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हिस्ट्रीशीटर अजीत हत्याकांड में सनसनीखेज खुलासा, इस वजह से गिरधारी गैंग ने की हत्या

Sat, 09 Jan 2021 08:19 AM IST
विचित्र सिंह पुष्पेंद्र कुमार त्रिपाठी, वाराणसी
पुष्पेंद्र कुमार त्रिपाठी, वाराणसी Published by: विचित्र सिंह Updated Sat, 09 Jan 2021 08:19 AM IST
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Historysheeter Ajit Singh murder case in Lucknow Girdhari gang murdered
अजीत सिंह (बायें) व घटनास्थल पर तैनात पुलिसकर्मी। - फोटो : अमर उजाला

मऊ के मुहम्मदाबाद गोहना के पूर्व ज्येष्ठ उप प्रमुख अजीत सिंह की हत्या की अहम वजह एक लाख के इनामी बदमाश कन्हैया विश्वकर्मा उर्फ डॉक्टर के बारे में पुलिस को लगातार सूचना देना था।  दरअसल, ध्रुव कुमार सिंह उर्फ कुंटू और फिर अखंड प्रताप सिंह के जेल में बंद होने के बाद अजीत आश्वस्त था कि दोनों अब जल्द बाहर नहीं आएंगे।

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ऐसे में अब वह खुद के लिए सबसे बड़ा खतरा चोलापुर थाने के हिस्ट्रीशीटर गिरधारी को मान कर जनवरी 2020 से लगातार उसकी मुखबिरी कर उसके बारे में सूचनाएं पुलिस को दे रहा था। दिसंबर 2020 के आखिरी दिनों से गिरधारी को लेकर अजीत एक बार फिर तेजी से सक्रिय हुआ और आखिरकार वह मारा गया।
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अजीत सिंह के खिलाफ आपराधिक आरोप में पहला मुकदमा वर्ष 2003 में छात्र राजनीति के दौरान दर्ज हुआ था। इसके बाद से हत्या होने तक अजीत के खिलाफ दर्ज मुकदमों की संख्या 19 थी और उसकी हिस्ट्रीशीट भी खुली थी। इसी बीच वह तमाम बदमाशों के संपर्क में आया और फिर गिरधारी से जुड़कर कुंटू सिंह का खास बन गया। 19 जुलाई 2013 को आजमगढ़ के जीयनपुर में पूर्व विधायक सर्वेश सिंह सीपू की हत्या से पहले अजीत ने कुंटू और गिरधारी से नाता तोड़ लिया था।

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मुंबई में छुपने की पुलिस को दी थी जानकारी

सीपू की हत्या के बाद अजीत ने पुलिस को गिरधारी के मुंबई में छुपने के अड्डे के बारे में बताया था। हालांकि पुलिस गिरधारी को पकड़ नहीं पाई थी लेकिन यहीं से वह अजीत को अपना दुश्मन समझने लगा। 30 सितंबर 2019 को वाराणसी में शिवपुर स्थित सदर तहसील परिसर में नीतेश सिंह उर्फ बबलू की हत्या में गिरधारी का नाम सामने आया तो अजीत उसे लेकर एक बार फिर सक्रिय हुआ।

 

Historysheeter Ajit Singh murder case in Lucknow Girdhari gang murdered
अजीत सिंह। - फोटो : अमर उजाला

जनवरी 2020 में आजमगढ़ के तरवां क्षेत्र में आयोजित विवाह समारोह में गिरधारी के आने की सूचना अजीत ने वाराणसी पुलिस को दी, लेकिन वह पकड़ा नहीं जा सका। गिरधारी को यह जरूर पता लग गया था कि अजीत ने उसके बारे में पुलिस को सूचना दी है। इसके बाद अजीत भी सतर्क रहते हुए लगातार गिरधारी की लोकेशन की टोह लेने का प्रयास करता रहता था। 

कोरोना काल के बाद फिर हुआ था सक्रिय

कोरोना काल में लॉकडाउन आदि के कारण अजीत शांत हो गया था। अगस्त 2020 के बाद गिरधारी को लेकर अजीत दोबारा सक्रिय हुआ और दिसंबर के आखिरी में उसके बारे में पुलिस को उसके बारे में फिर सूचनाएं देने लगा। 

पुलिस सूत्रों के अनुसार, अजीत की मुखबिरी के कारण गिरधारी की आवाजाही में अड़चन आने लगी तो उसने उसे ठिकाने लगाने की योजना बनाई। इसके बाद अजीत के ही कुछेक करीबियों को अपने पाले में लेकर गिरधारी ने उसकी रेकी करनी शुरू की। इसके बाद लखनऊ में मुफीद स्थान देखकर बुधवार की रात अजीत की हत्या कर दी गई।

 

आजमगढ़ के सफेदपोश ने मऊ में कराई थी बैठक, अब भूमिगत

आजमगढ़ के तरवां क्षेत्र का एक सफेदपोश अजीत की हत्या के बाद अपने परिवार के साथ भूमिगत हो गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार इसी सफेदपोश ने एक अरसे पहले मऊ के चिरैयाकोट क्षेत्र में पूर्वांचल के एक पूर्व बाहुबली सांसद, अखंड प्रताप सिंह, कुंटू और गिरधारी की बैठक कराई थी। इस सफेदपोश के लखनऊ स्थित घर पर रहने के अलावा उसका चारपहिया वाहन इस्तेमाल करते हुए भी गिरधारी को कई बार देखा जा चुका है। ऐसे में अब पुलिस उस सफेदपोश की तलाश कर रही है, जिससे यह पता लग सके कि पूर्व बाहुबली सांसद, कुंटू, अखंड और गिरधारी के बीच हाल के दिनों में आखिरकार क्या खिचड़ी पक रही थी।

डी-11 गैंग के सरगना कुंटू और बदमाशों के 125 करीबी पुलिस के रडार पर 

70 से अधिक आपराधिक मामलों का आरोपी ध्रुव कुमार सिंह उर्फ कुंटू आजमगढ़ जिले में वर्ष 2005 में रजिस्टर्ड डी-11 गैंग का सरगना है। इस गिरोह का सबसे तगड़ा शॉर्प शूटर गिरधारी है। पुलिस के अनुसार कुंटू का सहयोगी जेल में बंद अखंड है।

ऐसे में वाराणसी, मऊ और आजमगढ़ के अलावा पूर्वांचल के अन्य जिलों की पुलिस ने इन तीनों के जमानतदारों, मददगारों, शरणदाताओं और पारिवारिक सदस्यों का नए सिरे से सत्यापन शुरू किया है। इसके साथ ही सभी की गतिविधियों पर नजर भी रखी जा रही है। पुलिस डोजियर के अनुसार कुंटू के गिरोह में 22 बदमाश हैं। 22 लोग उसे शरण देते हैं और 11 लोग उसके जमानतदार हैं।

इसके अलावा कुंटू के सात पारिवारिक सदस्य हैं। वहीं, गिरधारी के परिवार में छह लोग हैं। इसके साथ ही पूर्वांचल के अलग-अलग जिलों से लेकर लखनऊ और मुंबई तक उसे 21 लोग शरण देते हैं। उधर, अखंड के पारिवारिक सदस्यों की संख्या 14 है। अखंड के साथी बदमाश नौ हैं। उसे तीन लोग संरक्षण देते हैं और 10 लोग सहयोग करते हैं।

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