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Holi: रियाज में होरी और फाग की बंदिशें...कथक कलाकार ऐसे मनाएंगे होली, कहा- मंच पर उतारेंगे उल्लास

Tue, 03 Mar 2026 03:30 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Tue, 03 Mar 2026 03:30 PM IST
सार

Holi: बनारस में कथक का डांस करने वाले कलाकारों ने होली को लेकर अपनी-अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। उनका कहना है कि होली केवल रंगों का पर्व नहीं, बल्कि कला और संस्कृति को जीवंत करने का अवसर है। कथक कलाकारों के अनुसार, फागुन का महीना आते ही रियाज में होरी और फाग की बंदिशें शामिल हो जाती हैं।

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Holi Restrictions of Hori and Phaag in practice Kathak artists celebrate Holi in varanasi
उर्वशी, आशीष और शालिनी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

काशी के कथक कलाकार बताते हैं कि “होरी खेलत नंदलाल” और राधा-कृष्ण की लीलाओं पर आधारित प्रस्तुतियां दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित करती हैं। घुंघरुओं की झंकार, तबले की थाप और भाव-भंगिमाओं के माध्यम से होली के उल्लास को मंच पर उतारा जाता है।

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उन्होंने कहा कि बनारस की गलियों और घाटों पर जब सांस्कृतिक आयोजन होते हैं, तो कलाकार पारंपरिक वेशभूषा में रंग-गुलाल के साथ नृत्य प्रस्तुत करते हैं। उनके मुताबिक, कथक की होली प्रेम, सौहार्द और आध्यात्मिक ऊर्जा का संदेश देती है। इस तरह कलाकारों की होली रंग, राग और रस का अनूठा संगम बन जाती है।
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संस्कृति को बचाने का एक अवसर है होली: आशीष सिंह 
आशीष सिंह उर्फ नृत्य मंजरी दास ने कहा कि होली रंगों का त्योहार है, जो हमे बहुत कुछ सिखाती हैं, जीवन को मौसम के बदलते मिजाज के साथ फाग के रंगों में सरोबर करती उमंग से भर देती हैं। कलाकारों की होली रागों, तालों और घुंघुरूओं के समावेश से ध्वनिरूपी रंग उत्पन्न करनी है, जिसमें सभी कलाकार और श्रोता दोनों एक साथ मिलकर इस 'इंद्रधनुषी' रंगों में डुबकी लगाते हैं। होली मिलन, होली बैठक, बुढ़वा मंगल जैसे आयोजन किये जाते हैं, जिससे अपनी संस्कृति भी बचे और आज के युवा वर्ग भी इससे परिचित हो। 
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गायक कलाकार जहां ब्रज के प्रसिद्ध 'रसिया' होरी पदों का गायन करते हैं, वही नर्तक उसपे भाव दिखाता है 'रसिया को नार बनाओ री', 'आज बीरज में होली रे रसिया, में जहां गोपियां भगवान श्री कृष्ण को नारी बनाती नथ, बेसर, बिंदी, चुनरी उड़ाती और नाच नाचती हैं। वहीं, बाबा भोलेनाथ 'खेले मसाने में होली दिगंबर' से चिता भस्म की होली अपने गढ़ों के साथ खेलते। कला और कलाकार समाज में अपनी कला से लोगों को आंतरिक सुख मानसिक शांति के साथ-साथ खुशियां प्रदान करता हैं, 
जो हमारे त्योहार को अत्यधिक उत्साह से भर देता है।

रंग, रस और राग का अद्भुत संगम है होली: उर्वशी श्रीवास्तव 
कथक डांसर उर्वशी श्रीवास्तव ने कहा कि रंगों का पर्व होली केवल आमजन के लिए ही नहीं, बल्कि कलाकारों के लिए भी खास मायने रखता है। बनारस की कथक नृत्यांगना उर्वशी श्रीवास्तव ने बताया कि कथक कलाकार होली को केवल रंगों से नहीं, बल्कि भाव, लय और ताल के साथ मनाते हैं। उन्होंने कहा कि होली का उत्सव कथक परंपरा में विशेष स्थान रखता है। इस दिन कलाकार राधा-कृष्ण की लीलाओं पर आधारित बंदिशों और ठुमरियों की प्रस्तुति देते हैं। खासतौर पर “अरी सखी आज रंग बरसे” जैसी पारंपरिक रचनाओं पर भाव-प्रदर्शन किया जाता है।

उर्वशी श्रीवास्तव ने बताया कि होली के अवसर पर गुरुजनों का आशीर्वाद लेकर रंगारंग अभ्यास सत्र आयोजित किए जाते हैं, जहां शिष्य और गुरु मिलकर नृत्य के माध्यम से उत्सव मनाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कथक में होली केवल बाहरी रंगों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मिक आनंद और भक्ति का प्रतीक है।

कलाकार रंग-गुलाल के साथ-साथ पखावज और तबले की थाप पर तालबद्ध नृत्य करते हैं। उर्वशी के अनुसार, बनारस में होली के दिन घाटों और सांस्कृतिक मंचों पर विशेष प्रस्तुतियां होती हैं, जहां दर्शक पारंपरिक परिधानों में सजे कलाकारों की मोहक अदाओं का आनंद लेते हैं। इस तरह कथक कलाकारों की होली रंग, रस और राग का अद्भुत संगम बन जाती है।

Holi Restrictions of Hori and Phaag in practice Kathak artists celebrate Holi in varanasi
सरला और वसुंधरा शर्मा। - फोटो : अमर उजाला

आत्मा को निखारते हैं रंग: शालिनी चौरसिया 
बनारस की कथा कलाकार शालिनी चौरसिया का कहना है कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आत्मा को निखारने का उत्सव है। वह बताती हैं कि जैसे रंग चेहरे पर खिलते हैं, वैसे ही प्रेम, करुणा और अपनापन मन के भीतर भी रंग भरते हैं।

शालिनी चौरसिया के अनुसार, होली का संदेश मन के मैल को धोकर रिश्तों में नई ऊर्जा भरना है। कथा मंचन के दौरान वह राधा-कृष्ण की लीलाओं और भक्त प्रह्लाद की कथा के माध्यम से बताती हैं कि सच्ची भक्ति और प्रेम ही जीवन को रंगीन बनाते हैं।

उन्होंने कहा कि बनारस की होली में आध्यात्मिकता की झलक साफ दिखाई देती है। मंदिरों और घाटों पर भजन, कीर्तन और कथा के बीच जब गुलाल उड़ता है, तो वातावरण भक्तिमय हो उठता है। उनके मुताबिक, होली का असली रंग वही है जो आत्मा को छू जाए और समाज में सद्भाव का संदेश फैलाए।

रियाज और प्रस्तुति की तैयारी की जाती है: सरला
बनारस की कथक नृत्यांगना सरला नारायन सिंह का कहना है कि होली नृत्य और भावनाओं का सबसे जीवंत पर्व है। उनके अनुसार, कथक में फाग और होरी की परंपरा सदियों से चली आ रही है, जिसमें राधा-कृष्ण की रसमय लीलाओं को अभिव्यक्ति दी जाती है।

सरला नारायन सिंह बताती हैं कि होली के अवसर पर विशेष रियाज और प्रस्तुति की तैयारी की जाती है। घुंघरुओं की मधुर झंकार, तबले की थाप और पखावज की संगत के बीच जब “होरी खेलत नंदलाल” जैसी बंदिशों पर नृत्य होता है, तो दर्शक भी रंग और रस में डूब जाते हैं।

उन्होंने कहा कि बनारस की सांस्कृतिक विरासत में होली का अलग ही स्थान है। घाटों और मंचों पर होने वाली प्रस्तुतियां कला और भक्ति का अनूठा संगम प्रस्तुत करती हैं। उनके लिए होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि प्रेम, सौहार्द और परंपरा को संजोने का अवसर है।

रिश्तों को नई ऊर्जा देती है होली: वसुंधरा

बनारस की कथा कलाकार वसुंधरा शर्मा का कहना है कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आत्मा को निखारने का उत्सव है। वह बताती हैं कि जैसे रंग चेहरे पर खिलते हैं, वैसे ही प्रेम, करुणा और अपनापन मन के भीतर भी रंग भरते हैं।

वसुंधरा शर्मा के अनुसार, होली का संदेश मन के मैल को धोकर रिश्तों में नई ऊर्जा भरना है। कथा मंचन के दौरान वह राधा-कृष्ण की लीलाओं और भक्त प्रह्लाद की कथा के माध्यम से बताती हैं कि सच्ची भक्ति और प्रेम ही जीवन को रंगीन बनाते हैं।

उन्होंने कहा कि बनारस की होली में आध्यात्मिकता की झलक साफ दिखाई देती है। मंदिरों और घाटों पर भजन, कीर्तन और कथा के बीच जब गुलाल उड़ता है, तो वातावरण भक्तिमय हो उठता है। उनके मुताबिक, होली का असली रंग वही है जो आत्मा को छू जाए और समाज में सद्भाव का संदेश फैलाए।

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