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असि संगम पर रोशन हुए उम्मीद के दीप
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Tue, 26 Apr 2016 02:16 AM IST
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मुद्दा वाराण्ासी की विरासत का
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काशी में पाटे गए असि-संगम तीर्थ के तट पर सोमवार की शाम एक तरफ सूर्य की किरणें अस्ताचलगामी हुईं तो दूसरी ओर असि मुक्ति पर उम्मीदों की ज्योति जलाई जाने लगी। लुप्त हो चुके संगम की बहाली के लिए उम्मीदों ंकी लौ जलाने के लिए बच्चे, महिलाएं भी निकले और छात्र भी। अस्सी घाट के लोगों ने भी दीयों में बाती सजाई। असि-संगम की पीड़ा 1001 दीपमालाओं में किसी तारामंडल की मानिंद टिमटिमा उठी। इस मौके पर जन चेतना अभियान से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं ने असि-संगम को नए सिरे से खोले जाने और वाराणसी की पहचान बचाने के लिए जन-जन से आगे आने का आह्वान किया। उनका कहना था कि अब जनता जाग चुकी है। हम असि नदी के संगम को ले कर रहेंगे।
अस्सी घाट पर जहां असि-गंगा संगम को पाट कर अब नगर निगम की कार पार्किंग और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियां चलाई जा रही हैं, वहां शाम छह बजे असि संमेद तीर्थ के दफन इतिहास को जिंदा करने के लिए दीप मालाएं सजाई जाने लगीं। 15 से अधिक जन संगठनों ने दीयों से सजाई अल्पना में असि की पीड़ा को उजागर किया। दीपों की लड़ियों से एक आकृति तैयार की गई, जिसमें एक पीड़ा भी थी और तमाम झंझावातों के बीच उठ खड़े होने का दम भी। जगमग दीयों से कहीं ‘मैं असि हूं’ तो कहीं ‘ऊं’ की आकृतियां बनाई गई।
घाट की सीढ़ियों, मढ़ियों से लेकर फर्श तक दीपमालाओं से लोगों ने असि-संगम के प्रति श्रद्धा निवेदित तो ही, जन मानस के पटल से ओझल होते नदी के अस्तित्व के प्रति झकझोरने और जगाने का भी काम किया। जन संगठनों ने असि-संगम की वापसी के लिए आवाज बुलंद की। उनका कहना था कि सिर्फ 50 मीटर नदी के दायरे में बंद चैनल को खोल दिया जाएगा तो काशी की पहचान पर छाए संकट के बादल छंट जाएंगे।
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इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की गई कि वह काशी की मोक्षदायिनी नदी की मुक्ति और असि-संगम को पुनर्जीवित कराने के लिए कदम उठाएं, ताकि वाराणसी के अस्तित्व और तीर्थ की महिमा को बचाया जा सके। असि-संगम तीर्थ के बिना काशी की पौराणिक पंचक्रोशी परिक्रमा, पंचतीर्थी परिक्रमा और अंतरगृही परिक्रमा के भी मायने खत्म हो गए हैं। इसलिए कि इसी संगम में स्नान के बाद ही यह पापमोचनी यात्राएं आरंभ होती रही हैं। दीपदान करने वालों में सामाजिक कार्यकर्ता विनय सिंह, नीलम पटेल, दीपक पुजारी, चिंतामणि सेठ, प्रतिभा सिंह, सीमा सिंह, जागृति राही, डॉ. आनंद प्रकाश तिवारी, कमलेश यादव, दिनेश प्रताप, जयराम मिश्र, विनोद सिंह, अजीत सिंह, डॉ. राजेश श्रीवास्तव, विजय त्रिपाठी, कपींद्र तिवारी, त्रिलोचन शर्मा, जगन्नाथ ओझा, लोक गायक राजन तिवारी, गायिका श्रद्धा पांडेय, बनारसी लाल प्रजापति, वीरेंद्र साहनी, शिवांग रघुवंशी, कुशाग्रह, अतुल सिंह, ईश्वर, शुभम और स्वप्निल समेत तमाम लोग उपस्थित थे।
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अस्सी घाट पर जहां असि-गंगा संगम को पाट कर अब नगर निगम की कार पार्किंग और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियां चलाई जा रही हैं, वहां शाम छह बजे असि संमेद तीर्थ के दफन इतिहास को जिंदा करने के लिए दीप मालाएं सजाई जाने लगीं। 15 से अधिक जन संगठनों ने दीयों से सजाई अल्पना में असि की पीड़ा को उजागर किया। दीपों की लड़ियों से एक आकृति तैयार की गई, जिसमें एक पीड़ा भी थी और तमाम झंझावातों के बीच उठ खड़े होने का दम भी। जगमग दीयों से कहीं ‘मैं असि हूं’ तो कहीं ‘ऊं’ की आकृतियां बनाई गई।
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घाट की सीढ़ियों, मढ़ियों से लेकर फर्श तक दीपमालाओं से लोगों ने असि-संगम के प्रति श्रद्धा निवेदित तो ही, जन मानस के पटल से ओझल होते नदी के अस्तित्व के प्रति झकझोरने और जगाने का भी काम किया। जन संगठनों ने असि-संगम की वापसी के लिए आवाज बुलंद की। उनका कहना था कि सिर्फ 50 मीटर नदी के दायरे में बंद चैनल को खोल दिया जाएगा तो काशी की पहचान पर छाए संकट के बादल छंट जाएंगे।
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इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की गई कि वह काशी की मोक्षदायिनी नदी की मुक्ति और असि-संगम को पुनर्जीवित कराने के लिए कदम उठाएं, ताकि वाराणसी के अस्तित्व और तीर्थ की महिमा को बचाया जा सके। असि-संगम तीर्थ के बिना काशी की पौराणिक पंचक्रोशी परिक्रमा, पंचतीर्थी परिक्रमा और अंतरगृही परिक्रमा के भी मायने खत्म हो गए हैं। इसलिए कि इसी संगम में स्नान के बाद ही यह पापमोचनी यात्राएं आरंभ होती रही हैं। दीपदान करने वालों में सामाजिक कार्यकर्ता विनय सिंह, नीलम पटेल, दीपक पुजारी, चिंतामणि सेठ, प्रतिभा सिंह, सीमा सिंह, जागृति राही, डॉ. आनंद प्रकाश तिवारी, कमलेश यादव, दिनेश प्रताप, जयराम मिश्र, विनोद सिंह, अजीत सिंह, डॉ. राजेश श्रीवास्तव, विजय त्रिपाठी, कपींद्र तिवारी, त्रिलोचन शर्मा, जगन्नाथ ओझा, लोक गायक राजन तिवारी, गायिका श्रद्धा पांडेय, बनारसी लाल प्रजापति, वीरेंद्र साहनी, शिवांग रघुवंशी, कुशाग्रह, अतुल सिंह, ईश्वर, शुभम और स्वप्निल समेत तमाम लोग उपस्थित थे।