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पांच घंटे में पांच अस्पतालों में पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री ने जानी सुविधाएं

Sun, 22 Sep 2019 01:21 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 22 Sep 2019 01:21 AM IST
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वाराणसी। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री जयप्रताप सिंह ने अपने बनारस दौरे के दूसरे दिन अस्पतालों का दौरा किया। पांच घंटे में उन्होंने एक-एक कर पांच अस्पतालों का दौरा कर यहां वार्डों, ऑपरेशन थिएटर, इमरजेंसी कक्ष, जांच केंद्र आदि जगहों पर जाकर एक-एक सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। इसके बाद मरीजाें से बातचीत कर इसका लाभ कितना मिल रहा, इसकी हकीकत भी जानी। इस दौरान उनका सबसे अधिक जोर सुविधाएं बढ़ाने पर रहा। कहा कि चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ की कमी सहित जो भी कमियां हैं, उसे दूर करने के साथ ही जांच, दवा आदि सुविधाएं भी बढ़ाई जाएंगी, जिससे कि लोगों को इलाज के लिए भटकना न पड़े।
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स्वास्थ्य मंत्री बनने के बाद पहली बार बनारस आए जयप्रताप सिंह सुबह पहले पंडित दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल गए। अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. बीबी सिंह और सीएमओ डॉ. वीबी सिंह के साथ पहुंचे मंत्री ने इस दौरान उन्होंने चिकित्सकों को बाहर की दवा न लिखे, डायलिसिस यूनिट में बेड बढ़ाने, अस्पताल में बंद पड़ी सिटी स्कैन मशीन के जल्द शुरू कराने का निर्देश मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वी शुक्ला को दिया। साथ ही पैथोलॉजी में तमाम जांचें नहीं होने पर नाराजगी जाहिर की। इसके बाद मानसिक अस्पताल जाकर वहां भी मरीजों के इलाज, जांच के साथ ही मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी ली। यहां स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल परिसर में पौधरोपण भी किया। सुबह करीब 11 बजे मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा पहुंचे। उन्होंने प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बीएन श्रीवास्तव से इमरजेंसी सहित अन्य जगहों पर सुविधाओं की मानीटरिंग करते रहने का निर्देश दिया। उधर महिला अस्पताल कबीरचौरा में भी अल्ट्रासाउंड केंद्र, ऑपरेशन थिएटर के साथ ही वार्डों में भर्ती महिलाओं से उनके और नवजात बच्चे के इलाज की जानकारी ली। इसके बाद स्वास्थ्य मंत्री रामनगर स्थित लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल गए और वहां भी स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लिया।
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अस्पतालों के दौरे के बाद बातचीत में मंत्री ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में सात हजार चिकित्सकों की कमी है। इसको जल्द से जल्द पूरा कराया जाएगा। इसके लिए प्रयास जारी है। फिलहाल यह कोशिश की जा रही है कि प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों से चिकित्सकों की तैनाती की जाए। यहां से दो साल के लिए एमबीबीएस करने वालों की तैनाती की जाएगी। इसके बाद अगर वो चाहेंगे तो उनका कार्यकाल भी आगे बढ़ाया जाएगा।
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