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Hit and Run: हिट एंड रन के खिलाफ चालकों ने मोहनसराय हाईवे पर किया चक्का जाम, कई एंबुलेंस और स्कूल वैन फंसे
Tue, 02 Jan 2024 03:46 PM IST
किरन रौतेला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: किरन रौतेला
Updated Tue, 02 Jan 2024 03:46 PM IST
सार
मोहनसराय चौराहा पर हिट एंड रन कानून के खिलाफ हड़ताल के समर्थन में मंगलवार को सुबह चालकों ने चौराहे पर ट्रक को हाईवे के बीच में लगाकर रोड जाम कर दिया। जिससे रोहनिया से राजातालाब तथा मोहनसराय से अखरी तक हाईवे पर वाहनों की लंबी लाइन लग गई।
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Hit and Run Law
- फोटो : संवाद
विस्तार
सरकार के नये कानून हिट एंड रन को लेकर देशभर में प्रदर्शन चल रहा है। वाराणसी में भी इसका असर देखने को मिल रहा है। मोहनसराय चौराहा पर हिट एंड रन कानून के खिलाफ हड़ताल के समर्थन में मंगलवार को सुबह चालकों ने चौराहे पर ट्रक को हाईवे के बीच में लगाकर रोड जाम कर दिया। जिससे रोहनिया से राजातालाब तथा मोहनसराय से अखरी तक हाईवे पर वाहनों की लंबी लाइन लग गई।
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जिसमें एंबुलेंस सहित स्कूली वाहन भी फंसे रहे और यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। सुबह 7 बजे से लेकर 10 बजे तक जाम में वाहन खड़े रहे।
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जिसकी सूचना पाकर मौके पर पहुंचे एसीपी सदर संजीव शर्मा तथा मंडुवाडीह थाना प्रभारी विमल मिश्रा,रोहनिया थाना प्रभारी योगेन्द्र प्रसाद तथा राजातालाब थाना प्रभारी सुमित्रा देवी ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शनकारी चालको को खदेड़कर भगाया और हाईवे पर लगे लंबी जाम को समाप्त कराकर वाहनों का आवागमन सुचारू रूप से चालू कराया। जिसके बाद दौरान हाईवे के दोनों तरफ स्थानीय पुलिस प्रशासन गस्त करते रहे।
रामनगर के पराग डेयरी में बड़े वाहनों के नहीं चलने से छोटे मालवाहक वाहनों से सप्लाई दी गई। मोहनसराय-रोहनिया मार्ग पर चालकों ने ट्रक खड़े करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। वहीं, सुबह में उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम और सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज की बसें भी नहीं डोली। दोपहर 12 बजे के बाद रोडवेज की बसें सड़कों पर निकलना शुरू हुईं। तोड़फोड़ के भय से लगातार दूसरे दिन भी 50 ई-बसें डिपो से बाहर नहीं निकली।
महेशपुर में ट्रांसपोर्टरों ने विरोध प्रदर्शन किया। स्थानीय पुलिस ने किसी तरह समझा बुझाकर शांत कराया। चालकों के हड़ताल होने की वजह से यात्रियों की संख्या भी कैंट बस स्टेशन पर कम दिखी। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम वाराणसी परिक्षेत्र के कैंट बस स्टेशन पर सुबह के समय चालकों ने बसें खड़ी कर दीं।
ग्रामीण डिपो अनुबंधित बस चालकों ने स्टेयरिंग थामने से इंकार करते हुए अन्य चालकों को भी भड़काया। अन्य डिपो के चालकों ने भी बस चलाने से इंकार दिया। सुबह छह बजे से आठ बजे तक बसों के नहीं चलने से यात्रियों ने रेलवे स्टेशन का सहारा लिया। वहीं, कुछ ने ऑटो और निजी साधन से अपने गंतव्य को रवाना हुए।
महेशपुर में ट्रांसपोर्टरों ने विरोध प्रदर्शन किया। स्थानीय पुलिस ने किसी तरह समझा बुझाकर शांत कराया। चालकों के हड़ताल होने की वजह से यात्रियों की संख्या भी कैंट बस स्टेशन पर कम दिखी। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम वाराणसी परिक्षेत्र के कैंट बस स्टेशन पर सुबह के समय चालकों ने बसें खड़ी कर दीं।
ग्रामीण डिपो अनुबंधित बस चालकों ने स्टेयरिंग थामने से इंकार करते हुए अन्य चालकों को भी भड़काया। अन्य डिपो के चालकों ने भी बस चलाने से इंकार दिया। सुबह छह बजे से आठ बजे तक बसों के नहीं चलने से यात्रियों ने रेलवे स्टेशन का सहारा लिया। वहीं, कुछ ने ऑटो और निजी साधन से अपने गंतव्य को रवाना हुए।
परिक्षेत्र के क्षेत्रीय प्रबंधक गौरव वर्मा, कार्यशाला प्रबंधक प्रियम श्रीवास्तव समेत अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों ने कमान संभाली। प्रत्येक डिपो के चालकों और परिचालकों को समझाया बुझाया। एक-एक कर बसें सड़क पर निकलनी शुरू हुईं। वहीं, कुछ चालकों का कहना रहा कि रास्ते में हमला किया जा सकता है, बसें क्षतिग्रस्त की जा सकती हैं। इस वजह से बस चलाने से इंकार करते हुए भी दिखे। जिस रूट के यात्री रहे, उस रूटों पर बसें निकाली जाती रहीं। सुबह से लेकर शाम तक आरएम समेत अन्य कर्मचारी बसों को निकलवाने में जुटे रहे।
क्षेत्रीय प्रबंधक गौरव वर्मा ने बताया कि रोडवेज की सभी बसें चल रही हैं। सिटी की डीजल वाली बसें भी चलाई जा रही हैं। हालांकि ई-बसों को इसलिए रूट पर नहीं उतारा जा रहा है, रास्ते में उन पर तोड़फोड़ किया जा सकता है। वहीं, दो दिन में रीजन को 55 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा, जबकि सिटी को लगभग चार लाख रुपये की आय में चपत लगी है।
क्षेत्रीय प्रबंधक गौरव वर्मा ने बताया कि रोडवेज की सभी बसें चल रही हैं। सिटी की डीजल वाली बसें भी चलाई जा रही हैं। हालांकि ई-बसों को इसलिए रूट पर नहीं उतारा जा रहा है, रास्ते में उन पर तोड़फोड़ किया जा सकता है। वहीं, दो दिन में रीजन को 55 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा, जबकि सिटी को लगभग चार लाख रुपये की आय में चपत लगी है।