फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   How to explain to my son ... can no longer meet father

बेटे को कैसे समझाएं...अब पापा से नहीं मिल सकते

Mon, 31 May 2021 01:21 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 31 May 2021 01:21 AM IST
विज्ञापन
How to explain to my son ... can no longer meet father
सेवापुरी ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय कक्षराय के सहायक अध्यापक रहे राजेश कुमार का हालही में हुए पंचायत चुनाव के दौरान कोरोना संक्रमित होने के बाद एक मई को निधन हो गया था। आज उनके घर के हालात बहुत बदल चुके हैं। घर में मातम छाया हुआ है। उनकी पत्नी अनुपमा का खुद के साथ-साथ बच्चों को समझाना मुश्किल हो रहा है। तीन साल का बेटा रात को उठकर बैठ जाता है और पापा से मिलने का मन कर रहा है, यह कहकर रोने लगता है। ऐसे में अनुपमा भी खुद को रोने से नहीं रोक पाती हैं।
विज्ञापन

मूल रूप से जौनपुर निवासी शिक्षक राजेश कुमार अकेले ही बनारस में कमरा लेके के रहते थे। कोरोना काल में हुए पंचायत चुनाव के बाद एक मई को उनका निधन हो गया। वो अपने पीछे पत्नी व दो बेटों को अकेला छोड़ गए हैं। अनुपमा बताती हैं कि उनके पति आठ अप्रैल को पंचायत चुनाव का प्रशिक्षण लेने गए थे। ट्रेनिंग से लौटने के बाद ही रात को उनकी तबीयत खराब होने शुरू हो गई। बुखास आया तो उन्होंने रात में दवा ले ली। तबीयत खराब होने के बाद भी उन्हें ड्यूटी पर बुलाया जाता था। 14 अप्रैल को जौनपुर में हुए पंचायत चुनाव में उनकी ड्यूटी लगाई गई थी। रात करीब 12 बजे ड्यूटी से आने के बाद जब तबीयत ठीक नहीं हुई तो 16 अप्रैल को उन्होंने जिला अस्पताल में कोविड टेस्ट कराया। इस दौरान भी वो दवा ले रहे थे, लेकिन तबीयत ठीक नहीं हुई, तब हम लोगों ने उन्हें स्थानीय निजी चिकित्सक के यहां दिखाया। डॉक्टर ने कुछ दवाइयां दी और हम उन्हें घर ले आए। 18 को जब कोरोना की रिपोर्ट आई तो वो पॉजिटिव थे। 18 की रात 12 बजे के बाद उनकी तबियत ज्यादा खराब होने लगी तो 19 की सुबह ही हमलोगों ने उन्हें जिला अस्पताल के कोविड वार्ड में एडमिट कराया। पति को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। इसलिए डॉक्टरों ने उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा था, लेकिन ऑक्सीजन लेवल लगातार घटता जा रहा था। आखिरकार 11 दिनों तक कोरोना से जंग लड़ते लड़ते एक मई को वो जिंदगी की जंग हार गए। डॉक्टरों ने जब उनके मरने की सूचना दी तो आखों के सामने अंधेरा छा गया, लगा जिंदगी खत्म हो गई, पंचायत चुनाव ने मेरे साथ मेरे बच्चों की खुशियां छीन ली।
विज्ञापन

बच्चों की पढ़ाई को लेकर चिंता -
अनुपमा बताती हैं मेरा बड़ा बेटा 8 साल का और छोटा बेटा अभी सिर्फ 3 साल का है। अब पढ़ाने, लिखाने व काबिल बनाने की जिम्मेदारी समय से पहले उनके कंधों पर आ गई है। वह कहती है कि जब तक कोई सरकारी मदद व मृतक आश्रित के रूप में सरकारी नौकरी नहीं लगेगी, तब तक परिवार को आर्थिक संकट से भी गुजरना पड़ रहा है। इतनी छोटी उम्र में बच्चों को पिता का प्यार भी नसीब नहीं हो सका।
विज्ञापन
विज्ञापन

मृतक आश्रित कोटे से विभाग में नौकरी के लिए आवेदन कर दिया है। मेरी योग्यता एमए व बीएड की है। इसलिए टीईटी उत्तीर्ण करने का समय मांगा है। विभाग की ओर से अभी इस पर कोई जवाब नहीं आया है।- अनुपमा, राजेश कुमार की पत्नी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed