाम को हुआ। सूचना पर भी जब रिश्तेदार नहीं पहुंचे तो बेटी शव को चादर में लपेटकर रात भर कमरे में बैठी रही। सूचना के बाद युवा समाजसेवी अमन कबीर ने प्रेमलता की मदद की।

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Humanity Social Worker Aman Kabir help lady for her father last rites who sitting for hours with  dead body due to lack of money
बेटी प्रेमलता ने भी कंधा दिया और पिता को मुखाग्नि दी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोरोना काल में जहां कई लोग जहां एक दूसरे की मदद में जुटे हुए हैं, वहीं कुछ ऐसे भी हैं जो मुसीबत के समय भी अपनों से मुंह मोड़ लेते हैं। कुछ ऐसा ही मामला वाराणसी  में सामने आया जब घर-घर झाड़ू-पोछा लगाने वाली बेटी प्रेमलता के पिता की आकस्मिक मौत हो गई।

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मौत के बाद पिता के अंतिम संस्कार के लिए बेटी के पास पैसे नहीं थे। रातभर वो पिता के शव के पास बैठकर रोती रही। किसी ने इसकी सूचना समाजसेवी अमन कबीर को दी। जिसके बाद अमन ने घर पहुंचकर प्रेमलता के पिता का मर्णिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार कराया।  
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पाण्डेयपुर निवासी प्रेमलता रविवार को जब काम के बाद घर लौटी तो पिता रामकुमार की तबीयत सही नहीं थी। उसके पास पिता का इलाज कराने के पैसे भी नहीं थे। दर्द से तड़पते पिता रामकुमार गुप्ता ने बेटी के सामने की दम तोड़ दिया। सूचना पर भी जब रिश्तेदार नहीं पहुंचे तो बेटी शव को चादर में लपेटकर रात भर कमरे में बैठी रही।

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अमन ने बताया कि मुझे घटना की सूचना मिली तो अपनी टीम के साथ उसके घर पहुंचा। अंतिम संस्कार के लिए कई लोगों ने आर्थिक मदद की। जिसके बाद अंतिम यात्रा निकाली गई। जिसमें बेटी प्रेमलता ने भी कंधा दिया और पिता को मुखाग्नि दी। अपनी बाइक एम्बुलेंस से सड़क पर मिलने वाले बुजुर्गों, बेसहारों और निःशक्तों को अस्पताल पहुंचाने वाले अमन को लोग काशी के 'कबीर' भी कहते हैं। 
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